प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक व्यवधानों को देखते हुए दूसरे दिन फिर खर्च में कटौती की अपील दोहराई और कोविड-काल की आदतें अपनाने को कहा। वडोदरा में सोमवार को देर रात एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों से ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन एवं इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने और सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की। इससे पहले गिर सोमनाथ में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव के दौरान उन्होंने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण की याद दिलाते हुए कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती या दबाव में नहीं ला सकती है।

पीएम मोदी ने एक दिन पहले तेलंगाना में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खर्चों में कटौती की अपील की थी। सोमवार को वडोदरा में पटेल समुदाय द्वारा निर्मित ‘सरदार धाम हास्टल’ का उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा कि जहां तक संभव हो वहां घर से काम करने की कोविड-कालीन व्यवस्था को अपनाएं और विदेश यात्रा को भी सीमित करें। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘पश्चिम एशिया का संकट इस दशक में सबसे गंभीर संकटों में से एक है। हमने जिस तरह कोविड-19 महामारी से पार पाया था, वैसे ही हम इससे भी बाहर निकल आएंगे।’ मोदी ने यह भी कहा कि देश ने जब भी युद्ध या बड़े संकट का सामना किया, तब नागरिकों ने हमेशा अपनी जिम्मेदारी निभाई।

विदेशी मुद्रा के अनावश्यक खर्च से बचना जरूरी

उन्होंने बताया कि भारत तेल और एलपीजी के लिए पश्चिम एशिया पर काफी निर्भर है, इसलिए आयात कम करना और विदेशी मुद्रा के अनावश्यक खर्च से बचना जरूरी है। मोदी ने कहा, ‘हमें आयातित उत्पादों के उपयोग को कम करने और उन व्यक्तिगत गतिविधियों से बचने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए जिनमें विदेशी मुद्रा खर्च होती है।’ उन्होंने लोगों से ईंधन की खपत कम करने और सार्वजनिक परिवहन या इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने का अनुरोध किया। प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक स्थिति को देखते हुए नागरिकों से सोने की खरीद को टालने की अपील की, क्योंकि सोने के आयात पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है।

वडोदरा के कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती या दबाव में नहीं ला सकती है। भगवान शिव के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव में एक सभा में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दुर्भाग्य से देश में ऐसी शक्तियां आज भी प्रभावी हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्वाभिमान से ज्यादा तुष्टीकरण जरूरी लगता है और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के विरोध के दौरान भी इसी तरह की सोच दिखाई दी थी।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अगर 1947 में भारत आजाद हुआ था… तो, 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था।’ मोदी ने कहा कि सोमनाथ का अमृत महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं है, यह अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का महोत्सव भी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 मई केवल सोमनाथ मंदिर के नए स्वरूप में प्राण प्रतिष्ठा के लिए ही नहीं, बल्कि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 1998 में आज के ही दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने परमाणु परीक्षण किए थे।

उन्होंने कहा, ’11 मई 1998, यानी आज के ही दिन, देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को, भारत की क्षमता को दुनिया के सामने रखा, दुनिया में तूफान आ गया।’ मोदी ने कहा, ‘कई देश इससे नाराज हो गए, वे पूछने लगे कि भारत कौन होता है, जो परमाणु परीक्षण करे। दुनिया की आंखें लाल हो गईं।’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘दुनिया भर की शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतरीं। अनेक प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए। संभावित आर्थिक संकट से बचने का हर रास्ता रोकने की कोशिश की गई।’

वैश्विक दबाव के आगे नहीं झुकने वाला भारत

मोदी ने कहा कि ऐसे हालात में कई देश हिल जाते, लेकिन भारत दृढ़ता से खड़ा रहा। उन्होंने कहा, ‘कोई भी हिल जाता। जब दुनिया भर की बड़ी-बड़ी शक्तियां इतना बड़ा आक्रमण कर दें, तो आगे के रास्ते दिखते नहीं है। लेकिन हम किसी और मिट्टी के बने हुए हैं।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 मई को वैज्ञानिकों ने अपना काम कर लिया था, लेकिन 13 मई को फिर दो और परमाणु परीक्षण किए गए, उससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है।

उन्होंने वैश्विक दबाव के आगे नहीं झुकने के लिए तत्कालीन वाजपेयी सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘उस समय पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन अटल जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने यह दिखाया था कि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है। दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती, दबाव में नहीं ला सकती।’ उन्होंने कहा कि सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि कोई भी राष्ट्र तभी लंबे समय तक मजबूत रह सकता है, जब वह अपनी जड़ों से जुड़ा रहे। मोदी ने इस अवसर पर एक विशेष डाक टिकट भी जारी किया। उन्होंने कहा, ‘लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने का प्रयास किया, वे सोमनाथ को एक भौतिक ढांचा मानकर उससे टकराते रहे। बार-बार इस मंदिर को तोड़ा गया, ये बार-बार बनता रहा… हर बार उठ खड़ा होता रहा।’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 20 तक 5 देशों की विदेश यात्रा पर होंगे। इसमें पहले केवल यूरोपीय देशों की यात्रा ही थी लेकिन संशोधित प्रोग्राम में यूएई को भी शामिल किया गया है। सबसे पहले पीएम मोदी यूएई ही जाएंगे। इन 5 देशों की यात्रा में पीएम मोदी और उनके डेलिगेशन का मुख्य मुद्दा ट्रेड और ऊर्जा सुरक्षा होगा। पूरी खबर पढ़ें…