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राफेल डील में दस लाख यूरो दलाली का आरोप: पीएम के खिलाफ केस के लिए सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल

हाल ही में फ्रांस के मीडिया पोर्टल मीडियापार्ट ने दावा किया था कि भारत के प्रवर्तन निदेशालय ने सुशेन गुप्ता नाम के एक दलाल को दसॉ और उसकी सहायक कंपनियों की तरफ से दी गयी रकम की जांच नहीं की थी।

Punya Prasun Bajpayi, Rafale deal controversy, पीएम नरेंद्र मोदी, पुण्य प्रसून बाजपेयी, Punya Prasun Bajpayi,पीएम नरेंद्र मोदी और राफेल जेट (फोटोसोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राफेल डील में मुकदमा चलाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल (जनहित याचिका) दायर की गयी है। याचिका मनोहर लाल शर्मा नाम के व्यक्ति की तरफ से दायर की गयी है। याचिका में कथित भारतीय बिचौलिए सुषन गुप्ता के खिलाफ भी ऐसे ही मुकदमे दर्ज करने की मांग की गयी है। शर्मा की तरफ से अदालत की देखरेंख में सीबीआई जांच की मांग की गयी है।इस मुद्दे पर अदालत दो हफ्ते के बाद सुनावाई करेगा।

टेलीग्राफ की खबर के अनुसार याचिका 6 अप्रैल को ही डाली गयी थी। लेकिन मनोहर लाल शर्मा ने इसे रविवार को सार्वजनिक किया है। इस मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि फ्रांस के मीडिया पोर्टल मीडियापार्ट ने दावा किया था कि भारत के प्रवर्तन निदेशालय ने सुशेन गुप्ता नाम के एक दलाल को दसॉ और उसकी सहायक कंपनियों की तरफ से दी गयी रकम की जांच की ही नहीं थी।

पोर्टल की तरफ से दावा किया गया था कि गुप्ता ने रक्षा मंत्रालय से महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल किए थे। जिन्हें उसने दसॉ एविएशन को सौंप दिया था। इन दस्तावेजों ने भारत की गुप्त नीतियों को कंपनी के सामने उजागर कर दिया था। गुप्ता द्वारा किए गए कार्य से कंपनी को राफेल जेट बेचने में मदद मिली थी।

कौन है सुशेन गुप्ता?: सुशेन गुप्ता अगस्तावेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर डील में दलाली के आरोपो के कारण मुकदमें झेल रहा है। ईडी ने 2019 में गुप्ता की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि दुबई में रहने वाले राजीव सक्सेना के पास से मिली डायरी के पता चला है कि उसने किसी ‘RG’को 50 करोड़ रुपये दिए थे।

बताते चलें कि मनोहर लाल शर्मा ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद चुनाव को रद्द करने के लिए भी एक जनहित याचिका दायर की थी। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था।

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