अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन समाजवादी पार्टी (SP) के साथ सीट बंटवारे के समझौते को अभी तक औपचारिक रूप नहीं दिया गया है। ऐसे में कांग्रेस के सामने एक और चुनौती खड़ी हो गई है- प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के बीच सामने आए मतभेद।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में पार्टी के अंदर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए दखल दिया था और AICC प्रभारी को बदल दिया था। आपको बता दें कि 2027 की शुरुआत मे पंजाब में विधानसभा चुना होने हैं।
दोनों नेताओं के काम करने का तरीका काफी अलग
प्रदेश कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं- वाराणसी के भूमिहार नेता अजय राय और मुख्य रूप से दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रहे दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम के काम करने के तरीके काफी अलग हैं। इसी वजह से दोनों के बीच टकराव की स्थिति बनी है। राय को अगस्त 2023 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किया गया था जबकि गौतम ने इसी साल जून में AICC प्रभारी का पद संभाला।
AICC के सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने गौतम के साथ करीब एक घंटे तक बैठक की। बैठक में उन मुद्दों पर चर्चा हुई जो अजय राय के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस इकाई के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रियंका गांधी वाड्रा 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू होने के बाद से उत्तर प्रदेश से जुड़े पार्टी मामलों में सक्रिय रही हैं और कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा ले चुकी हैं। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं को चिंता है कि अजय राय और राजेंद्र पाल गौतम के बीच बढ़ता मतभेद अगले साल होने वाले बेहद महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव में पार्टी की संभावनाओं पर असर डाल सकता है।
कब बढ़ी नाराजगी?
सूत्रों के मुताबिक, अजय राय की राजेंद्र पाल गौतम से नाराजगी तब और बढ़ गई जब गौतम ने कथित तौर पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को बदलने की बात उठाई। गौतम का मानना है कि कांग्रेस की दलित-मुस्लिम सामाजिक गठजोड़ बनाने की रणनीति के लिए प्रदेश अध्यक्ष के पद पर किसी मुस्लिम नेता को रखना ज्यादा फायदेमंद होगा। बताया जाता है कि गौतम ने जौनपुर के पूर्व विधायक नदीम जावेद का नाम भी सुझाया है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा, ”गौतम के मुस्लिम नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे सोच साफ है। अगर प्रदेश का प्रभारी दलित हो और प्रदेश अध्यक्ष मुस्लिम तो सीट बंटवारे की बातचीत में समाजवादी पार्टी (SP) पर ज्यादा दबाव बनाया जा सकता है क्योंकि SP मुस्लिम वोटों पर काफी निर्भर है।”
प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने अजय राय और राजेंद्र पाल गौतम की जोड़ी को ‘मुश्किल’ बताया है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ”राय की राजनीति मंदिरों और सवर्ण समुदायों के आसपास केंद्रित है जबकि गौतम कट्टर अंबेडकरवादी हैं और राजनीति में धर्म को मिलाने को लेकर सहज नहीं हैं। ऐसे में दोनों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है।”
इस नेता ने गौतम और राय के बीच कामकाजी रिश्तों की तुलना राय और पिछले AICC प्रभारी अविनाश पांडे के रिश्तों से भी की। उन्होंने कहा, ”पांडे के राय के साथ अच्छे संबंध थे। वह अक्सर मंदिरों में भी जाते थे और राय की विचारधारा से भी काफी हद तक सहमत थे। लेकिन समस्या यह है कि उत्तर प्रदेश में सवर्ण वोट पहले से ही मजबूती से बीजेपी के साथ हैं। ऐसे में राय कांग्रेस के लिए ज्यादा कुछ नहीं जोड़ पा रहे हैं।”
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ऐसे कई मौके आए हैं जब पार्टी के कार्यक्रमों में अजय राय और राजेंद्र पाल गौतम एक-दूसरे से दूरी बनाते नजर आए। वहीं अजय राय, गौतम के काम करने के तरीके से भी खुश नहीं बताए जाते। प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं का आरोप है कि AICC प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष की तरह काम करने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्टी के एक नेता ने कहा, ”AICC की ओर से किसी राज्य में भेजे गए प्रभारी की भूमिका एक पर्यवेक्षक की होती है। लेकिन गौतम नेता की तरह काम करने की कोशिश कर रहे हैं। यह बात प्रदेश नेतृत्व और अजय राय को पसंद नहीं आ रही है। गौतम उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को भी ठीक से नहीं समझते। पार्टी में कई बड़े नेता हैं जो लगातार हाईकमान को सलाह देते रहे हैं जैसे राजीव शुक्ला, सलमान खुर्शीद और प्रमोद तिवारी, जो सभी उत्तर प्रदेश से हैं।”
राहुल गांधी के करीबी राजेंद्र गौतम
हालांकि, AICC के सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने गौतम को संगठन में बदलाव करने की काफी छूट दी है। AICC के एक सूत्र ने कहा, ”गौतम राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) से आने के बावजूद जिस तरह उन्हें कांग्रेस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं उससे साफ है कि राहुल गांधी उनका समर्थन कर रहे हैं।”
बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे ‘संगठन सृजन’ अभियान के तहत जिला अध्यक्षों की तैयार सूची से भी हाईकमान खुश नहीं है। AICC सूत्रों के अनुसार, इस सूची में सवर्ण नेताओं के नाम ‘बहुत ज्यादा’ है जबकि पार्टी का जोर दलित और OBC वर्ग को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर है।
AICC के एक सूत्र ने कहा कि शुक्रवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल के साथ हुई बैठक में गौतम ने भी इस मुद्दे को उठाया था। हालांकि, अजय राय और राजेंद्र पाल गौतम दोनों ने अपने बीच किसी तरह के मतभेद से इनकार किया है।
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं से उनके बीच मतभेद की खबरों के बारे में सवाल पूछा गया। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उस समय हुई थी जब AIMIM नेता असीम वकार कांग्रेस में शामिल हुए। गौतम ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि ये ‘बीजेपी की ओर से फैलाई जा रही अफवाहें’ हैं।
