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चीन में सर्वे: भारत के बारे में क्या सोच रहे हैं चीनी

ऐसा माना जाता है कि चीनी लोगों को भारत और भारतीय संस्कृति के बारे में बहुत अच्छी समझ नहीं है, लेकिन सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। करीब 56 फीसद से ज्यादा लोगों ने कहा कि उन्हें भारत की स्पष्ट समझ है और 16 फीसद से ज्यादा लोगों ने कहा कि वे भारत से अच्छी तरह परिचित हैं।

अधिकतर चीनी मानते हैं कि वे भारत के बारे में ज्यादा जानते हैं।

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेना के बीच खूनी संघर्ष के तीन महीने बाद चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर सर्वे कराया है। इस सर्वे के परिणामों के आधार पर अखबार ने एक ग्रॉफिक छापा, जिसमें दिखाया कि करीब 51 फीसद चीनियों ने भारत सरकार की प्रशंसा की। हालांकि, बाद में इस ग्रॉफिक को संपादित किया और नए ग्राफिक में मोदी सरकार से संबंधित प्रश्नावली हटा दी।

यह सर्वे इसमें चीन के बेजिंग, वुहान, शंघाई समेत दस बड़े शहरों में कराया गया, जिसमें करीब दो हजार लोगों ने हिस्सा लिया। सर्वे में भारत की छवि, हाल के दिनों में सीमा पर तनाव, भारत में चीनी सामान के बहिष्कार से लेकर दोनों देशों के रिश्तों में अमरीका के हस्तक्षेप पर सवाल पूछे गए। यह सर्वे ग्लोबल टाइम्स ने 17 से 20 अगस्त तक चाइना इंस्टीट्यूट आफ कंटेमपररी इंटरनेशनल रिलेशंस के साथ मिल कर किया।

सर्वे में कहा गया है कि रूस, पाकिस्तान और जापान के बाद भारत-चीन का ‘मोस्ट फेवरेबल’ देश है, लेकिन 90 फीसद चीनी लोगों को लगता है कि भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करनी चाहिए। ग्लोबल टाइम्स के सर्वेक्षण में 70 फीसद चीनी लोगों ने कहा कि भारत में चीन विरोधी सोच बहुत ज्यादा है। 30 फीसद लोगों ने कहा, उन्हें लगता है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधरेंगे। नौ फीसद लोगों ने कहा, उन्हें लगता है कि कम अवधि में संबंधों में सुधार होगा, वहीं 25 फीसद लोगों का मानना था कि लंबी अवधि में संबंधों में सुधार होगा।

करीब 26 फीसद लोग भारत को अच्छे पड़ोसी के तौर पर देखते है। ये लोग भारत को चीन के ‘मोस्ट फेवरेवल नेशन’ में चौथे नंबर पर देखते हैं। पहले तीन पर रूस, पाकिस्तान और जापान को जगह देते हैं। हालांकि, अच्छे पड़ोसियों की सूची में चीन के लोगों ने भारत को दक्षिण कोरिया से ऊपर रखा। इस सर्वे में पाया गया है कि 56 फीसद लोग चीन में भारत के बारे में अच्छी जानकारी रखते है।

इस सर्वे में हिस्सा लेने वाले करीब 25 फीसद लोग मानते हैं कि भविष्य में दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर होंगे, लेकिन 57 फीसद लोगों को लगता है कि भारत सैन्य शक्ति चीन के लिए किसी प्रकार का कोई खतरा है। इस सर्वे में चीन-भारत व्यापार और इससे जुड़े भी सवाल जवाब पूछे गए। 35 फीसद लोग चीन में इस बात से खफा हैं और मानते हैं कि चीन को भी भारत के साथ वैसा ही बर्ताव करना चाहिए। 50 फीसद लोगों को लगता है कि भारत आर्थिक रूप से चीन पर निर्भर है। सर्वे में पता चला कि 23 फीसद लोग भारत की पहचान को योग से ही जोड़कर देखते हैं।

ऐसा माना जाता है कि चीनी लोगों को भारत और भारतीय संस्कृति के बारे में बहुत अच्छी समझ नहीं है, लेकिन सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। करीब 56 फीसद से ज्यादा लोगों ने कहा कि उन्हें भारत की स्पष्ट समझ है और 16 फीसद से ज्यादा लोगों ने कहा कि वे भारत से अच्छी तरह परिचित हैं।

इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज के निदेशक हू शीशेंग ने ग्लोबल टाइम्स से कहा, आधे से ज्यादा लोग भारत को लेकर अपनी समझ को लेकर इसलिए भी आश्वस्त हैं, क्योंकि लोगों के बीच आपसी संबंध हैं और वे भारत के सांस्कृतिक उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ फूडान यूनिवर्सिटी के उप निदेशक लिन मिनवांग ने इस पर अविश्वास जताते हुए कहा, लोग भारत की अपनी समझ को लेकर जितना विश्वास दिखा रहे हैं, वो सच्चाई से बहुत दूर है।

सांस्कृतिक फर्क
चीन के सबसे अच्छे पड़ोसी देशों की सूची में भारत की रैंकिंग दक्षिण कोरिया से ऊपर है, जबकि दक्षिण कोरिया के पॉप कल्चर का चीनी युवाओं पर काफी प्रभाव है। ग्लोबल टाइम्स ने अपनी टिप्पणी में तंज कसते हुए लिखा है कि अधिकतर भारतीय पश्चिम को चीन से ज्यादा बेहतर तरीके से समझते हैं, क्योंकि सांस्कृतिक रूप से दोनों देशों के बीच बहुत फर्क है और आपसी संवाद बहुत ही कम है। दोनों देशों के लोग पूरी तस्वीर देख पाने में असमर्थ हैं।

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