पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहली बार जीत हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 पर नजरें गड़ाए हुए है। राष्ट्रीय स्तर पर अपना विस्तार करने की रणनीति के तहत पार्टी पंजाब में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में गुरुवार को भाजपा ने केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब इकाई का पहला सिख अध्यक्ष नियुक्त किया। वहीं शुक्रवार को आए शहरी निकाय चुनावों के नतीजों ने पार्टी के मनोबल को और बढ़ा दिया।
पंजाब के आठ नगर निगमों, 75 नगर परिषदों और 20 नगर पंचायतों के कुल 1,977 वार्डों में हुए चुनावों में भाजपा ने इस बार उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। 2021 के चुनाव में जहां पार्टी केवल 49 वार्ड जीत सकी थी, वहीं इस बार जीत का आंकड़ा 170 से अधिक वार्डों तक पहुंच गया। हालांकि कुल वार्ड जीतने के मामले में भाजपा पांचवें स्थान पर रही और आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (SAD) तथा निर्दलीय उम्मीदवार उससे आगे रहे, लेकिन चुनाव परिणामों ने पंजाब के शहरी और सेमी अर्बन क्षेत्रों में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का संकेत दिया है।
अबोहर में भाजपा का दबदबा
भाजपा की सबसे बड़ी सफलता अबोहर नगर निगम में देखने को मिली, जहां पार्टी ने 50 में से 28 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया। वहीं, आम जनता पार्टी को 20 सीटों पर संतोष करना पड़ा। अबोहर भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है क्योंकि यह पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ का गृह क्षेत्र है। उनके भतीजे संदीप जाखड़ यहां के विधायक हैं। 2021 के निकाय चुनावों में कांग्रेस ने यहां 49 वार्ड जीतकर लगभग क्लीन स्वीप किया था।
मतगणना में गड़बड़ी के आरोप
भाजपा नेताओं ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल भी उठाए हैं। पार्टी प्रवक्ता प्रीतपाल सिंह बलियावाल ने दावा किया कि शुरुआती रुझानों में भाजपा 200 से अधिक वार्ड जीतती दिख रही थी, लेकिन राज्य चुनाव आयोग (SEC) की वेबसाइट कथित रूप से क्रैश होने के बाद आंकड़े अचानक घट गए। उन्होंने कहा, “हम निराश नहीं हैं। हमें ऐसे कदमों की उम्मीद थी। 2027 की तैयारी शुरू हो चुकी है और हम उसी दिशा में काम करेंगे।”
गौरतलब है कि इस बार भाजपा का प्रदर्शन सिर्फ पारंपरिक हिंदू बहुल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रहा। मोहाली, होशियारपुर, फतेहगढ़ साहिब, मानसा, पटियाला और फाजिल्का जैसे जिलों की नगर परिषदों और नगर पंचायतों में भी पार्टी ने अच्छी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा, किसान आंदोलनों के प्रभाव वाले क्षेत्र माने जाने वाले बठिंडा नगर निगम में भी भाजपा ने अपना खाता खोला। मानसा जिला किसान आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा था, जहां भाजपा को लंबे समय तक विरोध का सामना करना पड़ा। ऐसे में वहां नगर परिषद की छह सीटें जीतना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता गुरलाभ सिंह महल के अनुसार, “लोग विकास कार्यों की कमी और स्थानीय मुद्दों पर आप की कार्यशैली से नाराज थे। इन नतीजों को सभी राजनीतिक दलों के लिए संदेश के रूप में देखा जाना चाहिए।”
मुस्लिम बहुल मालेरकोटला में जीत अहम
भाजपा की सबसे प्रतीकात्मक जीतों में से एक मालेरकोटला नगर परिषद में मिली, जहां पार्टी ने आप उम्मीदवार को 265 वोटों से हराकर एक वार्ड जीता। मुस्लिम बहुल मालेरकोटला में यह जीत भाजपा को अल्पसंख्यक समुदायों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के दावे को मजबूती देने का अवसर दे सकती है। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के गृह जिले बरनाला में भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। यहां नगर निगम की 50 सीटों में से भाजपा केवल सात सीटें जीत सकी, जबकि आप ने 36 सीटों पर कब्जा किया।
ढिल्लों ने आरोप लगाया कि आप ने चुनाव जीतने के लिए अनुचित तरीकों का इस्तेमाल किया। हालांकि पठानकोट में जो भाजपा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी शर्मा का क्षेत्र माना जाता है, पार्टी ने 50 में से 18 सीटें जीतकर अच्छा प्रदर्शन किया। यहां अकाली दल को 12 और AAP को केवल चार सीटें मिलीं।
2027 से पहले चुनौतियां बरकरार
निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद भाजपा के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। पार्टी अभी भी कई क्षेत्रों में मुख्य रूप से शहरी हिंदू मतदाताओं पर निर्भर है और ग्रामीण सिख बहुल इलाकों में उसकी संगठनात्मक पकड़ सीमित है। अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अकाली दल और निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रभाव बना हुआ है, जबकि आप को सत्ता में होने का फायदा भी प्राप्त है।
किसान आंदोलन की छाया भी अब पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि भाजपा नेताओं का मानना है कि पिछले पांच वर्षों में पार्टी के प्रति विरोध काफी कम हुआ है। एक भाजपा नेता ने कहा, “2021 में किसान आंदोलन के कारण हमारे कई उम्मीदवार प्रचार तक नहीं कर पाए थे। इस बार हमने गांवों और कस्बों में खुलकर प्रचार किया। पांच साल में यह सबसे बड़ा बदलाव है।”
भाजपा अब इन नतीजों को 2027 विधानसभा चुनावों के लिए आधार मानते हुए पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
