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लाल किले के बाद ये 650 साल पुरानी छुपी धरोहर भी हुई डालमिया के हवाले

लाल किले और गांदीकोटा किले को एडॉप्ट करने के लिए जो कॉन्ट्रैक्ट साइन किए गए हैं, उनमें काफी समानताएं हैं। सबसे पहली समानता तो यह है कि दोनों ही किले पांच सालों के लिए एडॉप्ट किए गए हैं। हालांकि बाद में सरकार चाहे तो इस समय को बढ़ा भी सकती है।

लाल किले को एडोप्ट करने वाले डालमिया ग्रुप के हवाले गांदीकोटा किला (फोटो सोर्स- फेसबुक/Sandip Ahire)

लाल किले को 5 साल के लिए 25 करोड़ में एडॉप्ट करने वाले डालमिया भारत लिमिटेड ग्रुप ने आंध्र प्रदेश के मशहूर गांदीकोटा किले को भी एडॉप्ट किया है। डालमिया ग्रुप ने मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म के ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज: अपनी धरोहर, अपनी पहचान’ स्कीम के तहत 650 साल पुराने गांदीकोटा किले को एडॉप्ट किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 14वीं सदी में बना गांदीकोटा किला कडपा जिले स्थित डालमिया भारत ग्रुप की सीमेंट फैक्ट्री के काफी करीब है।

ग्रुप के कार्यकारी निदेशक संदीप कुमार के मुताबिक, ‘गांदीकोटा जहां है वह स्थान थोड़ा दूर है। वह एक जीवित स्मारक है। हम वहां रहने वाले किसी भी व्यक्ति को बाहर नहीं करना चाहते, बल्कि हम चाहते हैं कि वे सभी स्मारक के रखरखाव में अपना योगदान दें। हमारा सबसे पहला काम स्मारक की सफाई करना है, क्योंकि स्मारक के कुछ हिस्सों को खुले शौचालय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। कोई भी व्यक्ति किले में घूमते वक्त अमोनिया की बदबू नहीं चाहेगा।’ कंपनी ने स्पष्ट किया है कि लाल किले की तरह ही वह गांदीकोटा में भी आम नागरिक से सुविधा शुल्क नहीं वसूल करेगी।

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आपको बता दें कि लाल किले और गांदीकोटा किले को एडॉप्ट करने के लिए जो कॉन्ट्रैक्ट साइन किए गए हैं, उनमें काफी समानताएं हैं। सबसे पहली समानता तो यह है कि दोनों ही किले पांच सालों के लिए एडॉप्ट किए गए हैं। हालांकि बाद में सरकार चाहे तो इस समय को बढ़ा भी सकती है। दूसरी समानता यह है कि लाल किले की तरह ही गांदीकोटा में भी डालमिया ग्रुप पर्यटकों को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराएगा। इन सुविधाओं में पीने का पानी, टॉयलेट की व्यवस्था, बैठने के लिए कुर्सियां मुहैया कराई जाएंगी। इसके अलावा साफ सफाई का भी ध्यान रखा जाएगा।

पर्यटन मंत्रालय का कहना है कि ‘मॉन्यूमेंट मित्रा’ प्रोजेक्ट के तहत 95 स्मारकों और पर्यटन स्थलों को एडॉप्ट करने के लिए 31 एजेंसियों को मंजूरी दी जा चुकी है। मंत्रालय ने बताया, ‘अभी तक इस प्रोजेक्ट के तहत चार एमओयू साइन किए जा चुके हैं। एक एमओयू लाल किले के लिए, एक गांदीकोटा किले के लिए, एक जम्मू कश्मीर के लद्दाख के माउंट स्टोक कांगरी और उत्तराखंड स्थित गौमुख के लिए साइन किया जा चुका है।’

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