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Asian Games आज से शुरू, PM मोदी करेंगे उद्घाटन

विभिन्न कारणों से कई बार स्थगित हुए दक्षिण एशियाई खेल आखिरकार शुक्रवार से शुरू हो जाएंगे। आठ सार्क देशों की इस 12 दिन तक चलने वाली प्रतियोगिता में मेजबान भारत के अपनी बादशाहत स्थापित करने की उम्मीद है।

गुवाहाटी | Updated: February 5, 2016 12:06 AM
चित्र का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है। (Image-socialsports)

विभिन्न कारणों से कई बार स्थगित हुए दक्षिण एशियाई खेल आखिरकार शुक्रवार से शुरू हो जाएंगे। आठ सार्क देशों की इस 12 दिन तक चलने वाली प्रतियोगिता में मेजबान भारत के अपनी बादशाहत स्थापित करने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंदिरा गांधी एथलेटिक्स स्टेडियम में रंगारंग उद्घाटन समारोह में इन खेलों का शुभारंभ करेंगे जिसमें सार्क देशों के 2500 एथलीट भाग लेंगे।

दक्षिण एशियाई ओलंपिक परिषद के अंतर्गत कराए जाने वाले सैग खेल चार साल के विलंब के बाद आयोजित कराए जा रहे हैं। सैग खेलों का 12वां चरण 2012 में नई दिल्ली में कराया जाना था लेकिन राजधानी में विधानसभा चुनावों के कारण इन्हें स्थगित कर दिया गया। इसके बाद भारतीय ओलंपिक संघ (आइओए) को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने दिसंबर 2012 और फरवरी 2014 के बीच निलंबित कर दिया जिससे इसमें और देरी हो गई।

आइओसी द्वारा आइओए का निलंबन खत्म करने के बाद खेलों की मेजबानी केरल को दिए जाने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन पिछले साल एक और विलंब के बाद इन्हें गुवाहाटी और शिलांग में आयोजित करने का फैसला किया गया। इस तरह इन दोनों शहरों को भारत के तीसरे सैग खेलों की मेजबानी का मौका मिला। इससे पहले 1987 में कोलकाता और 1995 में चेन्नई में इन खेलों को कराया गया था।

हालांकि उद्घाटन समारोह से एक दिन पहले आयोजकों को करारा झटका लगा जब फीबा ने खेलों से बास्केटबाल की मान्यता रद्द कर दी। इसमें भाग ले रहे देशों को बता दिया गया कि 11 से 16 फरवरी तक यहां होने वाली इस स्पर्धा में हिस्सा नहीं लें। फीबा ने भारतीय बास्केटबाल महासंघ के एक गुट को मान्यता दी हुई है जबकि आइओए की मान्यता एक दूसरे गुट को मिली हुई है। आलम यह है कि आइओए और फीबा से मान्यता प्राप्त दोनों ही गुटों ने अपनी अलग अलग टीम का चयन कर लिया है। हालांकि आयोजकों को अब भी इसका हल निकल आने की उम्मीद है।

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 2010 के पिछले चरण का आयोजन किया गया था, जिसमें भारत ने 528 में से 175 पदक अपनी झोली में डाले थे। इसमें 90 स्वर्ण पदक थे। पाकिस्तान 80 पदक के साथ दूसरे स्थान पर था, जिसमें उसके पास 19 स्वर्ण थे।

ढाका में 23 खेल प्रतियोगिताओं में 2000 एथलीटों ने शिरकत की थी जबकि गुवाहाटी और शिलांग में 23 खेलों की 228 स्पर्धाएं होंगी जिससे इस बार का चरण काफी बड़ा होगा। इस बार 228 स्वर्ण, 228 रजत और 308 कांस्य पदक दाव पर लगे होंगे। पूर्वोत्तर के ये दोनों शहर 3,333 एथलीटों और अधिकारियों की मेजबानी करेंगे। इस बार पुरुष और महिला वर्ग में बराबर स्पर्धाएं होंगी जो खेलों के इतिहास में पहली बार होगा। इसी वजह से इस बार इन्हें ‘जेंडर इक्वल गेम्स’ का भी नाम दिया जा रहा है।

केंद्र सरकार ने असम और मेघालय सरकार को केवल सुरक्षा इंतजामों के लिए ही क्रम से 60 और सात करोड़ रुपए दिए हैं। खेलों का कुल बजट 150 करोड़ रुपए से ज्यादा है जबकि इसमें सुरक्षा के लिए दी गई राशि शामिल नहीं है।

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