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जानें-सीखें : कॅप्चा से मानव या मशीन की होती है पहचान

कॅप्चा की फुल फॉर्म ‘कंप्लीटली आॅटोमेटेड पब्लिक टर्निंग टेस्ट टू टेल कंप्यूटर्स एंड ह्यूमंस अपार्ट’ होती है। कॅप्चा एक तंत्र है जो सुरक्षा का काम करता है। इसी मदद से कंप्यूटर प्रोग्राम यह पता करता है कि इनपुट देने वाला मानव है या मशीन। इसी मदद से वेबसाइट को वायरस के खतरे से सुरक्षा मिलती है। इसलिए जब भी हम किसी वेबसाइट पर अपनी लॉगिन आइडी बनाते हैं या पासवर्ड रिसेट करते हैं तो वेबसाइट का तंत्र हमसे कॅप्चा भरवाता है।

कई बार नई लॉगिन आइडी बनाते या पासवर्ड बदलते समय आपके सामने ‘कॅप्चा’ आता है। जहां दिए गए चित्र या वर्णों को नीचे दिए गए बॉक्स में भरना होता है या फिर दिए गए सवाल के मुताबिक चित्र को पहचानना होता है। दरअसल, कॅप्चा एक सत्यापन की प्रक्रिया है। इससे पता चलता है कि वेबसाइट का इस्तेमाल करने वाला मानव है या मशीन। क्योंकि कॅप्चा को मानव ही हल कर सकते हैं, मशीन या कंप्यूटर नहीं।

कॅप्चा की फुल फॉर्म ‘कंप्लीटली आॅटोमेटेड पब्लिक टर्निंग टेस्ट टू टेल कंप्यूटर्स एंड ह्यूमंस अपार्ट’ होती है। कॅप्चा एक तंत्र है जो सुरक्षा का काम करता है। इसी मदद से कंप्यूटर प्रोग्राम यह पता करता है कि इनपुट देने वाला मानव है या मशीन। इसी मदद से वेबसाइट को वायरस के खतरे से सुरक्षा मिलती है। इसलिए जब भी हम किसी वेबसाइट पर अपनी लॉगिन आइडी बनाते हैं या पासवर्ड रिसेट करते हैं तो वेबसाइट का तंत्र हमसे कॅप्चा भरवाता है।

कॅप्चा कई प्रकार के होते हैं। इनमें शब्द आधारित, चित्र आधारित, आवाज आधारित, गणित के सवालों पर आधारित, थ्रीडी आदि शामिल हैं। शब्द आधारित कॅप्चा में कुछ शब्दों दिए गए होते हैं। इन्हें पहचान कर दिए गए स्थान पर लिखना होता है। चित्र आधारित कॅप्चा में कुछ चित्र दिए गए होते हैं। इनमें से कुछ चित्रों को पहचान कर उनपर क्लिक करने के लिए कहा जाता है। एक बार में एक से अधिक कॅप्चा भी हल करने को मिल सकते हैं।

इसके आवाज आधारित कॅप्चा में आवाज सुनाई जाती है और उस पर आधारित कुछ सवाल दिए जाते हैं और उनको हल करना होगा। गणित के सवालों पर आधारित कॅप्चा में गणित के बहुत सरल सवालों को हल करने के लिए कहा जाता है। जैसे पांच जमा दो कितना होगा। थ्रीडी कॅप्चा के तहत थ्रीडी चित्र दिखाया जाता है। इस चित्र को पहचान कर नंबर या वर्ण दिए गए स्थान पर लिखने होते हैं।

कुल मिलाकर कॅप्चा के उपयोग से वेबसाइटों को साइबर हमले या हैकिंग से बचा सकते हैं। इसलिए आजकल सभी वेबसाइट इनका उपयोग करती हैं और सुरक्षित रहती हैं।

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