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दो कौड़ी के ढांचे पर छाती पीटने वाले समझें…पाकिस्तान को खाकिस्तान बना देंगे, डिबेट में बोले आचार्य धर्मेंद्र

सीबीआई की विशेष अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया, हालांकि विपक्ष का आरोप है कि कई नेता फैसले के बाद भी विवादास्पद बयान देने में जुटे रहे।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: October 1, 2020 2:53 PM
Babri Demolition Case, Acharya Dharmendraआचार्य धर्मेंद्र बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में 32 आरोपियों में से एक थे।

अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में सीबीआई विशेष अदालत ने सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया। सरकार के कई बड़े नेताओं ने जहां कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि बरी हुए कुछ नेता अब भी विवादित बयान देने से नहीं चूक रहे। ऐसा ही एक वाकया टीवी डिबेट के दौरान भी हुआ, जब अयोध्या केस में आरोपी रहे आचार्य धर्मेंद्र ने एंकर के एक सवाल पर कह दिया कि आप बाबरी ढांचे की बात कर रहे हैं, हम तो पाकिस्तान को जहन्नुम रसीद करना चाहते हैं। बांग्लादेश को मिलाकर भारत को अखंड बनाना चाहते हैं।

आचार्य धर्मेंद्र यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, “हमारे लिए भारत जमीन का टुकड़ा नहीं है, हमारा लक्ष्य है भारत माता की प्रतिमा को अखंड बनाना। दो कौड़ी के ढांचे पर छाती पीटने वालों को यह समझना चाहिए कि हम जब तक भारत माता को अखंड नहीं बना लेते, जब तक पाकिस्तान को खाकिस्तान में नहीं मिला लेंगे। बांग्लादेश को भारत में नहीं मिलाएंगे, तब तक हमारा यह मिशन पूरा नहीं होगा।”

न्यूज नेशन चैनल के एंकर मानक गुप्ता ने जब आचार्य धर्मेंद्र से पूछा कि फैसला आते ही आपने मथुरा-काशी की अगली बारी है जैसा विवादास्पद बयान दे दिया, तो इस पर आचार्य ने कहा कि उन्होंने कोई नई बात नहीं कही है। जब बाबरी का ढांचा टूटा था, उसमें सारे देश के रामभक्तों में यह नारा गूंजा था कि यह तो पहली झांकी है, काशी-मथुरा बाकी हैं। यह हमारा पुराना संघर्ष है।

आरोपियों को बरी करने के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष: आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य एवं अधिवक्ता जफरयाब जिलानी पहले ही बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा सभी 32 अभियुक्तों को बरी किये जाने के फैसले को गलत बता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि विशेष सीबीआई अदालत का फैसला बिल्कुल गलत है। अदालत ने सबूतों को नजरअंदाज करते हुए यह निर्णय दिया है। मुस्लिम पक्ष इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देगा।

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