ADR Report on Political Parties Candidates: विधानसभा चुनावों में आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के पीछे के कारणों को सार्वजनिक करने में राजनीतिक दल पूरी तरह नाकाम रहे हैं। चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाली संस्था ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) की ताजा रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा हुआ है।
ADR की ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, कई दलों ने या तो दागी उम्मीदवारों को चुनने की वजहें नहीं बताईं या फिर सिर्फ ‘कॉपी-पेस्ट’ करके औपचारिकता निभाई।
191 उम्मीदवारों के बारे में नहीं दी कोई जानकारी
ADR ने 51 राजनीतिक दलों द्वारा निर्वाचन आयोग में दाखिल दस्तावेजों का बारीकी से विश्लेषण किया है। यह रिपोर्ट असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों पर आधारित है।
विश्लेषण किए गए 1,405 दागी उम्मीदवारों में से 191 के मामले में अनिवार्य ‘फॉर्म सी-7’ (उम्मीदवार चुनने का कारण बताने वाला दस्तावेज) उपलब्ध ही नहीं कराया गया।
कॉपी-पेस्ट जवाब और एक जैसी शब्दावली
रिपोर्ट में बताया गया कि जिन मामलों में राजनीतिक दलों ने कारण बताए भी, वे बेहद सामान्य और दोहराव से भरे थे। एडीआर के अनुसार, “दलों ने अधिकांश उम्मीदवारों के लिए एक ही तरह की भाषा का इस्तेमाल किया। कारणों में आमतौर पर उम्मीदवार की ‘लोकप्रियता’, ‘सामाजिक कार्य’, ‘क्षेत्र में पकड़’ और ‘जीतने की क्षमता’ जैसी बातें लिखी गईं। किसी भी दल ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने किसी साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति को टिकट क्यों नहीं दिया।”
किस राज्य में कितने दागी उम्मीदवार?
विभिन्न राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वो कुछ इस तरह रही…
- तमिलनाडु: विश्लेषण किए गए 1,162 उम्मीदवारों में से 473 पर आपराधिक मामले थे, जिनमें से 72 के कारण सार्वजनिक नहीं किए गए।
- पश्चिम बंगाल: 1,516 में से 559 उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले थे, जबकि 55 के मामले में जरूरी जानकारी नहीं दी गई।
- केरल: 431 में से 268 उम्मीदवार दागी थे और 27 की जानकारी गायब मिली।
- असम: 318 में से 66 पर आपराधिक मामले थे और 10 के कारण सार्वजनिक नहीं किए गए।
- पुडुचेरी: 112 में से 39 उम्मीदवार दागी थे, लेकिन सिर्फ 12 के ही चयन के कारण उजागर किए गए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां
उच्चतम न्यायालय ने साल 2020 में एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन के 72 घंटे के भीतर उनके चयन के कारण अखबारों, सोशल मीडिया और पार्टी वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएं।
कोर्ट ने साफ कहा था कि चयन का आधार केवल उम्मीदवार की ‘जीतने की संभावना’ नहीं हो सकता, बल्कि उसकी योग्यता और उपलब्धियां होनी चाहिए। हालांकि, एडीआर की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि राजनीतिक दल अदालत के इन आदेशों का पालन केवल कागजों पर कर रहे हैं और मतदाताओं को सही निर्णय लेने के लिए जरूरी पारदर्शी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
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