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लोकसभा चुनाव में कंधे से कंधा मिलाकर लड़े, अब बेरोजगारी पर शिवसेना ने लगाई बीजेपी की क्लास

शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में बेरोजगारी दर में हुई ऐतिहासिक वृद्धि पर चिंता जाहिर की गई है और बीजेपी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। मुखपत्र ने बीजेपी के उस वादे पर तंज कसा है, जिसमें उसने हर साल 2 करोड़ रोजगार मुहैया कराने की बात कही थी।

शिवसेना ने बढ़ती बेरोजगारी को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है। (फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

लोकसभा चुनाव में अपने विरोधियों को चारो खाने चित करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के बीच फिर से राजनीतिक रस्सा-कस्सी तेज़ हो गई है। चुनावों में कंधे से कंधा मिलाकर महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी को धुल चटाने वाले सहयोगी दल अब बेरोजगारी जैसे राष्ट्रीय संकट पर आमने-सामने हैं। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए बेरोजगारी की बढ़ती दर को लेकर मोदी सरकार की क्लास लगा दी है। सोमवार को सामना में लिखा गया, “दिल्ली में नई सरकार की पहल वाली तस्वीरों को काफी अच्छे से रंग-रोगन किया गया, लेकिन तस्वीरों में चुनौतियों के काले धब्बे दिखाई देने शुरू हो गए हैं। एक साथ सिर पर ओले गिरने शुरू हो चुके हैं, ऐसे में यह काफी मुश्किल है कि किन चीजों से सिर को छिपाया जाए।”

लेख में आगे कहा गया है, “हालांकि, बीजेपी के केंद्र में वापसी पर सेंसेक्स काफी गुलजार है, लेकिन बेरोजगारी की दर उच्चतम स्तर पर है और जीडीपी में गिरावट का दौर लगातार जारी है, ये शुभ संकेत नहीं हैं।” “यह कहीं से उपयुक्त नहीं है कि बढ़ती बेरोजगारी पर बहस की जाए, इसकी जगह तुरंत कार्रवाई को अमल में लाना होगा।” सामना लिखता है कि बेरोजगारी की आग देश में फैलती जा रही है और नेशनल सैंपल सर्वे के मुताबिक बेरोजगारी का आंकड़ा 2017-18 में 6.1 फीसदी तक बढ़ गया है। यह आंकड़ा पिछले 45 वर्ष की तुलना में सबसे ज्यादा है।

शिवसेना का मुखपत्र लिखता है कि बेरोजगारी के आंकड़ों की खुद केंद्र सरकार का श्रम मंत्रालय पुष्टि करता है। यहां तक कि ये आंकड़े हमारे द्वारा नहीं बल्कि खुद केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए हैं। आगे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान का हवाला देते हुए कहा गया है, “बढ़ती बेरोजगारी हमारी गलतियों का नतीजा नहीं है और बीजेपी ने इसे सिर्फ पांच सालों में तैयार नहीं किया है। यह बात नितिन गडकरी ने कही है। हम गडकरी के विचारों से सहमत हैं, लेकिन उन्होंने हर साल 2 करोड़ नौकरी मुहैया कराने का वादा किया था। इस लिहाज से पिछले 5 सालों में 10 करोड़ युवाओं को रोजगार मिलने चाहिए थे।”

गौरतलब है कि बेरोजगारी से संबंधित आंकड़ा उस वक्त जारी किया गया है, जब मोदी 2.0 की कैबिनेट ने अपना कार्यभार संभाल लिया। वैसे चुनाव के दौरान बेरोजगारी से संबंधित आंकड़ा रिलीज नहीं करने को लेकर भी मोदी सरकार पर विपक्ष द्वारा हमले किए गए। लेकिन, उसी दौरान यह आंकड़ा भी लीक हो गया था। आंकड़े के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 7.8 फीसदी है, जबकि ग्रामीण इलाकों में इसकी दर 5.3 फीसदी है। वहीं लैंगिक आधार पर बात करें तो पुरुषों में बेरोजगारी दर 6.2 और महिलाओं में 5.7 फीसदी है।

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