रिटायरमेंट के 7 महीने बाद तक SC के पूर्व जज अरुण मिश्रा ने खाली नहीं किया सरकारी बंगला; कभी नरेंद्र मोदी को बताया था- ‘ग्लोबल सोचने’ वाला

जस्टिस मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि आवास में रहने की अनुमति को 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया जाए। हालांकि इस पर उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। जस्टिस मिश्रा पत्नी के स्वस्थ होते ही बंगला खाली करने के इच्छुक हैं।

Supreme court, Judges Bunglowसुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अरुण मिश्रा। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अरुण मिश्रा को सेवानिवृत्त हुए सात महीने हो गए हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने अपना सरकारी बंगला खाली नहीं किया। उनको 10 सितंबर 2014 को 13, अकबर रोड, नई दिल्ली का बंगला सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में प्रदान किया गया था। न्यायमूर्ति मिश्रा 2 सितंबर 2020 को सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन अब भी उसी बंगले में रह रहे है।

हालांकि बताया जा रहा है कि जस्टिस मिश्रा के रिटायर होने के एक के बाद एक उनके सगे-संबंधियों में कई लोगों का निधन हो गया। इससे वे काफी समय तक घर से बाहर रहे। जब वे थोड़े फ्री हुए तो उनकी पत्नी और सास कोविड-19 से ग्रस्त हो गईं।
उनके अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 31 मार्च तक वहां रहने की अनुमति प्रदान कर दी। मार्च के अंतिम हफ्ते में उनकी पत्नी कोरोना वायरस से ग्रस्त हो गईं, और अब भी उनका इलाज चल रहा है।

बताया जा रहा है कि जस्टिस मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि आवास में रहने की अनुमति को 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया जाए। हालांकि इस पर सुप्रीम कोर्ट से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। जस्टिस मिश्रा पत्नी के स्वस्थ होते ही बंगला खाली करने के इच्छुक हैं।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियम, 1959 का नियम 4ए (1) कहता है, “जहां एक न्यायाधीश नियम 4 में निर्दिष्ट अवधि से परे एक निवास पर कब्जा रखता है, वह अधिक रहने की अवधि के लिए भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा, मौलिक नियम 45-बी के प्रावधानों के अनुसार एक साथ पूर्ण विभागीय शुल्क के साथ गणना की जाएगी या यदि किराए को पूल कर दिया गया है, मौलिक नियम 45-ए के तहत जमा किया गया मानक किराया, जो भी अधिक हो।”

सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के सीनियर फेलो, लेखक और पत्रकार सुशांत सिंह के मुताबिक, “जस्टिस मिश्रा वही व्यक्ति हैं जिन्होंने एक कार्यरत न्यायाधीश के रूप में एक सार्वजनिक समारोह में पीएम मोदी की उपस्थिति में उनके बारे में कहा था कि हम बहुमुखी प्रतिभा का शुक्रिया अदा करते हैं, जो विश्व स्तर पर सोचते हैं और स्थानीय रूप में कार्य करते हैं।”

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