पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार शाम भवानीपुर में बनाए गए स्ट्रॉन्ग रूम पर पहुंचीं। बीजेपी ने इसे ड्रामा करार देते हुए कहा कि वे हार के बहाने तलाश रही हैं। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में बीजेपी नेता शहनवाज हुसैन ने कहा, “जो चुनाव हारने वाला होता है, वह हार के बहाने पहले ही तलाशता है।”

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी चुनाव हार चुकी हैं, सारे एग्जिट पोल बता रहे हैं कि टीएमसी का सूपड़ा साफ हो चुका है। टीएमसी के नेताओं को पैकिंग करनी चाहिए, वो जाकर अभी भी ड्रामा कर रही हैं। स्ट्रॉन्ग रूम पर जाकर ड्रामा करके, धरना देकर वो बाद की कहानी लिख रही हैं। उनको लग रहा है कि जब चुनाव हारेंगे तो क्या-क्या इल्जाम लगाना है, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

शहनवाज हुसैन ने आगे कहा कि जब वो सत्ता में आई थी और बीजेपी हारी थी तो हमने स्वीकार किया था। ममता बनर्जी को अपनी हार स्वीकार कर लेनी चाहिए, चार तारीख के बाद कोई ड्रामा चलने वाला नहीं है। उन्होंने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर जो ड्रामा किया है, वो दुर्भाग्यपूर्ण है। यहां पढ़िए भवानीपुर में रात को क्या हुआ?

सुबह फिर स्ट्रॉन्ग रूम पर पहुंचे टीएमसी के कुणाल घोष

टीएमसी नेता कुणाल घोष शुक्रवार सुबह नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंडोर स्टेडियम पहुंचे। यहां स्ट्रॉन्ग रूम बनाया गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रात को यहां पहुंची थीं। टीएमसी की तरफ स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम से छेेड़छाड़ के आरोप लगाए जा रहे हैं।

न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, “यह स्ट्रॉन्ग रूम सील है लेकिन अचानक हमने देखा कि इसे खोलकर कर कुछ मूवमेंट हो रहा है। ये मूवमेंट क्यों हो रहा है, कैसे हो रहा है, इसीलिए हमने प्रदर्शन किया। उन लोगों ने कहा कि हमने मेल भेजा है, अगर मेल भेजा है तो घूसने क्यों नहीं दे रहे हैं। इसीलिए हम लोग धरने पर बैठे थे। बाद में DEO मैडम आईं और उन्होंने कहा कि गलती हुई है, ये नहीं होना चाहिए। हम सुबह सीसीटीवी पर मूवमेंट देखने आए थे।”

उन्होंने कहा कि अभी उसमें कोई मूवमेंट नहीं है लेकिन हमारे पास खबर है कि शाम को पांच बजे फिर से मूवमेंट हो सकती है। वहां पोस्टल बैलेट आएगी और फिर से मूवमेंट हो सकती है। इसलिए टीएमसी के सभी कैंडिटेट्स और पोलिंग एजेंट्स को हमने सूचित किया है। हमने चुनाव आयोग से भी निवेदन किया है कि अगर वहां पर फिर से मूवमेंट हो तो हमें भी गवाह के तौर पर वहां रखा जाना चाहिए।

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पश्चिम बंगाल में 96 ऐसी सीटें सामने आती हैं जो एक स्पष्ट पैटर्न दिखाती हैं। इनमें से 48 सीटों पर इस बार मतदाताओं की संख्या 2021 की तुलना में कम थी। ये 48 सीटें कुल 27.16 लाख हटाए गए नामों में से लगभग 28% का हिस्सा हैं। इससे संकेत मिले हैं कि SIR की वजह से वोट डालने वाले लोगों की संख्या प्रभावित हुई हो। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।