हमारे PM ने इतने सालों में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस तक न की, वो ऐसा कर रहे तो बाकी से क्या उम्मीद कर सकते हैं- बोलीं ऐक्ट्रेस गुल

बॉलीवुड अदाकारा और एक्टिविस्ट गुल पनाग ने कृषि कानूनों को लेकर पीएम मोदी का घेराव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री खुद को प्रधानसेवक कहते हैं लेकिन इतने सालों में वह एक प्रेस कांफ्रेंस तक नहीं करते हैं।

Gul Panag Farmer Protets
किसानों के समर्थन में गुल पनाग ने पीएम मोदी पर बोला हमला। Photo Source- Indian Express

बॉलीवुड अदाकारा और एक्टिविस्ट गुल पनाग ने कृषि कानूनों को लेकर पीएम मोदी का घेराव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री खुद को प्रधानसेवक कहते हैं लेकिन इतने सालों में वह एक प्रेस कांफ्रेंस तक नहीं करते हैं। गुल पनाग पिछले दिनों किसानों का समर्थन करते हुए किसान संसद में हिस्सा लेने पहुंची थी। एक सवाल के जवाब में गुल पनाग ने कहा कि एक तरफ सरकार खुद को जनता की सेवक बताती है लेकिन महीनों ने आंदोलन कर रहे किसानों से कोई बात नहीं कर रही है। अगर वह वाकई में सेवक हैं तो यहां आएं और जनता से बात करें।

किसानों के साथ संवाद को लेकर एक सवाल के जवाब में गुल पनाग ने कहा कि जब प्रधानमंत्री इतने सालों में एक प्रेस कांफ्रेंस तक नहीं करते हैं तो उनके नेताओं और मंत्रियों से क्या उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि वह खुद को जनता का सेवक बताते हैं लेकिन जनता और मीडिया के सवालों के जवाब नहीं देना चाहते हैं। इससे साफ हो जाता है कि वह किस तरह के प्रधानसेवक हैं।

गुल पनाग ने कहा कि जिन कानून को विधायी प्रक्रिया से अलग जाकर पास कराया जाता है और उस पर विरोध होता है तो सरकार को ऐसे कानूनों पर दोबारा चर्चा करनी चाहिए और उसे नए तरीके से लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान और खेत, राज्य का विषय है। ऐसे में केंद्र सरकार संघीय ढांचे को भी चोट पहुंचाते हुए स्टेट सबजेक्ट पर कानून बना रही है।

पनाग के अनुसार अगर सरकार ने किसानों के साथ चर्चा की होती तो शायद उन्हें किसानों की चिंताओं का अंदाजा होता लेकिन उन्होंने तो कॉरपोरेट हाउसेज के साथ चर्चा की है, इसलिए उनकी चिंताओं का निवारण हो गया है लेकिन किसानों की चिंताएं वैसी ही बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि इस देश में तानाशाही नहीं चलेगी। सरकार को कानून वापस लेने होंगे, उन्हें कानून पास कराने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन कराना होगा। उन्होंने कहा कि क्या सरकार किसान आंदोलन के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि आने वाले समय में कानूनों को इसी तरह से लागू कराया जाएगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसान अपनी मांगों के साथ पिछले 8 महीनों से भी ज्यादा समय से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। सरकार और किसानों के बीच पिछले चार महीनों से कोई संवाद नहीं हुआ है, इधर किसानों ने अपनी आंदोलन को और तेज कर दिया है। इन दिनों वह मानसून सत्र के साथ-साथ किसान संसद भी चला रहे हैं, जिसको कई सेलिब्रिटीज ने भी अपना समर्थन दिया है।

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