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महाराष्‍ट्र धमाका: सनातन संस्‍था के कार्यकर्ता ने स्टिंग में कबूली बम रखने की बात, कोर्ट कर चुका है बरी

मंगेश ने बताया कि पहले उन्होंने उस मराठी नाटक के विरोध में धरना प्रदर्शन किया था, लेकिन जब उससे कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने लोगों को डराने के लिए बम धमाके किए।

maharashtra bomb blastमहाराष्ट्र बम धमाकों में बरी किए गए आरोपियों ने कैमरे पर कबूला अपना जुर्म। (Express photo)(प्रतीकात्मक तस्वीर)

साल 2008 में महाराष्ट्र में हुए बम धमाकों के मामले में दक्षिणपंथी ‘सनातन संस्था’ के 4 आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया था। अब एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में आरोपमुक्त किए गए आरोपियों में से 2 ने उन धमाकों में शामिल होने की बात कबूल की है। बता दें कि इन बम धमाकों में एटीएस ने सनातन संस्था से जुड़े 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। जिनमें से बाद में 4 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। अब रिहा किए गए आरोपियों में से दो आरोपियों मंगेश दिनाकर निकम और हरिभाऊ कृष्णा दिवेकर ने इंडिया टुडे टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में बम धमाकों में संलिप्तता की बात स्वीकारी है।

साल 2008 में महाराष्ट्र के थाणे, पनवेल और वाशी में बम धमाकों के मामले में 7 साल पहले ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए गए मंगेश दिनाकर निकम ने कैमरे पर बम प्लांट करने की बात स्वीकार की है। मंगेश दिनाकर पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सनातन संस्था का साधक है। मंगेश ने बताया कि उन्होंने बम धमाके एक मराठी नाटक में हिंदू देवी-देवताओं की गलत छवि पेश किए जाने के विरोध में किए थे, उसने वाशी में बम प्लांट किया था। मंगेश ने बताया कि पहले उन्होंने उस मराठी नाटक के विरोध में धरना प्रदर्शन किया था, लेकिन जब उससे कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने लोगों को डराने के लिए बम धमाके किए। मंगेश ने यह भी स्वीकार किया कि बम धमाकों की साजिश पनवेल के सनातन संस्था के एक ठिकाने पर रची गई।

मंगेश निकम की तरह ही एक अन्य आरोपी हरिभाऊ कृष्णा दिवेकर ने भी कैमरे पर बम धमाकों में संलिप्तता की बात स्वीकार की। रायगढ़ स्थित अपने घर पर स्टिंग पत्रकारों से बात करते हुए दिवेकर ने बताया कि एटीएस ने उसके पास से विस्फोटक सामान भी बरामद किया था। हालांकि एटीएस ने अपनी चार्जशीट में इसका कहीं जिक्र नहीं किया है। 2008 बम धमाकों में एटीएस ने अपनी चार्जशीट में रमेश हनुमंत गडकरी, मंगेश दिनेकर निकम, विक्रम विनय भावे, संतोष सीताराम अंगारे, हरिभाऊ कृष्णा दिवेकर और हेमंत तुकाराम चालके को बम धमाके करने और बम धमाकों की साजिश रचने का आरोपी बनाया था। साल 2011 में ट्रायल कोर्ट ने गडकरी और भावे को दोषी करार दिया था, वहीं बाकी 4 आरोपियों को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया था।

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