अडानी ग्रुप ने लुधियाना के लाजिस्टिक्स पार्क को किया बंद, 7 माह से किसान कर रहे थे विरोध

किसानों के जत्थे इस साल जनवरी से किला रायपुर लाजिस्टिक्स पार्क के मुख्य द्वार पर पर बैठे थे। इस वजह से लाजिस्टिक्स पार्क में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया था।

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बीते शनिवार को किसान आंदोलन के 7 महीने पूरे होने पर किसानों ने पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में प्रदर्शन किए। (एक्सप्रेस फोटो: हरमीत सोढ़ी)

अडानी ग्रुप ने लुधियाना के लाजिस्टिक्स पार्क को बंद करने का फैसला लिया है। सात माह से चल रहे किसानों के धरने की वजह से किला रायपुर के इनलैंड कंटेनर डिपो (आइसीडी) का परिचालन बंद कर दिया गया है। किसान आंदोलन की वजह से 4 सौ लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा तो ग्रुप को करोड़ों रुपये की चपत लगी। कोर्ट भी समाधान नहीं निकाल सकी।

किसानों के जत्थे इस साल जनवरी से किला रायपुर लाजिस्टिक्स पार्क के मुख्य द्वार पर पर बैठे थे। इस वजह से लाजिस्टिक्स पार्क में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया था। धरने पर बैठे किसान लाजिस्टिक्स पार्क के कर्मचारियों को भी अंदर नहीं जाने दे रहे थे। किसानों को धरने से हटाने के संबंध में प्रबंधन की तरफ से पंजाब सरकार को कई शिकायतें की गईं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

कंपनी ने पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की। लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य सरकार के अधिकारी किसानों की नाकाबंदी हटाने में पूरी तरह से विफल रहे। अडानी ग्रुप ने थक हारकर इसे बंद करने का फैसला ले लिया। कंपनी का कहना है कि वो अब और ज्यादा नुकसान झेलने की स्थिति में नहीं है। उसे पहले ही काफी घाटा हुआ है।

ग्रुप ने पंजाब के औद्योगिक माल की आवाजाही को आसान करने के लिए किला रायपुर में अपने आइसीडी की शुरुआत 2017 में की थी। अडानी ग्रुप ने हाईकोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर कहा कि पिछले सात महीनों में कोई भी राहत नहीं मिलने से वह अब और नुकसान उठाने की स्थिति में नहीं है।

गौरतलब है कि तीनों कृषि कानूनों के विरोध में किसान लगातार दिल्ली के बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। पंजाब व हरियाणा के कई हिस्सों में भी वो लगातार आंदोलनरत हैं। इसी कड़ी में अडानी ग्रुप के लुधियाना स्थित लाजिस्टिक्स पार्क पर बीते सात माह से धरना चल रहा था, जिसकी परिणिती बंदी के रूप में हुई।

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