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कुंभ में पीएम ने धोए थे पैर, एक सफाईकर्मी ने कहा- सम्‍मान से रोजी नहीं चलती है

कुम्भ मेले के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धोए थे पांच स्वच्छता कार्यकर्ताओं के पैर। पीएम से ढंग से न मिल पाने से नाराज हैं कर्मचारी। एक सफाईकर्मी ने कहा- हमें पक्की नौकरी चाहिए सम्‍मान से रोजी नहीं चलती है।

Author March 5, 2019 1:09 PM
पीएम मोदी ने कुम्भ के दौरान पांच सफाई कर्मचारियों के पैर धोए थे (picture source indian express)

प्यारे लाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया “गमछा (दुपट्टा)” अभी तक नहीं निकाला। होरी लाल का कहना है कि हर बार जब वह अपनी आंखें बंद करता है, तो वह उस पल का सपना देखता है, जब पीएम मोदी ने झुक कर उनके पैर धोए थे।

कुंभ के आखिरी दिन 24 फरवरी को पीएम मोदी के उनके साथ बिताए पांच मिनट अभी भी स्वच्छता कार्यकर्ताओं के लिए सपने जैसे हैं। उन्हें अफसोस है कि उन्हें पीएम मोदी से ठीक से बात करने का मौका नहीं मिला न ही वे अपने लिए – वेतन वृद्धि, एक पक्की नौकरी और जो काम वे लोग करते हैं उसके लिए मशीन भी नहीं मांग पाए। 35 साल के होरी लाल उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के धोराता गाँव से कुंभ मेले में काम करने आए थे। होरी लाल उस घंटे को याद करते हैं जो उन्होंने पीएम के आने के इंतजार में एक बंद कमरे में चार अन्य लोगों के साथ बिताए थे। उन्होंने कहा, “हमें बताया गया था कि पीएम हमसे मिलेंगे, न की हमारे पैर धोएंगे।” होरी का कहना है कि इस तरह के “बड़े आदमी” से अपने पैर धुलवाना उनके लिए शर्मनाक था। होरी ने बताया उस दिन उन्होंने अच्छे से पूरा स्नान किया था।

वाल्मीकि समुदाय से संबंध रखने वाले होरी अपने परिवार के साथ नवंबर से यहां हैं, जिनमें पत्नी राजकुमारी (32), और बेटे अमित (15), आकाश (12) और कपिल (10) शामिल हैं। बच्चे मेले में आंगनवाड़ी स्कूल जाते हैं, जबकि राजकुमारी एक सफाई कर्मचारी के रूप में भी काम करती है। यह होरी का स्वच्छता कार्यकर्ता के रूप में ये चौथा कुंभ है – वह ज्यादातर गाँव में मिस्त्री के रूप में काम करता है और उसे 24 फरवरी की तरह अपनी जिंदगी का कोई भी पल याद नहीं है। होरी ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा “वह एक महान व्यक्ति हैं। वह “सम्मान” के लिए आभारी है लेकिन इस से हमारे जीवन में कोई अंतर नहीं है। हम पहले भी यह सफाई का काम कर रहे थे और अब भी यही कर रहे हैं।” होरी ने आगे कहा “ये काम मुझे बिलकुल पसंद नहीं है। मैं काम के चक्कर में यहां वहां भटकना पसंद नहीं करता। काम कुछ भी हो, पक्का होना चाहिए। प्रधानमंत्री अगर नौकरी दे देते तो अच्छा होता। यहां तक ​​की वेतन वृद्धि, एक दिन का 310 रुपये भी अच्छा होगा।”

वहीं दूसरे स्वच्छता कर्मचारी 40 वर्षीय प्यारे लाल की इच्छा है कि उन्हें मोदी के साथ अधिक समय मिले। “सम्मान” को याद करते हुए उन्होंने कहा “वह हमसे एक मिनट के लिए भी मुश्किल से मिले। मुझे ठीक से बात करने का मौका नहीं मिला।” प्यारेलाल के आठ बच्चे हैं। उनके तीन बच्चे दिहाड़ी पर काम करते हैं। प्यारेलाल का मानना है पीएम को कर्मचारियों की वेतन वृद्धि करनी चाहिए थी। वहीं ज्योति मेहतर का कहना है हम लोगों को कम से कम 500 रूपए दिन मिलना चाहिए। ज्योति अपने पति के साथ पहली बार कुम्भ में आई है। उसका पति भी सफाई कर्मचारी है। ज्योति पीएम से नौकरी मांगना चाहती थीं। ज्योति ने कहा ” वो कुछ भी कर सकते हैं। सम्मान से रोज़ी नहीं चलती। वे पीएम से मैनुअल स्कैवेंजिंग को खत्म करने के लिए बात करना  चाहती थी। ज्योति ने कहा ” दूसरे लोगों की गंदगी को साफ करने के लिए सीवर में प्रवेश नहीं करना चाहिए। मनुष्य को ऐसा काम क्यों करना जो एक मशीन कर सकती है?”

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