ताज़ा खबर
 

हिज्बुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद 6 साल में सबसे ज्यादा कश्मीरी युवाओं ने पकड़ी आतंक की राह

केन्द्र सरकार जम्मू-कश्मीर के पुलिस स्टेशनों से प्राप्त डाटा के आधार पर आतंकियों की गिनती करती है। सरकार के मुताबिक अगर कोई शख्स औपचारिक रुप से आतंकी संगठनों के साथ शामिल हो जाता है तो उसे आतंकी माना जाता है।

हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी को पिछले साल सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था (File photo)

आतंकवाद पर जम्मू कश्मीर से चौकाने वाले आंकड़े मिले हैं। साल 2016 में लगभग 90 लोगों ने आतंकवाद की राह पकड़ी। ये डाटा पिछले 6 साल में सबसे ज्यादा है। सबसे चिंताजनक बात ये है कि इन सभी लोगों ने हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद आतंक का रास्ता चुना है। पिछले साल सुरक्षा बलों के साथ एक एनकाउंटर में हिज्बुल मुजाहिद्दीन का कमांडर बुरहान वानी मारा गया था। गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने बुधवार को संसद में बताया कि पिछले साल जब घाटी में प्रदर्शन हो रहा था उस दौरान लगभग 88 लोगों ने आतंकवाद का रास्ता अख्तियार किया था। इनमें से 56 आतंकी दक्षिण कश्मीर से थे जो कि बुरहान वानी की मौत के बाद सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प का केन्द्र बिन्दू था। इस साल 18 मार्च तक लगभग 16 स्थानीय लोग आतंकवादियों के साथ शामिल हो चुके हैं।

पिछले साल सुरक्षा बलों के साथ झड़प में कुल मिलाकर 100 लोग मारे गये, इनमें सुरक्षा बल भी शामिल हैं। इस दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की वजह से कई लोगों को आंखों में चोटें आईं और कई की रोशनी चली गई। आंकड़े दिखाते हैं कि 2014 के बाद स्थानीय लोगों का आतंकवाद की ओर रुझान बढ़ा है। 2014 में ही भारत ने संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरु को फांसी पर चढ़ाया था। इसके बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हथियार उठा लिये थे और 53 लोग आतंकी समूहों के साथ मिल गये थे। केन्द्र सरकार जम्मू-कश्मीर के पुलिस स्टेशनों से प्राप्त डाटा के आधार पर आतंकियों की गिनती करती है। सरकार के मुताबिक अगर कोई शख्स औपचारिक रुप से आतंकी संगठनों के साथ शामिल हो जाता है तो उसे आतंकी माना जाता है। इसके अलावा अगर उसने अकेले भी सुरक्षा बलों के खिलाफ हथियार उठा लिया तो भी उसे आतंकी माना जाता है।

गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में हिंसा की घटना बॉर्डर पार घुसपैठ से जुड़ी है, ये आंकड़े ये भी बताते हैं कि कश्मीरी आतंक की राह तभी पकड़ते हैं जब किसी घटना की वजह से यहां के स्थानीय लोगों में सरकार के प्रति जबर्दस्त गुस्सा होता है।

महाकौशल एक्सप्रेस के 8 डिब्बे पटरी से नीचे; करीब 22 लोग घायल

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 300 से 20 हजार पर पहुंच गया है पूर्व सांसदों का पेंशन, 33 साल में लगातार लाभकारी होता गया है नियम
2 अटॉर्नी जनरल की सुप्रीम कोर्ट में दलील- मेरठ गैंग रेप पर आजम खान का बयान अभिव्यक्ति की आजादी के दायरे में है
ये पढ़ा क्या?
X