LAC विवाद: चीन का हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा से पीछे हटने से इनकार, कहा- भारत को जितना हासिल हुआ, उतने से खुश रहे

बताया गया है कि हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा के पीपी-15 और पीपी-17ए पर चीनी सेना की प्लाटून तैनात है। यह पहले की कंपनी की तैनाती से कुछ कम संख्या है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: April 18, 2021 9:05 AM
India-China, Border Disputeभारत और चीन के बीच लद्दाख में पिछले साल शुरू हुए विवाद का अब तक हल नहीं निकल सका है। (एक्सप्रेस फोटो)

भारत और चीन के बीच लद्दाख स्थित एलएसी पर तनाव अब भी जारी है। कुछ दिनों पहले ही पैंगोंग सो छोड़ने के बाद एलएसी पर टकराव वाली और जगहों को भी चरणबद्ध तरीके से छोड़ने का वादा करने वाला चीन अब हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा के इलाके से पीछे हटने से मुकर गया है। बता दें कि करीब 15 दिन बाद ही भारत और चीन के बीच लद्दाख पर शुरू हुए तनाव को एक साल पूरे हो जाएंगे। हालांकि, चीन ने अब तक विवाद सुलझाने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

द संडे एक्सप्रेस को 9 अप्रैल को भारत और चीन के बीच हुई कोर कमांडर स्तर की बैठक की जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक, चीनी सेना ने हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा के अलावा डेपसांग प्लेन्स से भी पीछे हटने से इनकार कर दिया है। चीन के साथ विवाद सुलझाने में शामिल रहे एक उच्च सूत्र ने बताया है कि चीन ने पहले हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा के पैट्रोलिंग पॉइंट 15 और पैट्रोलिंग पॉइंट-17ए से सेना पीछे हटाने पर सहमति जताई थी। लेकिन बाद में उसने इससे इनकार कर दिया। हाल में दोनों सेनाओं के बीच जो बात हुई है, उसमें चीन ने कहा है कि भारत को जो कुछ हासिल हुआ है, उसे उससे खुश होना चाहिए।

बताया गया है कि पीपी-15 और पीपी-17ए पर चीनी सेना की प्लाटून तैनात है। यह पहले की कंपनी की तैनाती से कुछ कम संख्या है। बता दें कि भारतीय सेना की एक प्लाटून में 30-32 जवान होते हैं, जबकि कंपनी में 100 से 120 सैनिक होते हैं। सूत्र का कहना है कि इन जगहों पर आवाजाही के लिए सड़कों की जरूरत नहीं पड़ती। यहां पत्थर के रास्तों पर भी चला जा सकता है और यहां पलटवार की क्षमता भी काफी तेज है। सूत्र ने यह भी कहा कि चीनी सेना भारतीय सीमा के काफी अंदर हैं।

गौरतलब है कि पैंगोंग सो से चीनी सेना ने फरवरी में ही लौटने का ऐलान कर दिया था। तबसे तनाव वाले फिंगर-4 इलाके से लेकर फिंगर-8 तक के इलाके में दोनों ही सेनाओं की गश्त बंद है। बताया गया है कि भारत फिंगर-8 तक पहुंचने में कभी सफल ही नहीं हो पाया है, जिसे वह तनाव से दो-तीन साल पहले तक असल एलएसी मानता रहा है।

इसके अलावा डेपसांग प्लेन्स पर स्थिति दोनों देशों के बीच तनाव से पहले ही बिगड़ी हुई है। यहां भारतीय सेना 2013 के बाद से ही पारंपरिक गश्त सीमा तक नहीं पहुंच पाई है। डेपसांग का मुद्दा हाल ही में सैन्य कमांडरों की बातचीत में जोड़ा गया है। सूत्र का कहना है कि लद्दाख में चीन से तनाव के दौरान डेपसांग में कुछ भी नहीं हुआ था। यहां बीते काफी समय से चीनी सेना गश्त वाले इलाकों में आकर सेना को रोक देती है।

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