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शोध: ब्रह्मांड में 10 गुना बढ़ गया तापमान

ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर कॉस्मोलॉजी और एस्ट्रोपार्टिकल फिजिक्स के एक अध्ययन के मुताबिक, ब्रह्मांड के विकास के साथ गुरुत्वाकर्षण बल अंतरिक्ष में काले पदार्थ और गैस को एक साथ आकाशगंगाओं और आकाशगंगाओं के समूहों में खींचता है। इस प्रक्रिया से निकलने वाली ऊर्जा से भीषण गर्मी उत्पन्न हो रही है।

ब्रह्मांड में 10 गुना तापमान बढ़ने से चिंता बढ़ी। फाइल फोटो।

ब्रह्मांड में गैसीय पदार्थों का औसत तापमान दस अरब साल में 10 गुना से अधिक बढ़ गया है। वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि तापमान लगभग 20 लाख डिग्री केल्विन तक पहुंच गया है। बढ़ते तापमान को लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ी चिंता जाहिर की है। ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर कॉस्मोलॉजी और एस्ट्रोपार्टिकल फिजिक्स के एक अध्ययन के मुताबिक, ब्रह्मांड का तापमान गतिशील रूप से बढ़ता ही जा रहा है।

तापमान आज लगभग 20 लाख डिग्री केल्विन तक पहुंच गया है जो लगभग चार मिलियन डिग्री फारेनहाइट है। शोधकर्ता यी कुआन चियांग के अनुसार, तापमान का नया मापन 2019 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिक जिम पीबल्स के कार्य को सही साबित करता है। जिम पीबल्स ने अपने सिंद्धात में समझाया था कि ब्रह्मांड में बड़े पैमाने पर संरचना कैसे बनती है।

अध्ययन में बताया गया है कि ब्रह्मांड के विकास के साथ गुरुत्वाकर्षण बल अंतरिक्ष में काले पदार्थ और गैस को एक साथ आकाशगंगाओं और आकाशगंगाओं के समूहों में खींचता है। इस प्रक्रिया से निकलने वाली ऊर्जा से भीषण गर्मी उत्पन्न हो रही है। इस शोध का संचालन करने के लिए वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से दूर गैस के तापमान को मापने के लिए एक नई विधि का इस्तेमाल किया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने उन मापों की तुलना पृथ्वी के करीब और वर्तमान समय में मौजूद गैसों से की।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, ब्रह्मांडीय संरचना के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ब्रह्मांड समय के साथ अधिक गर्म हो रहा है और इसके भविष्य में और बढ़ने की संभावना नजर आ रही है। ब्रह्मांड के तापमान में वृद्धि कैसे हुई, यह देखने के लिए प्लैंक और स्लोअन डिजिटल स्काई सर्वे के डेटा का उपयोग किया गया था। आकाशगंगा और संरचना के गठन की प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण ब्रह्मांड गर्म हो रहा है। दोनों घटनाएं बहुत अलग-अलग पैमाने पर हो रही हैं जो आपस में कोई संबंध नहीं रखती हैं।

ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है और इसकी दर भी बढ़ रही है। चिआंग के अनुसार, जैसे जैसे ब्रह्मांड विकसित होता है, गुरुत्व अंतरिक्ष में डार्क मैटर और गैस को एक साथ गैलेक्सी और गैल्क्सी समूहों में खींचता है। यह खिंचाव प्रचंड होता है कि और ज्यादा गैस जमा होती है और गर्म होती जाती है।

इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने एक नई पद्धति का उपयोग किया जिससे वे पृथ्वी से दूर स्थित गैस का तापमान माप सकें। इसके बाद उन्होंने इन मापन को पृथ्वी और आग के पास स्थित गैस के तापमान के मापन से की। वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि समय के साथ गुरुत्व खगोलीय संरचनाओं के संकुचन के कारण ब्रह्मांड गर्म होता जा रहा है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहने की संभावना है।

बाद में प्लैंक और द स्लोन डिजिटल स्काई सर्वे दोनों ही अभियानों से जुटाए गए आंकड़ों का अध्ययन किया गया और यह समझने का प्रयास किया कि समय के साथ ब्रह्मांड का तापमान कैसे बदला। दोनों अभियानों के आंकड़े मिलाकर वैज्ञानिकों ने पास और दूर की गर्म गैसों को रेडशिफ्ट के जरिए नापा। रेडशिफ्ट के जरिए खगोल भौतिक वैज्ञानिक सुदूर अवलोकित पिंडों की खगोलीय उम्र का आकलन करते हैं।

यहां रेडशिफ्ट की अवधारणा काम करती है क्योंकि जो प्रकाश हम दूर के पिंडों के देखते हैं, वह पृथ्वी के पास के पिंडों से आने वाले प्रकाश से पुराना होता है और लंबी दूरी का सफर तय करते हुए आती है। प्रकाश से तापमान का आकलन कर वैज्ञानिक शुरुआती ब्रह्मांड की गैसों का औसत तापमान माप सके और साथ ही पास के यानि आज के ब्रह्मांड की गैसों का औसत तापमान भी माप सके। चिआंग ने बताया कि ब्रह्मांड गर्म हो रहा है क्योंकि उसकी वजह गैलेक्सी की प्राकृतिक प्रक्रियाएं और संरचना का निर्माण है। इसका पृथ्वी पर गर्मी बढ़ने से कोई लेना नहीं हैं। ये दोनों प्रक्रियाएं अलग पैमानों पर होती हैं। उनका आपस में कोई संबंध नहीं है।

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