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पैंगोंग झील के बाद अब लिपुलेख पास के करीब सैनिक जुटा रहा चीन, एक हफ्ते में LAC के नजदीक बढ़ा दी PLA की मूवमेंट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने लिपुलेख पास के करीब अपनी सीमा में एक हजार सैनिक जुटा लिए हैं, इसके जरिए वो भारत को अपने तैयार होने का संदेश दे रहा है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: August 1, 2020 7:55 PM
india china tension, indian army, galwan faceoff,जून में गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच एलएसी पर हालात काफी तनावपूर्ण हैं।

भारत और चीन के बीच लद्दाख से लगी एलएसी पर पिछले करीब तीन महीने से ज्यादा समय से तनाव जारी है। इस बीच खबर है कि चीन ने अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की कुछ टुकड़ियां उत्तराखंड के लिपुलेख पास के करीब पहुंचा दी हैं। यह लद्दाख स्थित लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के अलावा उन कुछ इलाकों में है, जहां चीनी सेना की बढ़ती गतिविधियां देखी गई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सैन्य अफसरों ने हाल ही में चीनी टुकड़ियों को लद्दाख के अलावा एलएसी के अन्य इलाकों में भी अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश करते देखा है। खासकर अंदरूनी इलाकों में वह अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। एक टॉप सैन्य कमांडर के मुताबिक, चीनी सेना ने एलएसी के पार लिपुलेख पास, उत्तरी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर फौज इकट्ठा की है।

बता दें कि लिपुलेख पास हाल ही में चर्चा में आया था। दरअसल, लिपुलेख पास का ही रास्ता मानसरोवर यात्रा के मार्ग में आता है। नेपाल ने भारत की तरफ से हिमालय में मौजूद इस पास पर बनी 80 किमी सड़क के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था। लिपुलेख पास को भारत और चीन से लगी एलएसी पर लोग जून से अक्टूबर के बीच सालाना व्यापार के लिए इस्तेमाल करते हैं। नेपाल ने हाल ही में कालापानी के साथ लिपुलेख के इलाके को अपने नक्शे में शामिल कर लिया था। यह जगह भारत-चीन और नेपाल के बीच स्थित ट्राई-जंक्शन का हिस्सा है।

बताया गया है कि लिपुलेख पास पर पीएलए ने सीमा से कुछ दूर करीब एक हजार सैनिक जुटा लिए हैं। एक सैन्य अफसर ने कहा कि यह साफ संदेश है कि चीनी टुकड़ियां तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने भी सीमा पर चीनी सेना के आमने-सामने के लिए टुकड़ियां भेज दी हैं। भारतीय सेना नेपाल के हालिया दावों के बाद उस पर भी करीब से नजर रख रही है। एक अन्य सैन्य कमांडर ने कहा कि इसकी उम्मीद काफी कम है कि हम सीमा से अपनी नजरें जरा भी देर के लिए हटा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब चीन की विस्तारवादी नीति से बचने के लिए यही नीति जरूरी है।

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