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जम्‍मू-कश्‍मीर: आतंकियों के खिलाफ मोदी सरकार की सख्‍त नीति का असर- 4 साल में 838 आतंकी ढेर

वर्ष 2014 से 31 दिसंबर 2018 तक जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों की 1,213 घटनाएं दर्ज की गई। इन घटनाओं में 183 नागरिकों ने अपनी जिंदगी गंवा दी।

तस्वीर का प्रयोग प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Photo: PTI)

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में मंगलवार (8 जनवरी) को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में एक अज्ञात आतंकवादी मार गिराया। अधिकारियों ने बताया कि पुलवामा के जाहिदपोरा इलाके में आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। गोलीबारी में एक अज्ञात आतंकवादी मारा गया और घटनास्थल से कुछ हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए। आतंकी को मारे जाने की यह पहली घटना नहीं है। आए दिन सुरक्षाबल जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को ढेर कर रहे हैं। आतंकियों के खिलाफ मोदी सरकार की सख्त नीति का असर जम्मू-कश्मीर में दिख रहा है। 4 साल में सुरक्षाबलों ने राज्य में 838 आतंकी मार गिराए।

पीटीआई के अनुसार, लोकसभा में मंगलवार को बताया गया कि वर्ष 2014 के बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर में 838 आतंकी मारे गए हैं। इसेक साथ ही 183 नागरिकों की भी गोली-बारी की घटनाओं में मौत हुई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीन ने कहा, “वर्ष 2014 से 31 दिसंबर 2018 तक जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों की 1,213 घटनाएं दर्ज की गई। इन घटनाओं में 183 नागरिकों ने अपनी जिंदगी गंवा दी। वहीं, 838 आतंकवादी मारे गए।” हंसराज अहीर ने यह बात एक लिखित सवाल के जवाब में कही।

अहीर ने कहा कि इस दौरान देश के अन्य हिस्सों में भी 6 आतंकी घटनाएं हुई। इन घटनाओं में 11 नागरिकों की जिंदगी चली गई। वहीं, 7 आतंकी ढेर कर दिए गए। हालांकि, दूसरी ओर पाकिस्तान द्वारा सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। एक आर्मी अधिकारी के अनुसार, “पाकिस्तान ने वर्ष 2018 में बीते 15 साल की तुलना में सबसे अधिक सीजफायर उल्लंघन किया। सीजफायर उल्लंघन की 2,936 घटनाएं दर्ज की गई। यदि औसतन देखा जाए तो प्रतिदिन 8 घटनाएं।”

अधिकारी के अनुसार, “सीजफायर की घटनाओं में 61 लोग मारे गए और करीब 250 से ज्यादा घायल हो गए। इन घटनाओं को रोकने के लिए भारत और पाकिस्तान के उच्च अधिकारियों के बीच 20 बार से ज्यादा बैठक भी हुई। लेकिन इसका कोई असर सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं पर नहीं दिखा। पाकिस्तान की ओर से बॉर्डर के समीप पोस्ट और गांव को निशाना बनाया गया।”

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