ताज़ा खबर
 

GST विधेयक को मंत्रिमंडल की हरी झंडी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने वाले वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर बुधवार को अपनी सहमति की मुहर लगा दी। इससे विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में ही पेश करने का रास्ता साफ हो गया। सूत्रों ने कहा कि मंत्रिमंडल ने विधेयक को […]

Author Updated: December 18, 2014 11:26 AM

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने वाले वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर बुधवार को अपनी सहमति की मुहर लगा दी। इससे विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में ही पेश करने का रास्ता साफ हो गया। सूत्रों ने कहा कि मंत्रिमंडल ने विधेयक को बुधवार देर शाम मंजूरी दी और इसे संसद के मौजूदा सत्र में पेश किया जा सकता है। शीतकालीन सत्र 23 दिसंबर को खत्म हो रहा है। सरकार का एक अप्रैल 2016 से जीएसटी लागू करने का लक्ष्य है। वहीं मंत्रिमंडल ने रीयल एस्टेट नियामक विधेयक पर फैसला टाल दिया है।

पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने समेत अन्य जटिल मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच इस सप्ताह बनी सहमति के बाद संशोधित संविधान संशोधन विधेयक को मंत्रिमंडल के समक्ष लाया गया। पेट्रोलियम उत्पादों पर कर को लेकर प्रस्तावित जीएसटी करीब सात साल से अटका हुआ था। जीएसटी केंद्रीय स्तर पर उत्पाद शुल्क और सेवा कर तथा राज्यों में लगने वाले वैट (मूल्य वर्द्धित कर) व स्थानीय करों का स्थान लेगा।
इससे पहले, जीएसटी विधेयक को 2011 में लोकसभा में पेश किया गया था। लेकिन लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही विधेयक निरस्त हो गया। इससे नई सरकार को नया विधेयक लाना पड़ा है। इस सप्ताह के शुरू में इसे लेकर केंद्र और राज्यों में सहमति बनी थी। इसके तहत केंद्र ने जहां पेट्रोलियम को जीएसटी से बाहर रखने का फैसला किया वहीं राज्य इसके बदले प्रवेश शुल्क को नई कर व्यवस्था के दायरे में लाने पर सहमत हुए।

पिछले सप्ताह तीन दौर की बातचीत में राज्यों ने इस बात पर जोर दिया था कि मुआवजे वाले हिस्से को संविधान संशोधन विधेयक में शामिल किया जाए। सबसे पहले 2006-07 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जीएसटी का विचार आगे बढ़ाया था। शुरू में इसे एक अप्रैल 2010 को लागू किए जाने का प्रस्ताव था।

इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रीयल एस्टेट क्षेत्र के लिए नियामक गठित करने के बारे में फैसला बुधवार को टाल दिया। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल ने रीयल एस्टेट विकास और नियमन विधेयक पर चर्चा की लेकिन इस पर फैसला टाल दिया। विधेयक को पिछले साल अगस्त में राज्यसभा में पेश किया गया था। इसमें गलत काम करने वाले डेवलपरों से मकान खरीदने वालों के हितों के रक्षा की व्यवस्था की गई है। बाद में इसे संसद की स्थायी समिति को भेज दिया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट फरवरी में दी। विधेयक में सभी परियोजनाओं का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने के साथ प्रवर्तकों, ‘ले आउट प्लान’, जमीन की स्थिति, क्रियान्वयन समय सीमा, विभिन्न प्रकार की मंजूरी की स्थिति और कारपेट एरिया के बारे में पूरी सूचना सार्वजनिक करने की बात कही गई है।

 

 

Next Stories
1 मानव अंतरिक्ष अभियान की ओर बढ़े भारत के कदम, ISRO ने लॉन्च किया GSLV-मार्क3
2 हिन्दू थे भारत के मुसलमान और ईसाई : तोगड़िया
3 मोदी सरकार बताए, लोगों के ‘अच्छे दिन’ कब आएंगे: राहुल गांधी
ये पढ़ा क्या?
X