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25 यूरोपीय राजनयिकों के साथ कश्मीर दौरे के बाद बोले फ्रेंच एम्बेसडर- जल्द दूर करें सारे प्रतिबंध

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त होने और प्रदेश के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित होने के छह महीने बाद स्थिति का आकलन करने के उद्देश्य से 25 विदेशी राजनयिकों का दूसरा प्रतिनिधिमंडल बुधवार (12 फरवरी, 2020) को यहां पहुंचा था।

Translated By Ikram नई दिल्ली | Updated: February 16, 2020 8:11 AM
भारत में फ्रांसीसी राजदूत इमैनुएल लेनिन।

भारत में फ्रांसीसी राजदूत इमैनुअल लेनिन ने शनिवार (15 फरवरी, 2020) को कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति को सामान्य करने के लिए अधिकारी महत्वपूर्ण प्रयास कर रहे थे, हालांकि शेष प्रतिबंधों को जितनी जल्दी हो सके हटाया जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त होने और प्रदेश के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित होने के छह महीने बाद स्थिति का आकलन करने के उद्देश्य से 25 विदेशी राजनयिकों का दूसरा प्रतिनिधिमंडल बुधवार (12 फरवरी, 2020) को यहां पहुंचा था।

इस दल में अफगानिस्तान, आस्ट्रिया, बुल्गारिया, कनाडा, चेक गणराज्य, डेनमार्क, डोमिनिकन रिपब्लिक, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, गिनिया गणराज्य, हंगरी, इटली एवं केन्या के राजदूत शामिल रहे। इसके अलावा किर्गिस्तान, मेक्सिको, नामीबिया, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, पोलैंड, रवांडा, स्लोवाकिया, ताजकिस्तान, यूगांडा और उज्बेकिस्तान के राजदूत भी इस जत्थे के हिस्से के रूप में कश्मीर आए थे।

लेनिन ने बातचीत में संडे एक्सप्रेस से कहा, ‘यह यात्रा महत्वपूर्ण थी, क्योंकि एक राजदूत के रूप में, मुझे इस उद्देश्य के लिए मूल्यांकन करने के लिए खुद की आंखों से स्थिति देखने की जरुरत है। स्थानीय अधिकारियों के साथ, स्थानीय मीडिया और व्यापार समुदाय के कुछ हिस्सों के साथ सीधे बातचीत करना सार्थक था।

उन्होंने आगे कहा, ‘यह स्पष्ट है कि अधिकारियों द्वारा स्थिति को सामान्य बनाने और आर्थिक विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं, जिनके लिए लोगों को बहुत उम्मीदें हैं। इसका संकेत शेष प्रतिबंधों को जल्द से हटाने से है।’

लेनिन से एक दिन पहले कश्मीर पर ही विदेशी मामलों और सुरक्षा नीति के लिए यूरोपीय संघ के प्रवक्ता हेनरिक्स ने टिप्पणी कर कहा था कि जब हम गंभीर सुरक्षा चिंताओं को पहचानते हैं, तो जह बहुत जरुरी है कि शेष प्रतिबंधों को तेजी से उठाया जाए।

उल्लेखनीय है कि बीते एक महीने में केंद्र शासित प्रदेश के दौरे पर आए विदेश राजनयिकों का यह दूसरा जत्था है। इससे पहले सरकार 15 विदेशी राजनयिकों का एक दल जम्मू कश्मीर के दौरे पर ले गई थी जिसका लक्ष्य उन्हें यह दिखाना था कि कश्मीर घाटी में हालात सामान्य करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अनेक विपक्षी दलों ने इसे ‘‘गाइडेड टूर’’ बताया। (एजेंसी इनपुट)

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