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आदर्श घोटालाः इमारत गिराने का आदेश कांग्रेस के लिए बड़ा झटका, जानें क्या है पूरा मामला ?

शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को मुंबई की विवादित आदर्श हाउसिंग सोसायटी को ढहा दिए जाने के निर्देश दे दिए।

Author मुंबई | April 30, 2016 2:35 PM
कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को इस घोटाले में शामिल नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए हैं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के नेतृत्व में राज्य में दोबारा से उभरने की कोशिश कर रही कांग्रेस के लिए हाईकोर्ट द्वारा आदर्श हाउसिंग सोसायटी को ढहाए जाने का आदेश एक बड़ा झटका है। शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को मुंबई की विवादित आदर्श हाउसिंग सोसायटी को ढहा दिए जाने के निर्देश दे दिए। इस सोसाइटी में हुए घोटाले की वजह से चव्हाण को सीएम पद छोड़ना पड़ा था, लेकिन पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की वजह से वे दोबारा से प्रदेश पार्टी में सक्रिय भूमिका में आ गए। 2014 लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी ने अशोक चव्हाण को राज्य में दोबारा से पार्टी का नेतृत्व देने का फैसला किया।

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कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को इस घोटाले में शामिल नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए हैं। चव्हाण पर इस घोटाले में कानूनों का उल्लंघन करने और भाई-भतीजावाद का आरोप लगा था। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी एक सूत्र ने बताया कि अशोक चव्हाण का केस सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। वे हमेशा यही कहते हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है। पार्टी में पॉलिटिकल मैनेजर्स का कहना है कि व्यक्तिगत तौर पर किसी को दोषमुक्त मान सकते हैं, लेकिन पूरे मामला ही साफ-सुथरा नहीं हो सकता। इसमें घोटाले के खुलासे से नेताओं और अधिकारियों की सांठ-गांठ उजागर हुई थी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने साफ तौर पर कहा था कि आदर्श सोसाइटी में पर्यावरण संबंधित नियमों का उल्लंघन हुआ था।

31 मंजिला 102 फ्लैटों वाली इस इमारत के घोटाले में 23 बेनामी लेनदेन का खुलास हुआ था और 12 आईएएस अधिकारियों का नाम सामने आया था, जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया था। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे और अशोक चव्हाण पर भी आरोप लगे थे।

भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकार केंद्र से सलाह लेकर ही आदर्श सोसाइटी का भाग्य तय करेगी। एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि हमारे पास 12 सप्ताह का समय है। लेकिन हम लोग कोर्ट के आदेशों के मुताबिक ही काम करेंगे। आईएएस अधिकारियों के खिलाफ पहले से ही विभागीय जांच जारी है। राज्यपाल सीएच विद्यासागर राव ने पूर्व सीएम अशोक चव्हाण के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति सीबीआई को फरवरी 2016 में दे दी थी।

साल 2014 में कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने आंशिक रूप से आदर्श कमिशन रिपोर्ट को स्वीकार किया था, जिसमें भ्रष्टाचार और नेता-अधिकारियों की सांठ-गांठ की बात सामने आई थी। इन पर आरोप था कि इन्होंने अपने हितों के लिए कानूनों को तोड़ा-मोड़ा था। सरकार ने इस मामले को गंभीर लेने की बजाए सभी नेताओं को क्लिन चिट दे दी और 12 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच चलाने के आदेश जारी कर दिए। साल 2014 में तत्कालिन राज्यपाल शंकरनारायणन ने अशोक चव्हाण के खिलाफ मामला चलाने की अनुमति सीबीआई को नहीं दी थी।

इस मामले में चव्हाण का नाम सामने आने के बाद नवंबर 2010 को उन पर सीएम पद छोड़ना का दबाव डाला गया था। उनकी जगह पृथ्वीराज चव्हाण को सीएम बनाया गया था। अशोक चव्हाण पर कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगा था और साथ ही उसी सोसाइटी में उनकी सास भगवती शर्मा, उनके ससुर के भाई मदनलाल शर्मा और उनकी साली सीमा शर्मा को फ्लैट दिए जाने का आरोप लगाया गया था।

नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारीः-
आदर्श सोसाइटी में 12 अधिकारियों के खिलाफ जांच की जा रही है। इसमें सुभाष लल्ला(सीएम के पूर्व सेक्रेट्री), प्रदीप व्यास(पूर्व कलेक्टर, मुंबई), जयराज पाठक(बीएमसी के पूर्व कमिश्नर), रमानंद तिवारी(शहरी विकास के पूर्व प्रिंसिपल सेक्रेट्री), सीएस संगीतराव(सीएम के पूर्व सचिव), डीके संकरन(पूर्व मुख्य सचिव), आईए कुंदन(पूर्व कलेक्टर), थॉमस बंजामिन(पूर्व मुख्य सचिव, शहरी विकास), पीवी देशमुख(डिप्टी सेक्रेट्री शहरी विकास), सुरेश जोशी( MMRDA के पूर्व कमिश्नर), टी चंद्रशेखर( पूर्व MMRDA प्रमुख) और उमेश लुकटुके( पूर्व चीफ टाउन एंड कंट्री प्लानर)

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