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ओखी चक्रवात के बाद नौसेना और तटरक्षक बल ने शुरू किया तलाशी अभियान

पोत, तलाशी विमान डोर्नियर, विमान और हेलीकॉप्टर की मदद से तूफान में फंसे लोगों को ढूंढ़ा जा रहा है।

Author कोच्चि | December 2, 2017 17:22 pm
चेन्‍नई में भारी बारिश से हालात अस्‍त-व्‍यस्‍त हो गए थे। (Photos: ANI)

भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के जवानों ने चक्रवात ओखी के बाद केरल और लक्षद्वीप के तटों पर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। पोत, तलाशी विमान डोर्नियर, विमान और हेलीकॉप्टर की मदद से तूफान में फंसे लोगों को ढूंढ़ा जा रहा है। रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि आईएनएस निरीक्षक, आईएनएस जमुना और आईएनएस सागरध्वनि को तिरुअनंतपुरम और
कोल्लम में तलाशी और बचाव अभियान में चलाया गया है। आईएनएस शार्दुल और आईएनएस शारदा लक्षद्वीप की तरफ बढ़ रहे हैं। दक्षिणी नौसैन्य कमान से शुक्रवार को रवाना हुए पोत शनिवार शाम को लक्षद्वीप पहुंच गए। प्रवक्ता ने कहा कि 36 व्यक्तियों को लेकर आठ नौकाओं के काल्पेनी द्वीप के पास भटक जाने की खबर है।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि चक्रवात ओखी के कारण केरल और लक्षद्वीप तट के पास समुद्र में फंसे 531 मछुआरों को बचा लिया गया है। विजयन ने कहा कि केरल से अब तक 393 लोगों को बचाया गया है । राज्य सरकार ने तूफान में मारे गए लोगों के परिजन को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। विजयन ने संवाददाताओं बताया कि बचाए गए 132 मछुआरे राज्य की राजधानी तिरुअनंतपुरम के 66, कोझीकोड के 55, कोल्लम के 40 और त्रिसूर के सौ लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा 138 मछुआरों को लक्षद्वीप द्वीपसमूह से बचाया गया।

विजयन ने कहा कि 10 लाख रुपये का मुआवजा मत्स्य विभाग द्वारा चार लाख रुपये की वित्तीय सहायता के अतिरिक्त होगा । आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि लक्षद्वीप के 10 द्वीपों में 31 राहत शिविर खोले गए हैं। अब तक 1047 लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचाया जा चुका है। ओखी चक्रवाती तूफान के कारण व्यापक पैमाने पर नुकसान होने की बात कही जा रही है। हालांकि, जांच पड़ताल के बाद ही नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। मालूम हो कि दक्षिणी राज्यों में आमतौर पर चक्रवाती तूफान आते रहते हैं। इसके चलते जानमाल की हानि होती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्य भी चक्रवात से बुरी तरह प्रभावित होते हैं। बंगाल की खाड़ी में आने वाले तूफान से इन दाेनों राज्यों में व्यापक तबाही मचती है। झारखंड पर भी इसका असर पड़ता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में चक्रवात का पूर्वानुमान लगाने की स्थिति में काफी सुधार आया है।

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