ताज़ा खबर
 

अकेला डॉक्टर और कोरोना केस की बाढ़, गांव में नहीं मिल रहीं सुझाई गई दवाइयां

डॉक्टर शर्मा जानते हैं कि उनके पास जो भी मरीज आ रहे हैं, उनकी सर्दी खांसी सामान्य नहीं है लेकिन इस बारे में वो कहते हैं कि मैं उनसे कैसे कह सकता है कि इस बीमारी से उनकी जान भी जा सकती है।

Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | May 8, 2021 5:43 PM
डॉ वी के शर्मा अकेले कोरोना संक्रमितों का इलाज करने में दिन-रात जुटे हैं। (Photo: Praveen Khanna)

उत्तर प्रदेश में कोरोना का प्रकोप बहुत तेजी से फैल रहा है। देश के चौथा सबसे ज्यादा सक्रिय ममले इस समय यूपी में हैं। इसी बीच उत्तर-पश्चिमी हिस्से के सहारनपुर जिले के बड़गांव गांव में एक अकेला डॉक्टर पूरे इलाके के कोरोना से संक्रमित लोगों का इलाज़ कर रहा है। डॉ वी के शर्मा अकेले कोरोना संक्रमितों का इलाज करने में दिन-रात जुटे हैं।

इस क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी खस्ता है कि न तो यहां कोई अस्पताल है ना ही डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाइयां उपलब्ध है। भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य की ऐसी हालत चिंता का विषय है। यूपी में करीब 2.6 लाख सक्रिय मामले हैं। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि अकेले सहारनपुर में 29 अप्रैल को 378 नए मामले थे और एक मौत दर्ज की गई थी। इसके ठीक एक हफ्ते बाद, 6 मई को, सात मौत और 687 नए मामले सामने आए थे, जिसके बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर 5,893 हो गई थी।

बड़गांव में सड़क किनारे डॉक्टर वी के शर्मा के एक रूम के क्लिनिक में कोविड लक्षणों से ग्रस्त मरीज काफी संख्या में आ रहे हैं जिससे पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में बीमारी किस हद तक भयावह रूप ले चुका है। लेकिन डॉक्टर वी के शर्मा मरीजों का इलाज करते हुए उनका मनोबल बढ़ाते हुए बस यही कहते हैं, ‘बस सर्दी खांसी है, ठीक हो जाओगे।’

डॉक्टर शर्मा जानते हैं कि उनके पास जो भी मरीज आ रहे हैं, उनकी सर्दी खांसी सामान्य नहीं है लेकिन इस बारे में वो कहते हैं कि मैं उनसे कैसे कह सकता है कि इस बीमारी से उनकी जान भी जा सकती है। सहारनपुर के बड़गांव जैसे ग्रामीण इलाकों में जहां स्वास्थ्य सेवाएं न के बराबर हैं, कोरोना से संक्रमित मरीजों का इलाज करने का भार डॉक्टर वी के शर्मा जैसे डॉक्टर के कंधों पर आ गया है जो कि आयुर्वेद में ग्रेजुएट हैं।

यहां सबसे करीब ब्लॉक मुख्यालय 12 किमी दूर नानौता में है। वहीं इलाके का सबसे बड़ा शहर सहारनपुर है जो 33 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा पास में मुजफ्फरनगर है जो गांव से 33 किलोमीटर कि दूरी पर है। ऐसे में पूरे इलाके का भार डॉक्टर वी के शर्मा के कंधों पर है।

डॉक्टर शर्मा गर्व से बताते हैं कि उनके यहां इलाज कराने आए मरीजों में से अब तक किसी की मौत नहीं हुई है। डॉक्टर शर्मा उन्हीं मरीजों का इलाज करते हैं जिनका ऑक्सीजन स्तर पल्स ऑक्सीमीटर पर 92 से ज्यादा होता है। जिनका ऑक्सीजन स्तर इससे कम होता है, डॉक्टर शर्मा उनको अस्पताल जाने को कहते हैं। वे कहते हैं, ‘मैं कर भी क्या सकता हूं, मैं सामान्य लक्षणों का इलाज कर सकता हूं और कोशिश करता हूं कि इंफेक्शन शरीर में न फैले। लेकिन अब यह करना भी मुश्किल होता जा रहा है।’

डॉक्टर शर्मा जिन दवाइयों (एजिथ्रोमाइसिन और डेक्सामेथासोन) से इन मरीजों को इलाज कर रहे हैं, वह अब गांव के मेडिकल स्टोर में उपलब्ध नहीं हैं और शहरों में वो आसानी से नहीं मिल रहे हैं। वो बताते हैं कि प्रतिदिन दवाइयां महंगी होती जा रही हैं, पहले सेलाइन ड्रिप 350 रुपए में मिल जाते थे लेकिन अब वह 900 रुपए में भी नहीं मिल पाती हैं। गांवों से काफी मरीज आ रहे हैं और वो मर रहे हैं, हर तरफ भय का माहौल है।

Next Stories
1 हम लोग अहीर जाति से हैं, नहीं डरते किसी से- Lokpal Bill के सवाल पर लड़की को लालू ने दिया था जवाब
2 अरे, ये एंटीबायटिक्स-स्टेरॉइड्स पागलपन में मत दो, ये इबोला की दवा है…फिर भी ठोंके जा रहे- रामदेव का इंटरव्यू में सनसनीखेज दावा
3 कोविड-19 संकट : थाईलैंड, कतर जैसे देशों से चिकित्सा आपूर्ति पहुंचना जारी, यूएन एजेंसियों ने दिए 10 हजार कंसंट्रेटर
यह पढ़ा क्या?
X