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आलाकमान के कहने पर संभाली कमान

1998 में दिल्ली कांग्रेस की अगुआई करते हुए शीला दीक्षित ने भाजपा के हाथों से दिल्ली की सत्ता छीनकर यहां कांग्रेस की हुकूमत कायम की और 15 साल तक मुख्यमंत्री के तौर पर सरकार चलाती रहीं।

Author Published on: July 21, 2019 6:04 AM
शीला दीक्षित का 81 साल की उम्र में निधन हो गया।

अजय पांडेय

अस्सी साल की उम्र में दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष बनाई गर्इं शीला दीक्षित ने हाशिए पर पहुंच चुकी पार्टी को लोकसभा चुनाव में खड़ा करने की पूरी कोशिश की थी। लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से किसी चुनावी गठबंधन की पुरजोर मुखालफत करने वाली दीक्षित जब दिल्ली की सातों सीटों के लिए उम्मीदवारों के चयन की चर्चा के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ होने वाली बैठक में शिरकत करने पहुंचीं तब तक उनका खुद चुनाव मैदान में उतरने का कोई इरादा नहीं था। लेकिन आलाकमान का आदेश मानकर यह चुनौती भी स्वीकारी।

1998 में दिल्ली कांग्रेस की अगुआई करते हुए शीला दीक्षित ने भाजपा के हाथों से दिल्ली की सत्ता छीनकर यहां कांग्रेस की हुकूमत कायम की और 15 साल तक मुख्यमंत्री के तौर पर सरकार चलाती रहीं। कांग्रेस उनकी ही अगुआई में 2013 के चुनाव में विधानसभा का चुनाव हारी। ऐसा भी मौका आया जब 2015 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की सीटों का आंकड़ा शून्य तक पहुंच गया और उसे महज आठ-नौ फीसद के आसपास वोट मिले।

उसके बाद अजय माकन की अगुआई में कांग्रेस ने वापसी शुरू की और उसका वोट फीसद करीब 22-24 फीसद तक पहुंचा लेकिन 2017 में हुए दिल्ली नगर निगम के चुनाव में भी वह तीसरे नंबर की पार्टी ही बनी रही। दीक्षित की अगुआई में लोकसभा का चुनाव लड़ने उतरी कांग्रेस ने सात में से पांच सीटों पर दूसरे स्थान पर जगह बनाकर 23 फीसद वोट हासिल किए। दीक्षित की अगुआई में कांग्रेस लोकसभा के चुनाव में एकजुट नजर आई। चाहे खुद दीक्षित हों या पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल, अरिवंदर सिंह लवली, अजय माकन, महाबल मिश्रा सभी नेताओं ने दीक्षित के नेतृत्व में दिल्ली के लोगों को यह संदेश देने का काम किया कि कांग्रेस वापसी की तैयारी में है।

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