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कालेधन पर सरकार की बड़ी कारवाई, देश के 21 लाख कंपनी निदेशकों पर लटक रही तलवार

इस साल की शुरुआत में MCA ने सभी कंपनी निदेशकों को DIN नंबर पाने के लिए केवाईसी नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया था। सरकार का मकसद ड्राइवर, घरेलू कामकाजी महिला और इसी तरह के अन्य लोगों को कंपनी निदेशक बनाने के गोरखधंधे पर रोक लगाना है।

सरकार ने शैल कंपनियों पर कसा शिकंजा। (file pic)

देश में कालेधन पर रोक लगाने और शैल कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने फर्जी कंपनी निदेशकों के DIN (Director Identification Number) फ्रीज करने का फैसला किया है। बता दें कि सरकार ने देशभर के करीब 33 लाख सक्रिय कंपनी निदेशकों के लिए केवाईसी (KYC-Know your customer) नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया है। केवाईसी नियमों का पालन नहीं करने पर कंपनी निदेशकों का DIN नंबर फ्रीज हो सकता है। मिनिस्टरी ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स ने केवाईसी नियमों की औपचारिकता पूरी करने के लिए शनिवार 15 सितंबर तक की डेडलाइन तय की थी। डेडलाइन तक सिर्फ 12 लाख कंपनी निदेशकों यानि कि करीब 35% निदेशकों ने केवाईसी नियमों का पालन कर दिया है। वहीं 21 निदेशकों ने अभी तक योग्यता संबंधी नियमों को पूरा नहीं किया है, जिसके चलते उनका रजिस्ट्रेशन रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है। मिनिस्टरी ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (MCA) अब इस डेडलाइन को बढ़ाने के मूड में नहीं है।

इस साल की शुरुआत में MCA ने सभी कंपनी निदेशकों को DIN नंबर पाने के लिए केवाईसी नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया था। सरकार का मकसद ड्राइवर, घरेलू कामकाजी महिला और इसी तरह के अन्य लोगों को कंपनी निदेशक बनाने के गोरखधंधे पर रोक लगाना है। MCA जल्द ही केवाईसी नियमों का पालन नहीं करने वाले कंपनी निदेशकों का DIN नंबर फ्रीज करने की कार्रवाई कर सकता है। हालांकि अयोग्य ठहराए गए कंपनी निदेशक 5000 रुपए की रजिस्ट्रेशन फीस और केवाईसी नियमों का पालन कर फिर से निदेशक बन सकते हैं। बता दें कि सरकार ने करीब 50 लाख DIN नंबर जारी किए थे। जिनमें से 33 लाख सक्रिय निदेशक माने गए थे। बाकी निदेशकों को फर्जी निदेशक माना गया है। दरअसल सरकार यह पूरी कवायद शैल कंपनियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कारवाई करने के लिए की जा रही है।


सरकार द्वारा शैल कंपनियों पर कार्रवाई के चलते करीब 3 लाख कंपनियों ने, जिन्होंने अभी तक ITR दाखिल नहीं की है, सरकार उन्हें डिरजिस्टर्ड करने पर विचार कर रही है। साथ ही इन कंपनियों के 3 लाख निदेशकों को भी डिस्कवालिफाई किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि शैल कंपनियां और फर्जी निदेशक काला धन बनाने के अहम चैनल्स हैं। काला धन इन शैल कंपनियों के जाल से होकर गुजरता है, जिसमें धन के असली मालिक का पता नहीं चल पाता है। सरकार अधिकतर कंपनी निदेशकों के पैन नंबर के द्वारा लिंक कर चुकी है। इसके साथ ही अब सरकार इन कंपनी निदेशकों के आधार नंबर और DIN नंबर भी लिंक करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही DIN नंबर धारक कंपनी निदेशकों को अब एक फॉर्म पर सरकारी फॉर्म पर साइन भी कराए जाएंगे, जो कि किसी चार्टड अकाउंटेंट या कंपनी सेक्रेटरी द्वारा प्रमाणित कराना जरुरी होगा।

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