किसानों को कृषि कानूनों में संशोधन का सरकारी प्रस्ताव नामंजूर

किसान नेताओं ने नए कृषि कानूनों में संशोधन के सरकार के लिखित प्रस्ताव को बुधवार को खारिज कर दिया और कहा कि वे शनिवार को जयपुर-दिल्ली और दिल्ली-आगरा एक्सप्रेस-वे को बंद करेंगे तथा 14 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कर आंदोलन को तेज करेंगे।

Author नई दिल्‍ली | Updated: December 10, 2020 1:08 PM
movementअपनी मांगों को लेकर धरना- प्रदर्शन करते किसान। फाइल फोटो।

किसान नेताओं ने नए कृषि कानूनों में संशोधन के सरकार के लिखित प्रस्ताव को बुधवार को खारिज कर दिया और कहा कि वे शनिवार को जयपुर-दिल्ली और दिल्ली-आगरा एक्सप्रेस-वे को बंद करेंगे तथा 14 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कर आंदोलन को तेज करेंगे। किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि सरकार के प्रस्ताव में कुछ भी नया नहीं है और ‘संयुक्त किसान समिति’ ने बुधवार को अपनी बैठक में इसे ‘पूरी तरह खारिज’ कर दिया। किसान संघ के नेताओं ने प्रस्ताव को देश के किसानों का अपमान करार दिया। उन्होंने हालांकि कहा कि सरकार अगर वार्ता के लिए नया प्रस्ताव भेजती है तो वे उस पर विचार कर सकते हैं। कक्का ने कहा कि अगर तीनों कृषि कानून रद्द नहीं किए गए तो किसान एक-एक कर दिल्ली की तरफ आने वाले सभी रास्तों को बंद करेंगे।

सरकार और किसान संघ के नेताओं के बीच बुधवार को होने वाली छठे दौर की बातचीत को रद्द कर दिया गया था। किसान नेताओं के मुताबिक उत्तर भारत के सभी किसानों से 14 दिसंबर को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया गया है, जबकि दक्षिण भारत के किसानों से जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि देश के सभी टोल प्लाजा को 12 दिसंबर को ‘टोल-फ्री’ (कर मुक्त) किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ किसानों के 13 प्रतिनिधियों से मुलाकात करने के एक दिन बाद बुधवार को केंद्र की तरफ से किसानों को प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव में सरकार ने कहा था कि वे वर्तमान में लागू न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को जारी रखने के लिए ‘लिखित में आश्वासन’ देने को तैयार हैं।

एक अन्य किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि किसानों ने कानून में प्रस्तावित संशोधन को खारिज कर दिया है, क्योंकि वे कानूनों को निरस्त किए जाने से कम कुछ नहीं चाहते। नए मसविदे में कुछ नया नहीं है जो केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर किसान नेताओं के साथ अपनी पूर्व की बैठकों में कह न चुके हों। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी किसान 14 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी के सभी राजमार्गों को बंद करेंगे और जिला मुख्यालयों के साथ ही भाजपा के जिला कार्यालयों का भी घेराव करेंगे।

किसान नेता जंगवीर सिंह ने कहा, ‘हम अडानी और अंबानी के स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों व सेवाओं का बहिष्कार करेंगे।’ किसान नेताओं ने यह भी मांग की कि एमएसपी तंत्र को कानूनी समर्थन दिया जाए। कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल की तरफ से भेजे गए मसविदा प्रस्ताव में सरकार की तरफ से कहा गया है कि नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों की जो आपत्तियां हैं, उन पर सरकार खुले दिल से विचार करने के लिए तैयार है।

इसमें हालांकि कानून को रद्द करने संबंधी प्रदर्शनकारी किसानों की मुख्य मांग का कोई उल्लेख नहीं है। सरकार ने कम से कम सात मुद्दों पर आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव भी दिया है, जिसमें से एक मंडी व्यवस्था को कमजोर बनाने की आशंकाओं को दूर करने के बारे में है।

कृषि वैज्ञानिक ने पुरस्कार लेने से इनकार किया

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक वरिंदरपाल सिंह ने कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के मौजूदा आंदोलन के समर्थन में उर्वरक उद्योग की संस्था एफएआइ का पुरस्कार केंद्रीय मंत्री के हाथों लेने से इनकार कर दिया। पुरस्कार वितरण समारोह में रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख लाल मांडविया शामिल हुए। पौधों के पोषण से जुड़े कार्य के लिए वरिंदरपाल सिंह फर्टिलाइजर एसोसिएशन आॅफ इंडिया (एफएआइ) के गोल्डन जुबली अवार्ड के संयुक्त विजेता घोषित किए गए थे। पुरस्कार के तहत दो लाख रुपए नकद राशि, एक स्वर्ण पदक और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।

एफएआइ के महानिदेशक सतीश चंद्र ने पुष्टि की है कि सोमवार को वार्षिक समारोह के दौरान सिंह ने पुरस्कार लेने से मना कर दिया। उन्होंने बताया, ‘इस अकादमिक पुरस्कार को लेने से इनकार करना ठीक नहीं था।’ उन्होंने कहा कि विभिन्न श्रेणियों में 34 पुरस्कार दिए गए। वैज्ञानिक वरिंदरपाल सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने एक वीडियो में कहा, ‘संकट के इस समय में जब देश के किसान सड़कों पर हैं, मेरी अंतरात्मा ने यह पुरस्कार स्वीकार करने की मुझे इजाजत नहीं दी।’ पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में मृदा विज्ञान विभाग में प्रधान मृदा रसायनशास्त्री सिंह ने पुरस्कार नहीं स्वीकार करने के लिए खेद भी जताया।

दो किसान भूख हड़ताल पर, एक ने जल त्यागा

गाजीपुर बॉर्डर पर धरने पर बैठे दो किसानों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनमें से एक ने जल भी त्याग दिया है। खुर्जा से यहां पहुंचे ये दोनों किसान मुंह पर पट्टी बांधकर प्रदर्शनकारियों के बीच बैठे हैं। हालांकि उनके ही बीच बैठे दूसरे किसानों ने उनको समझाकर भूख हड़ताल खत्म कराने की कोशिश की, लेकिन दोनों इसके लिए तैयार नहीं है। दोनों का कहना है कि जब तक सरकार नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी, वे अनशन जारी रखेंगे।

गांव फिरोजपुर से आए किसान सुदेश कुमार (72) ने बताया कि गांव में उनकी 35 बीघा जमीन है। अभी के हालात में खेती से परिवार का गुजारा करना भी मुश्किल हो रहा है। नए कृषि कानून से तो किसान बिल्कुल बर्बाद हो जाएगा। सुदेश ने बताया कि भारत बंद के बाद शाम से उन्होंने जल और अन्न दोनों त्याग दिए हैं। भूख हड़ताल पर बैठे दूसरे किसान भूदेव प्रसाद शर्मा (70) ने बताया कि वह एक सप्ताह से अधिक समय से गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद हैं। धरनास्थल पर मौजूद लोग सुदेश और भूदेव को भूख हड़ताल खत्म करने के लिए मनाने में जुटे हुए थे। उनका कहना था कि भूखे रहकर कोई लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। लेकिन सुदेश और भूदेव ने फिलहाल उनकी सलाह नहीं मानी है।

क्या है सरकार का संशोधन प्रस्ताव

मुद्दा-1 : मंडियां कमजोर होंगी और किसान निजी मंडियों के चंगुल में फंस जाएगा।
प्रस्ताव : अधिनियम को संशोधित करके यह प्रावधानित किया जा सकता है कि राज्य सरकार निजी मंडियों के पंजीकरण की व्यवस्था लागू कर सकें। साथ ही ऐसी मंडियों में राज्य सरकार एपीएमसी मंडियों में लागू सेस/शुल्क की दर तक सेस/शुल्क निर्धारित कर सकेगी।
मुद्दा 2 : व्यापारी का पंजीकरण न करके मात्र पैन कार्ड के आधार पर किसान से फसल खरीद से धोखे की आशंका है।
प्रस्ताव : राज्य सरकारों को इस प्रकार के पंजीकरण के लिए नियम बनाने के अधिकार प्रदान किए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार राज्य सरकारें किसानों के हित में नियम बना सकें।
मुद्दा 3 : विवादों के समाधान के लिए किसान के पास सिविल न्यायालय में जाने का विकल्प नहीं है, जिससे न्याय न मिलने की आशंका है।
प्रस्ताव : शंका के समाधान हेतु नए कानूनों में विवाद निराकरण की प्रावधानित व्यवस्था के अतिरिक्त सिविल न्यायालय में जाने का विकल्प भी दिया जा सकता है।
मुद्दा 4 : कृषि अनुबंधों के पंजीकरण की व्यवस्था नहीं है।
प्रस्ताव : जब तक राज्य सरकारें अनुबंधीकरण की व्यवस्था नहीं बनाती हैं तब तक सभी लिखित करारों की एक प्रतिलिपि करार पर दस्तखत के 30 दिन के भीतर संबंधित एसडीएम कार्यालय में उपलब्ध कराने के लिए उपयुक्त व्यवस्था की जाएगी।
मुद्दा 5 : किसान की भूमि पर बड़े उद्योगपति कब्जा कर लेंगे। किसान भूमि से वंचित हो जाएगा।
प्रस्ताव : प्रावधान पूर्व से ही स्पष्ट है। फिर भी यह स्पष्ट कर दिया जाएगा कि किसान की भूमि पर बनाई जाने वाली संरचना पर खरीदार (स्पांसर) किसी प्रकार
का ऋण नहीं ले सकेगा और न ही ऐसी संरचना उसके द्वारा बंधक रखी जा सकेगी।
मुद्दा 6 : किसान की भूमि की कुर्की हो सकेगी।
प्रस्ताव : प्रावधान स्पष्ट है, फिर भी किसी भी प्रकार के स्पष्टीकरण की आवश्यकता हो तो उसे जारी किया जाएगा।
मुद्दा 7 : किसान को अपनी उपज समर्थन मूल्य पर सरकारी एजंसी के माध्यम से बेचने का विकल्प समाप्त हो जाएगा और कृषि उपज का व्यापार निजी हाथों में चला जाएगा।
प्रस्ताव : केंद्र सरकार एमएसपी की खरीदी व्यवस्था के संबंध में लिखित आश्वासन देगी।
मुद्दा 8 : बिजली संशोधन विधेयक, 2020 को समाप्त किया जाए।
प्रस्ताव : किसानों से बिजली वितरण कंपनी द्वारा बिजली बिल भुगतान की मौजूदा व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
मुद्दा 9 : एअर क्वालिटी मैनेजमेंट आफ एनसीआर आॅर्डिनेंस, 2020 को समाप्त किया जाए।
प्रस्ताव : पराली को जलाने से संबंधित प्रावधान एअर क्वालिटी मैनेजमेंट आफ एनसीआर आॅर्डिनेंस, 2020 के अंतर्गत किसानों की आपत्तियों का समुचित समाधान किया जाएगा।
मुद्दा 10 : कृषि सुधार कानूनों को निरस्त करना।
प्रस्ताव : कानून के वे प्रावधान जिन पर किसानों को आपत्ति है, उन पर सरकार खुले मन से विचार करने को तैयार है।

विपक्षी नेता मिले राष्ट्रपति से, कृषि कानूनों को निरस्त करने को कहा

राहुल गांधी, शरद पवार समेत पांच विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से बुधवार को मुलाकात कर नए कृषि कानूनों को रद्द करने की अपील की। विपक्षी नेताओं ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने का अनुरोध किया। नए कृषि कानूनों को लेकर जारी किसानों के आंदोलन के बीच बुधवार को विपक्षी दलों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के महासचिव डी राजा, और डीएमके नेता टीकेएस इलंगोवान शामिल थे।

विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में कहा, ‘भारतीय संविधान का संरक्षक होने के नाते, हम आपसे अनुरोध करते हैं कि अपनी सरकार को हठ छोड़ने और भारत के अन्नदाता की ओर से उठाई गई मांगों को स्वीकार करने के लिए मनाएं।’ ज्ञापन में कहा गया, ‘संसद में बिना ठोस चर्चा और मतदान के अलोकतांत्रिक तरीके से पारित किए गए नए कृषि कानून भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं और इनके कारण भारतीय कृषि एवं हमारे किसान बर्बाद हो जाएंगे। ये कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के उन्मूलन और भारतीय कृषि और हमारे बाजार को कृषि-कारोबार करने वाले बहुराष्ट्रीय और घरेलू कारपोरेट के पास गिरवी रखने का आधार रखेंगे।’

राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कई राज्यों में सरकार चला रहे दलों समेत 20 से अधिक विभिन्न पार्टियों ने किसानों के जारी ऐतिहासिक आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई है और कृषि कानूनों एवं विद्युत संशोधन विधेयक को निरस्त किए जाने की मांग को लेकर आठ दिसंबर को बुलाए गए भारत बंद का पूर्ण समर्थन किया था।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमने राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें तीन कृषि कानूनों के संबंध में हमारे विचारों से अवगत कराया। हमने इन्हें निरस्त किए जाने का अनुरोध किया। हमने राष्ट्रपति को बताया कि इन कानूनों को वापस लिया जाना बेहद महत्त्वपूर्ण है।’ उन्होंने कहा, ‘जिस तरह से ये कानून संसद में पारित किए गए उससे हमें लगता है कि यह किसानों का अपमान है, इसलिए वे ठंड के मौसम में भी प्रदर्शन कर रहे हैं।’

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि नए कानूनों का मकसद कृषि क्षेत्र को ‘प्रधानमंत्री के मित्रों’ को सौंपना है, लेकिन किसान भयभीत नहीं हैं और पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि किसान अपना शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखेंगे। राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति से अुनरोध किया कि ये कृषि कानून निरस्त किए जाने चाहिए क्योंकि इन पर ना ही संसद की प्रवर समिति में चर्चा की गई और ना ही अन्य पक्षकारों के साथ विचार-विमर्श किया गया। विपक्षी नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री इन कानूनों को किसानों के हित में करार दे रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि अगर ये कानून किसानों के हित में हैं तो वे ठंड में प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?

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