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अर्नब गोस्वामी को शट अप कहने वाली एक्ट्रेस ने लेख लिख कर बताई इसकी वजह…

मीता वशिष्ट ने लिखा है कि उनके सैन्य अधिकारी पिता ने भारत के लिए सभी तीन युद्ध लड़े हैं। वशिष्ट ने लिखा है, " मेरी मां जो सैन्य अधिकारी की पत्नी थीं, 1971 की लड़ाई के दौरान कहती थीं कि अगर डैडी वापस नहीं आते हैं तो समझना वो ईश्वर के पास चले गए हैं।

अभिनेत्री मीता वशिष्ट की फाइल फोटो (Photo- Express Archive)

अभिनेत्री मीता वशिष्ट ने एक पत्र लिखकर बताया है कि वो एक निजी टीवी चैनल पर पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ी बहस से बीच में क्यों अलग हो गईं। जब शुक्रवार (30 सितंबर) को निजी टीवी चैनल टाइम्स नाउ पर पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध लगाने पर हो रही बहस में एक्सपर्ट के तौर पर आईं वशिष्ट चैनल के एंकर अर्नब गोस्वामी को “ओह्ह शट अप” कहकर अलग हुईं तो उसके बाद सोशल मीडिया पर ये खबर वायरल हो गई। कुछ लोग वशिष्ट की तारीफ कर रहे थे तो कुछ लोग उनके खिलाफ भी लिख रहे थे। जब वशिष्ट चैनल की बहस से अलग हुईं तो उससे चंद सेकंड पहले एंकर ने उनसे कहा था कि कारगिल में शहीद जवान के पिता का सम्मान नहीं करने के लिए उन्हें तत्काल शो से हटाया जा रहा है। हालांकि वशिष्ट का कहना है कि वो एंकर की बात सुन नहीं पाई थीं, न ही उन्हें बताया गया था कि शो में कारगिल शहीद के पिता भी शामिल हैं। वशिष्ट ने एक निजी  वेबसाइट पर लेख लिखकर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा।

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वशिष्ट ने अपने लेख में कहा है कि उनके लिए पाकिस्तानी कलाकारों के प्रतिबंध लगाने पर बहस कोई मायने नहीं रखती। वशिष्ट ने लिखा है, “मुझे फ़वाद ख़ान या पाकिस्तानी कलाकारों में कोई रुचि नहीं है। उनके बॉलीवुड में होना या न होना मेरे लिए अहम नहीं है। बॉलीवुड के प्रोड्यूसर उन्हें इसलिए रोल देते हैं क्योंकि वो ऐसा चाहते हैं और अगर वो अब उरी हमले के बाद वही उन्हें बाहर निकालने के लिए चिल्ला रहे हैं लेकिन क्या ये बेहतर नहीं होता कि वो अपनी ऊर्जा उरी के शहीदों के लिए आर्थिक मदद जुटाने में लगाते। क्या हमें अपनी ऊर्जा उरी के शहीदों की विधवाओं, बच्चों और माता-पिता से जुड़ने में नहीं लगानी चाहिए?”

वशिष्ट ने लेख में कहा है कि उन्हें नहीं पता था कि टीवी बहस में कारगिल में शहीद हुए सैनिक के पिता भी शामिल हैं। वशिष्ट ने लिखा है, “मैं आपको ये भी बता दूं कि मैं केवल अर्नब की बात सुन पा रही थी और मेरे इयरफोन में काफी शोर आ रहा था, और मुझे ये भी नहीं पता था शो में कौन है और  वो क्या कर रहे हैं। न मुझे पता था, न ही मुझे बताया गया था कि कारिगल के शहीद के पिता शो में शामिल हैं, फिर उनका अपमान करने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता।” वशिष्ट ने कहा है कि सेना और उसके मूल्य उनके खून में हैं।

वशिष्ट ने लिखा है, “जब भी सेना के जवानों को इस्तमाल करके उन्हें भुला दिया जाता है तो मुझे गहरा दुख होता है। चाे वो असली युद्ध हो या हमारी सीमाओं की सुरक्षा करने की बात हो या कश्मीर जैसी बाढ़ या भूकंप के वक्त हमारी जिंदगी बचाने की-  सैनिक ही सबसे आगे आते हैं और हमेशा हर हालात में हमारी मदद के लिए तैयार रहते हैं (चाहे युद्ध हो या न हो)। ”

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राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस और उद्धव ठाकरे की पार्टी शिव सेना ने फवाद खान और माहिरा खान जैसे पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में काम करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस और उद्धव ठाकरे की पार्टी शिव सेना ने फवाद खान और माहिरा खान जैसे पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में काम करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

वशिष्ट ने लिखा है कि उनके सैन्य अधिकारी पिता ने भारत के लिए सभी तीन युद्ध लड़े हैं। वशिष्ट ने लिखा है, ” मेरी मां जो सैन्य अधिकारी की पत्नी थीं, 1971 की लड़ाई के दौरान कहती थीं कि अगर डैडी वापस नहीं आते हैं तो समझना वो ईश्वर के पास चले गए हैं। और हवाई हमलो के सायरनों के बीच वो मेरा स्कूल का होमवर्क कराती थीं।” वशिष्ट ने लिखा है, “न मैं 1965 भूलीं हूं, न ही 1971 और ना ही 1999. लेकिन इतने युद्धों के बाद भी पाकिस्तानी कलाकारों को यहां आने और काम करने की इजाजत दी गई। इसी वजह से मैं कहती हूं कि पाकिस्तानी कलाकार बॉलीवुड में काम करते हैं या नहीं ये मुद्दा ही नहीं है।”

वशिष्ट ने अपने लेख में पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान का भी बचाव किया है। वशिष्ट ने लिखा है कि फवाद खान से पाकिस्तानी सरकार के विरोध की उम्मीद करना सही नहीं है। “उनका परिवार शायद पाकिस्तान में है, जिसकी सुरक्षा की उन्हें चिंता हो। इससे क्या वो भारत-विरोधी हो जाते हैं?” वशिष्ट ने आगे लिखा है, “जब कम्युनिस्ट रंगकर्मी सफदर हाशमी को सत्ताधारी पार्टी के यूथ विंग के कार्यकर्ता द्वारा एक नुक्कड़ नाटक के दौरान दिनदहाड़े मार दिया गया तो एक राष्ट्र के तौर पर हमने “इसे भुला दिया” तो फवाद खान कौन है?”

वशिष्ट ने लिखा है,  “अगर बिनायक सेन को भारत में जेल भेजा जा सकता है तो पाकिस्तान में फवाद खान का क्या होगा इसकी कल्पना कीजिए? जब 1984 में हजारों सिखों को दिल्ली में जिंदा जलाया और मारा जा सकता है और हम अपने घरों में डर कर छिप गए  तो क्या हम देशद्रोही हो गए?” मीता वशिष्ट ने लेख में बताया है कि जो वो अर्नब गोस्वामी के शो से बाहर निकलीं तो उसके बाद उनके पास बधाई के ढेरों मैसेज आए।

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