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अखिलेश के राज में जवाबदेही से मुक्त है नौकरशाही

अनिल बंसल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को रामपुर में अपने पिता मुलायम सिंह यादव के 76वें जन्मदिन के मौके पर भले नरेंद्र मोदी को चेताया हो पर उनकी सरकार के कामकाज से सूबे में कोई भी तबका खुश नहीं लगता। कभी खुद को चौधरी चरण सिंह का विचारपुत्र और किसानों का […]

Author November 24, 2014 8:58 AM
अखिलेश की सरकार ने किसानों की गत मायावती के राज से भी बुरी बना दी है।

अनिल बंसल

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को रामपुर में अपने पिता मुलायम सिंह यादव के 76वें जन्मदिन के मौके पर भले नरेंद्र मोदी को चेताया हो पर उनकी सरकार के कामकाज से सूबे में कोई भी तबका खुश नहीं लगता। कभी खुद को चौधरी चरण सिंह का विचारपुत्र और किसानों का हितैषी बताते उनके पिता अघाते नहीं थे। पर अखिलेश की सरकार ने किसानों की गत मायावती के राज से भी बुरी बना दी है। गन्ना किसानों को पिछले सत्र का भुगतान तो हुआ ही नहीं, इस साल चीनी मिलों ने पेराई सत्र शुरू न कर सरकार को ठेंगा दिखाया है। गन्ने के दाम भी अखिलेश सरकार ने बढ़ाने के बजाए पिछले साल की तुलना में घटा दिए हैं।

जहां तक उद्योग और व्यापार जगत का सवाल है, देश के सबसे बड़े सूबे में पिछले ढाई साल में विदेशी निवेश तो दूर, किसी देसी उद्योगपति ने भी कोई कारखाना नहीं लगाया है। कानून व्यवस्था की हालत इतनी खराब है कि उद्योगपति दूसरे सूबों में जाना बेहतर मान रहे हैं। पास के हरियाणा राज्य की प्रगति उत्तर प्रदेश को चिढ़ा रही है। ढांचागत सुविधाओं का भी बुरा हाल है। मोदी को ललकारने वाले अखिलेश यादव भूल रहे हैं कि गुजरात में बिजली 24 घंटे मिलती है जबकि उत्तर प्रदेश में सर्दी के मौसम तक में बिजली की आंख-मिचौली आम बात है। बिजली उत्पादन बढ़ाने और नए ट्रांसफार्मर लगाने तक के लिए सरकार के पास पैसा नहीं। लेकिन उपभोक्ताओं को परेशान करने और कमीशनखोरी के चक्कर में हर साल राज्य सरकार मीटर खरीदने पर अरबों रुपए जरूर फूंक रही है।

सड़कों की हालत देखकर तो कोई भी सरकार को कोसे बिना नहीं रह सकता। हरियाणा सरकार के सहयोग से यमुना पर प्रस्तावित पुल के निर्माण की मंजूरी का ढिंढोरा पीटने वाली अखिलेश सरकार को गंगनहर के जर्जर पुलों की मरम्मत तक की चिंता नहीं लगती। सोनीपत से मेरठ को जोड़ने वाले राजमार्ग पर गंगनहर पर दशकों पहले बने पुल में दो साल पहले दरार दिखी थी। राज्य के लोक निर्माण मंत्री और मुख्यमंत्री के चाचा शिवपाल यादव ने नए पुल के निर्माण का भरोसा भी दिया था। छोटे वाहनों की सुविधा के लिए राज्य सेतु निगम ने जानीखुर्द के पास गंगनहर पर लोहे का अस्थायी पुल बनाया था। इसकी मियाद एक साल बताई गई थी। लेकिन दो साल बीत गए, पक्के पुल के निर्माण का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया। इस अस्थायी पुल पर पुलिस को घूस देकर अंतरराज्यीय भारी वाहन दिन-रात गुजर रहे हैं। मेरठ के कमिश्नर ने पुल के दोनों तरफ बाधा खड़ी करने और भारी वाहनों की आवाजाही बंद कराने का निर्देश दिया था पर कोई नतीजा नहीं निकला। किसी की जवाबदेही होती तो नतीजा निकलता।

अखिलेश यादव को यह भी पता नहीं होगा कि मोदी के राज्य गुजरात में बड़े अधिकारी भी रौब गांठने के लिए गाड़ियों पर लाल-नीली बत्तियां नहीं लगाते जबकि उनके राज्य में हर ऐरा-गैरा बत्ती और सपा का झंडा लगा सरकारी मशीनरी पर रौब गालिब करता दिख जाएगा। एक दर्जा प्राप्त मंत्री के पिता ने पुलिस के दारोगा से जिस तरह का बेहूदा बर्ताव किया था, उसकी चर्चा सारे देश में हो चुकी है। लेकिन सपा के लोगों पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
हत्या, डकैती, लूटपाट, अपहरण, बलात्कार और अवैध वसूली जैसे अपराधों की खबरों से सूबे के अखबार हर दिन रंगे होते हैं। इस पर अखिलेश तुर्रा देते हैं कि मीडिया को उनकी सरकार का अच्छा कामकाज कभी नहीं दिखता। अच्छा होता कि वे अपने पिता की नसीहतों को ही सही मान लेते जो कई मौकों पर उनकी कार्यप्रणाली की आलोचना तो कर ही चुके हैं, सपा के लोगों पर भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी में लिप्त रहने की अपनी पीड़ा भी जता चुके हैं। पिछले हफ्ते तो मुलायम ने यहां तक कह दिया कि अखिलेश की लैपटाप योजना ने लोकसभा चुनाव में सपा को हरवा दिया। लैपटाप पर नौजवान मोदी की गाथाएं और तस्वीर ही देखते रहे। लोकसभा चुनाव के नतीजों से उपजी हताशा का ही अंजाम है कि अखिलेश यादव ने कन्या विद्या धन, बेरोजगारी भत्ते और लैपटॉप जैसी अपनी बहुप्रचारित योजनाओं को बंद कर दिया है। टैबलेट तो खैर वे कभी बांट ही नहीं पाए।

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों तक की हालत अच्छी नहीं है। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि नई बनी सड़कें हफ्ते दस दिन में ही टूट जाती हैं पर किसी को दंड नहीं मिलता। गंगनहर 19वीं शताब्दी में अंग्रेजों ने हरिद्वार से निकाली थी जिसके कारण उत्तर प्रदेश में हरित क्रांति हुई। कई जगह राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य के राजमार्ग इस नहर से होकर गुजरते हैं। पर अभी भी ज्यादातर पुल डेढ़ सौ साल पुराने हैं। सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने, नए पुल बनाने और बिजली-पानी जैसी दूसरी बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया कराने में अखिलेश सरकार नाकाम रही है।

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