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डरे हैं जम्मू के आम शहरी, व्यापार में भी गिरावट- फैक्‍ट फाइंडिंग कमिटी की रिपोर्ट से उठे सरकारी दावे पर सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीर घाटी में जारी नाकेबंदी से जम्मू के वाणिज्य और व्यापार उद्योग काफी प्रभावित हुए हैं। फैक्ट्स फाइंडिंग टीम के साथ बातचीत में व्यवसायियों ने बताया कि केंद्र सरकार के ताजा फैसले से लोगों के बीच दूरियां बढ़ गई हैं।

फैक्ट्स फाइंडिंग कमिटी की रिपोर्ट ने जम्मू के बारे में केंद्र सरकार के दावे को झुठला दिया है। (फोटो सोर्स: पीटीआई)

5 अगस्त जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सरकार की तरफ से दावा किया गया कि राज्य के दूसरे सबसे बड़े शहर जम्मू में जनता फैसले से खुश है और बड़े पैमाने पर इसका उत्सव मना रही है। हालांकि, जम्मू के दौरे पर पहुंची फैक्ट्स फाइंडिंग कमिटी ने जमीन पर सरकार के दावे को बिल्कुल विपरीत पाया है। कमिटि की रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर के सभी वर्गों में एक भय का वातावरण कायम है। फैक्ट्स फाइंडिंग टीम की रिपोर्ट का जिक्र ‘द वायर’ और ‘काउंटरव्यू डॉट नेट’ नाम की वेबसाइट में किया गया है। वेबसाइट के मुताबिक मनोचिकित्सक अनिरुद्ध काला, एकैडमिक ब्रिनेल डीसूजा, पत्रकार रेवती लुल और मानवाधिकार कार्यकर्ता शबनम हाशमी बतौर जांच दल का हिस्सा होने के नाते 6 से 7 अक्टूबर तक जम्मू में रहे।

‘कश्मीर सिविल डिसोबीडीअन्स: ट्रॉमा, रेजिस्टेंस, रिजिलियंस टू मंथ्स ऑन’ नाम के शीर्षक वाली रिपोर्ट में फैक्ट्स फाइंडिंग टीम ने कहा है कि शहर में व्यापार का बुरा हाल है, टूरिस्ट पूरी तरह से नदारद हैं और छात्र तथा शिक्षक डरे हुए हैं। टीम का कहना है कि जब लोगों से संपर्क किया गया और उन्हें मिटिंग के लिए बुलाया गया तो उनमें से आधे डर गए और मिलना तो दूर फोन पर भी बात करने से इनकार कर दिया। यहां शाम ढलने के बाद हालात में बिल्कुल बदलाव आ जाता है। जगह-जगह नाकेबंदी की जाती है और वाहनों की एक-एक करके चेकिंग की जाती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीर घाटी में जारी नाकेबंदी से जम्मू के वाणिज्य और व्यापार उद्योग काफी प्रभावित हुए हैं। फैक्ट्स फाइंडिंग टीम के साथ बातचीत में व्यवसायियों ने बताया कि केंद्र सरकार के ताजा फैसले से लोगों के बीच दूरियां बढ़ गई हैं। रिपोर्ट में एक बिजनसमैन ने बताया, “व्यापार चौपट हो रहा है, काम नहीं हो रहे हैं। बैंक भी काम नहीं कर रहे। जम्मू का 60 फीसदी व्यापार कश्मीर के साथ होता है, लिहाजा इससे भी प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर घाटी की तरह जम्मू में सामान्य सेवाएं बहाल थीं। यहां फोन, संचार के अन्य साधन, दुकानें, रेस्टोरेंट और बाजार खुले हुए थे। लेकिन इंटरनेट की स्पीड बेहद धीमी थी। इस दौरान पाया गया कि जम्मू में टूरिस्टों के नहीं पहुंचने से होटल व्यवसायियों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा है।

ट्रांसपोर्ट और ट्रेडिंग से जुड़े लोगों की हालत तो और फजीहत भरी रही। रिपोर्ट के मुताबिक इस व्यवसाय से जुड़े लोगों ने बताया कि जम्मू में 35,000 करोड़ रुपये के व्यापार में ठहराव आ गया। पहले रेलवे स्टेशन पर 500 ट्रक चार चक्कर लगाते थे। लेकिन अब दिन भर में एक ही ट्रिप पूरी करते हैं। वहीं, दूसरे व्यवसायी का कहना था कि आमतौर पर दशहरे के दौरान थोक बाजार और मंडी में इतनी भीड़ होती है कि पैर रखने को जगह नहीं होती। लेकिन, अब सब उजाड़ है।

टीम ने बताया है कि सेब का व्यापार भी काफी प्रभावित हुआ है। पिछले साल सेब के सीजने में 7,000 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। एक व्यापारी ने बताया, “इस दफे सरकार कह रही है कि वह श्रीनगर से 8,600 करोड़ रुपये के फल खरीदेगी। लेकिन, यह फल मंडी को कैसे मिलेगा? जबकि, बागान मालिकों ने डर के माहौल में अपने पेड़ फल ही नही तोड़े हैं।” इसके अलावा जम्मू के कपड़ा व्यवसायियों ने भी व्यापार ठप होने की शिकायत की है।

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