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शिवसेना के बाद कांग्रेस ने भी माना, उद्धव ठाकरे और पीएम मोदी में अच्छी दोस्ती

महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता असलम शेख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच बैठक पर शिवसेना नेता संजय राउत की टिप्पणी का समर्थन किया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। (फोटो: ट्विटर/@PMOIndia)

महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता असलम शेख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच बैठक पर शिवसेना नेता संजय राउत की टिप्पणी का समर्थन किया। शेख ने जोर देकर कहा कि एक साथ गठबंधन में न होने के बावजूद, ठाकरे और पीएम मोदी अच्छे दोस्त बने रहे। समाचार एजेंसी एएनआई ने शेख के हवाले से बताया, “मुझे समझ में नहीं आता कि इस टिप्पणी में क्या गलत है। सभी गैर-भाजपा राज्यों में मीडिया हमेशा ऐसा क्यों बोलता है? अगर किसी मुख्यमंत्री के प्रधानमंत्री के साथ अच्छे संबंध हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। ”

राउत ने बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा था, “मुख्यमंत्री का भाजपा के साथ 20 साल का गठबंधन था। वे आज अलग हो सकते हैं लेकिन उनकी दोस्ती में कोई अंतर नहीं है।” राउत ने प्रधानमंत्री के साथ ठाकरे की मुलाकात का बचाव किया था, जो 8 जून को उनके आधिकारिक आवास पर हुई थी, जिसमें कहा गया था कि वे “मौजूदा राजनीतिक स्थिति” पर चर्चा करने के लिए मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम उद्धव ठाकरे के मिलने पर राउत ने संवाददाताओं से कहा, यह किसी भी तरह से शिवसेना के महाविकास अघाड़ी से अलग होने का संकेत नहीं है। शिवसेना और उसके पूर्व गठबंधन सहयोगी बीजेपी के बीच संबंध दोस्ताना हो सकते हैं।

राउत और शेख दोनों ने अच्छे संबंधों पर जोर दिया। नेताओं ने इस पर जोर देते हुए कहा कि इससे राज्य का और अधिक विकास होगा। शेख ने कहा, “सभी चाहते हैं कि राज्य के विकास के लिए केंद्र के साथ बेहतर समन्वय के लिए प्रधानमंत्री के साथ उनके अच्छे संबंध हों। हमारी विचारधारा राजनीतिक रूप से अलग हो सकती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे व्यक्तिगत रूप से अच्छे संबंध नहीं हो सकते।”

मालूम हो कि साल 2019 में विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने बीजेपी को महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए समर्थन देने से मना कर दिया था। शिवसेना चाहती थी कि आधे कार्यकाल के लिए बीजेपी और बाकी कार्यकाल के लिए शिवसेना का सीएम हो।

आखिर में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस उद्धव ठाकरे को सीएम बनाने पर राजी हुई थीं और महाविकास अघाड़ी सरकार का गठन हुआ था।

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