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‘यूपीए सरकार में राहुल गांधी नीतियों का निर्माण करने वाली फैक्टरी के सुपरवाइजर थे’

मंत्रालय के कामकाज में राहुल गांधी के कार्यालय की ओर से हस्तक्षेप करने के पूर्व पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन के आरोपों के परिप्रेक्ष्य में नरेंद्र मोदी सरकार ने शुक्रवार को संकेत दिया कि वह यूपीए शासन के दौरान पर्यावरण मंत्रालय की ओर से मंजूर और नामंजूर की गई परियोजनाओं की समीक्षा करेगी। वित्त मंत्री अरुण […]

Author Updated: January 31, 2015 8:47 AM

मंत्रालय के कामकाज में राहुल गांधी के कार्यालय की ओर से हस्तक्षेप करने के पूर्व पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन के आरोपों के परिप्रेक्ष्य में नरेंद्र मोदी सरकार ने शुक्रवार को संकेत दिया कि वह यूपीए शासन के दौरान पर्यावरण मंत्रालय की ओर से मंजूर और नामंजूर की गई परियोजनाओं की समीक्षा करेगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नटराजन के बयानों के बाद यूपीए शासन के दौरान मंजूर या खारिज की गई पर्यावरणीय परियोजनाओं की समीक्षा की मांग उठाई।

वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी को नटराजन का पत्र पुख्ता तौर पर साबित करता है कि कांग्रेस के लिए वैधानिक या जरूरी मंजूरियां नहीं बल्कि नेताओं की मर्जी ही अहम थी। जेटली ने कहा- मुझे उम्मीद है कि अब पर्यावरण मंत्रालय (उस समय) मंजूर और नामंजूर की गई उन सभी अनुमतियों की समीक्षा करेगा और सुनिश्चित करेगा कि केवल कानून के मुताबिक ही इनका निपटारा हो और किसी अन्य बात पर नहीं। वित्त मंत्री नटराजन की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे गए पत्र पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें आरोप लगाया गया है कि पर्यावरणीय मंजूरियों पर राहुल गांधी की ओर से खास तौर पर अनुरोध किया गया था और इसके नतीजे में बड़ी परियोजनाएं ठुकरा दी गईं।

जेटली ने कहा कि यूपीए शासन के दौरान विकास दर तेजी से घटी और इसकी मुख्य वजह परियोजनाओं की मंजूरी में विलंब था। उन्होंने कहा कि नटराजन का पत्र पुख्ता तौर पर साबित करता है कि उनके लिए सबसे अहम चीज थी नेताओं की मर्जी। यानी किसे पर्यावरणीय मंजूरी दी जाए और किसे नहीं दी जाए। ऐसी स्थिति में जहां मर्जी कानूनी प्रावधानों पर भारी पड़ जाती है तो यह सांठगांठ वाले पूंजीवाद (क्रोनी कैपिटलिज्म) का मामला बन जाता है जैसा कि यूपीए शासन में हो रहा था।

यूपीए पर और प्रहार करते हुए जेटली ने कहा कि यह एक परपीड़क अर्थव्यवस्था का कारोबार था जो प्रतिशोध में कुछ लोगों को सबक सिखाना चाहता था जबकि कुछ अन्य का समर्थन करना चाहता था।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जयंती के आरापों को बेदह गंभीर बताते हुए कहा कि वे उन फाइलों की समीक्षा करेंगे जिसके बारे में बाहरी दबाव का जिक्र किया गया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण मंत्री के तौर पर यह उनका कर्तव्य है कि वे उन खास फाइलों की समीक्षा करें जहां पत्र के अनुसार कथित तौर पर बाहरी दबाव डाला गया था। जावड़ेकर ने कहा- मैं निश्चित तौर पर उन फाइलों की समीक्षा करूंगा और देखूंगा कि क्या तथ्य हैं।

वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी मांग की कि यूपीए शासन के दौरान पर्यावरण मंत्रालय द्वारा दी गई मंजूरियों की समीक्षा होनी जरूरी है। उन्होंने कहा कि उचित यही होगा कि यूपीए शासन के दौरान पर्यावरण मंत्रालय द्वारा दी गई ग्रीन मंजूरियों की समीक्षा की जाए।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि इससे साबित हो गया है कि यूपीए सरकार में नीतिगत पक्षाघात का निर्माण करने वाली फैक्टरी के सुपरवाइजर खुद राहुल गांधी थे।

 

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