ताज़ा खबर
 

परमाणु ऊर्जा के खजाने तक पहुंच

चांद को फतह कर चुके अमेरिका, रूस और चीन ने अभी तक इस जगह पर कदम नहीं रखा है। चंद्रमा के इस भाग के बारे में अभी बहुत जानकारी भी सामने नहीं आ पाई है। भारत के चंद्रयान एक अभियान के दौरान दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के बारे में पता चला था।

Author Published on: July 23, 2019 6:53 AM
चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के साथ ही वैज्ञानिकों में भविष्य की दो बड़ी संभावनाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

दीपक रस्तोगी

चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के साथ ही वैज्ञानिकों में भविष्य की दो बड़ी संभावनाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। अपने इस मिशन में भारत ने खनिजों और ऊर्जा के जिस अकूत भंडार की तलाश शुरू की है, उससे दुनिया बदल जाएगी। वहां से चांद पर इंसान के बसने की जमीन भी तैयार होेने लगेगी। चांद के जिस दक्षिणी ध्रुव पर आज तक कोई नहीं पहुंचा है, वहां पहुंचने के लिए भारत ने सोमवार को छलांग लगाई है। चंद्रयान एक मिशन से मिली जानकारियों को आगे बढ़ाते हुए नया मिशन है। संभव है कि भारत का चंद्रयान-2 चांद के कुछ और अनछुए पहलुओं पर से पर्दा उठा दे, जिसके बारे में वह मशहूर बात दोहराई जाए, ‘यह मानवता के लिए बहुत बड़ा कदम है।’

अकूत खजाने तक पहुंचेगा चंद्रयान
साफ और सुरक्षित ऊर्जा के लिए तरस रही दुनिया के लिए भारत का चंद्रयान-2 मिशन नई उम्मीद है। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखने के बाद अपना यान ऐसे अनमोल खजाने की खोज में जुटेगा, जिससे न केवल अगले पांच सौ साल तक ऊर्जा की जरूरत पूरी होगी, बल्कि, खरबों डॉलर की कमाई भी होगी। यह ऊर्जा न केवल सुरक्षित होगी, बल्कि तेल, कोयले और परमाणु कचरे से होने वाले प्रदूषण से मुक्त होगी। चंद्रमा का दक्षिण ध्रुव इलाका औद्योगिक उत्खनन के लिए मुफीद जगहों में से एक है। यहां रेडियोधर्मी तत्व हीलियम-3 खोज की जाएगी। चंद्रमा से 2,50,000 टन हीलियम-3 लाया जा सकता है, जिसकी कीमत कई खरब डॉलर हो सकती है। एक टन हीलियम-3 की कीमत करीब 5 अरब डॉलर हो सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्रमा पर हीलियम-3 के आइसोटोप (समस्थानिक) प्रचुर मात्रा में हैं। सूर्य की तरफ से चलने वाली हवाएं चंद्रमा पर लगातार हीलियम-3 की बरसात करती रहती हैं। ये हवाएं हमारी धरती पर भी आती हैं, लेकिन पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र इन हवाओं से हमारे वातावरण को बचा लेता है।

दक्षिणी ध्रुव पर ही क्यों चंद्रयान-2
चांद को फतह कर चुके अमेरिका, रूस और चीन ने अभी तक इस जगह पर कदम नहीं रखा है। चंद्रमा के इस भाग के बारे में अभी बहुत जानकारी भी सामने नहीं आ पाई है। भारत के चंद्रयान एक अभियान के दौरान दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के बारे में पता चला था। तभी से चांद के इस हिस्से के प्रति दुनिया के देशों की रुचि जगी है। दक्षिणी ध्रुव पर उतरकर भारत दूसरे देशों पर बढ़त हासिल कर लेगा। इसकी सतह का बड़ा हिस्सा चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव की तुलना में अधिक छाया (शैडो) में रहता है। इस हिस्से में पानी भी हो सकता है। यहां ठंडे क्रेटर्स (गड्ढों) में प्रारंभिक सौर प्रणाली के लुप्त जीवाश्म रिकॉर्ड मौजूद हैं। चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर दो ऐसे क्रेटर्स – ‘मंजिनस सी’ और ‘सिमपेलियस एन’ के बीच वाले मैदान में लगभग 70 डिग्री दक्षिणी अक्षांश पर उतरेंगे।

नासा के मुकाबले 10 गुना कम बजट
अमेरिका ने पिछले कुछ साल में चंद्रमा संबंधी शोध से अपना ध्यान हटा लिया था। चंद्रमा के प्रति दुनिया के दूसरे देशों की दिलचस्पी को देखते हुए यह देश एक बार फिर इस दिशा में बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में अपने अंतरिक्ष विज्ञानियों को एक बार फिर से चंद्रमा पर ध्यान देने को कहा है। इस क्रम में अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान एजंसी नासा ने 19 अरब रुपए का प्रस्ताव सरकार को दिया। ट्रंप ने इसे मंजूरी दे दी है। नासा ने वर्ष 2020 में ल्यूनर आॅर्बिटर यान को चांद पर भेजने की योजना बनाई है। तुलनात्मक रूप से भारत सरकार का चंद्रमा मिशन इससे कई गुना कम खर्चीला है। इसरो ने चंद्रयान-2 के लिए 1.7 अरब का बजट सरकार को दिया था।

अंतरिक्ष आर्थिकी में आएगा उछाल
विशेषज्ञों के मुताबिक चांद पर हीलियम-3 के उत्खनन की प्रक्रिया अगर शुरू हो गई तो मौजूदा अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था चार सौ अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2040 तक एक खरब डॉलर तक पहुंच जाएगी। भारत चंद्रयान-2 के कुछ समय पहले ही अंतरिक्ष में उपग्रह रोधी मिसाइल का परीक्षण किया है और डिफेंस स्पेस एजंसी और डिफेंस स्पेस आॅर्गनाइजेशन का गठन किया है। हीलियम-3 के चंद्रमा के भंडार पर भारत की नजर काफी पहले से है। वर्ष 2006 में इसरो के तत्कालीन चेयरमैन माधवन नायर ने कहा था कि हीलियम-3 से भविष्य में परमाणु रिएक्टर चलाए जा सकेंगे। लेकिन पहले इनकी गुणवत्ता देखनी होगी।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 नितिन गडकरी ने माना, सड़क हादसों को रोकने में नाकाम रहा विभाग
2 लोकसभा से RTI संशोधन बिल को हरी झंडी, विपक्ष का आरोप- कानून को कमजोर करना चाहती है सरकार
3 अल्पसंख्यकों को हथियारों को लाइसेंस देने की पैरवी, समर्थन में कांग्रेस? संत समाज भड़का