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गलत हलफनामा देने के आरोपी का केस लड़ रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, सरकारी अफसर होकर भी कोर्ट में कर रहे सरकार का विरोध

केस की सुनवाई को सोमवार तक के लिए टाल दिया है। सोमवार को फैसला किया जाएगा कि इस शिकायत को रद्द किया जाए या नहीं

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के एक सीनियर लॉ ऑफिसर गलत हलफनामा देने के आरोपी का केस लड़ रहे हैं। इस तरह एक सरकारी अफसर होते हुए भी वह सरकार का विरोध कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीएस पटवालिया एक सीनियर एडवोकेट के तौर पर केस लड़ रहे हैं। जमीन विवाद में नकली हलफनामा दाखिल करने के इस केस की सुनवाई हाईकोर्ट में जस्टिस संजीव सचदेवा कर रहे हैं। दरअसल यह मामला सेंट्रल दिल्ली के सुंदर नगर स्थित एक बंगले से जुड़ा है। बंगले की बिक्री को लेकर तीन दशक तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में मुकदमेबाजी चल रही थी। अंत में भूमि एवं विकास कार्यालय ने इसे बेचने की अनुमति से इंकार कर दिया। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) के इस फैसले का विरोध किया। हालांकि केंद्र सरकार के वकील ने इस फैसले का बचाव किया।

भूमि एवं विकास कार्यालय शहरी विकास मंत्रालय के अंतर्गत आती है। इस केस में, एजेंसी ने ना सिर्फ बिक्री को रद्द किया था, बल्कि सॉलिसिटर जनरल के प्राइवेट क्लाइंट के खिलाफ गलत हलफनामा दाखिल करने के आरोप में पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया कि शख्स ने बंगले को खरीदने की कोशिश करते हुए फेक एफिडेविट लगाया। पीएस पटवालिया ने कोर्ट में इसका विरोध करते हुए CrPC की धारा 151 के तहत इस क्रिमिनल कंपलेंट को गलत बताया। जस्टिस सचदेवा ने केस की सुनवाई को सोमवार तक के लिए टाल दिया है। सोमवार को फैसला किया जाएगा कि इस शिकायत को रद्द किया जाए या नहीं।

इस मुकदमे के दौरान बंगले के मालिकों में से एक कांता गुप्ता ने कानून मंत्रालय को एक आरटीआई भी लिखी और पूछा कि क्या एक एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को एक प्राइवेट क्लाइंट का केस लड़ने की इजाजत हैं? कांता गुप्ता के मुताबिक, मंत्रालय ने उन्हें केंद्रीय कानून मंत्री और सचिव को शिकायत लिखने का सुझाव देते हुए बताया “इस तरह का कोई निवेदन नहीं मिला है”।

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