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एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी का निधन, एल्गार परिषद केस में थे आरोपी

पिछले महीने एनआईए ने हाईकोर्ट के समक्ष हलफनामा दायर कर स्वामी की जमानत याचिका का विरोध किया था। एनआईए ने कहा था कि उनकी बीमारी के कोई 'ठोस सबूत' नहीं हैं।

आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी का निधन हो गया है। अदालत के आदेश के बाद स्वामी का मुंबई के होली फैमिली हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। 84 साल के सामाजिक कार्यकर्ता पार्किंसंस रोग से पीड़ित थे। सोमवार सुबह ही उनके अधिवक्ता मिहिर देसाई ने न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति एन जे जामदार की पीठ को बताया था कि स्वामी की हालत नाजुक बनी हुई है। कुछ ही समय बाद होली फैमिली अस्पताल के निदेशक डॉ इयान डिसूजा ने अदालत को बताया कि 84 वर्षीय स्वामी की सोमवार अपराह्न डेढ़ बजे मृत्यु हो गई।

डिसूजा ने अदालत को बताया कि रविवार तड़के स्वामी को दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। अधिकारी ने अदालत को बताया, ‘‘उनकी (स्वामी) हालत ठीक नहीं हो पायी और आज दोपहर उनका निधन हो गया।’’ उन्होंने बताया कि फेफड़े में संक्रमण, पार्किंसंस रोग और कोविड-19 की जटिलताओं के कारण स्वामी की मौत हो गयी। स्वामी के वकील मिहिर देसाई ने बताया कि तलोजा जेल प्रशासन की ओर से लापरवाही हुई और उन्हें तुरंत चिकित्सा सुविधा मुहैया नहीं करायी गयी।

अधिवक्ता मिहिर देसाई ने यह भी कहा कि चूंकि स्वामी के परिवार के करीबी सदस्य नहीं हैं, इसलिए उनका पार्थिव शरीर स्वामी के मित्र फादर फ्रेजर मस्कारेनहास को सौंपा जाएगा। फ्रेजर मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल और वर्तमान में बांद्रा में सेंट पीटर चर्च के पादरी हैं। स्वामी का अंतिम संस्कार मुंबई में ही किया जा सकता है।

Father Frazer Mascarenhas, Holy family hospital
होली फैमिली अस्पताल के बाहर फादर फ्रेजर मस्कारेनहास (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस, गणेश शिरसेकर)

लंबे समय से बीमार चल रहे स्टेन स्वामी की ओर से इसी साल बॉम्बे हाईकोर्ट में बेल के लिए अर्जी लगयी गयी थी। लेकिन उन्हें बेल नहीं मिल पायी थी। स्टेन स्वामी की तरफ से कहा गया था कि जेल में उनकी हालत हर रोज बिगड़ रही है, ऐसे में उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया जाए। अंतत: 30 मई को हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

बताते चलें कि पिछले महीने एनआईए ने हाईकोर्ट के समक्ष हलफनामा दायर कर स्वामी की जमानत याचिका का विरोध किया था। इसने कहा था कि उनकी बीमारी के कोई ‘ठोस सबूत’ नहीं हैं। जांच एजेंसी की तरफ से कहा गया था कि स्वामी का संबंध माओवादियों के साथ रहा है। इनके द्वारा देश में अशांति फैलाने की साजिश की गयी थी।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने फादर स्टेन स्वामी को अक्टूबर 2020 में गिरफ्तार किया था। जिसके बाद से उन्हें तालोजा जेल हॉस्पिटल में रखा गया था। उनके ऊपर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था।

बताते चलें कि एल्गार परिषद का मामला 31 दिसंबर 2017 का है जिसमें पुलिस का दावा है कि भड़काऊ भाषणों के कारण भीमा-कोरेगांव में हिंसा हुई थी। बताते चलें कि स्टेन स्वामी मूल रूप से झारखंड के रहने वाले थे। स्टेन स्वामी की गिनती देश के उन एक्टिविस्ट में होती रही है जिन्होंने लंबे समय तक आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी थी। स्वामी कई दशकों से झारखंड के आदिवासी क्षेत्र में काम कर रहे थे।

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