सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने रविवार को कहा कि केवल अकादमिक ज्ञान विधि पेशे के लिए पर्याप्त नहीं है और मूट अदालत प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियां अधिवक्ताओं के कौशल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वह निर्मल लूथरा फाउंडेशन के सहयोग से दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘कैंपस लॉ सेंटर’ द्वारा आयोजित के.के. लूथरा मेमोरियल मूट अदालत प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थीं।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि कक्षा में प्राप्त कानून का केवल अकादमिक ज्ञान आपको (विधि के छात्रों को) विधि पेशे के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं कर सकता। मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियों में भाग लेने से यह कमी सक्रिय रूप से दूर होती है, जहां छात्रों को अपनी आलोचनात्मक सोच, पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमताओं को निखारने का अवसर मिलता है।
यह भी पढ़ें- ‘स्क्रिप्टेड और हताशा भरी PR एक्सरसाइज’, पीएम मोदी के इंटरव्यू पर कांग्रेस का हमला
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीव्र विकास को रेखांकित करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि विधि के छात्र भाग्यशाली हैं, क्योंकि कृत्रिम मेधा (AI) ने लिपिकीय कार्यों के स्वचालन में मदद की है और यह प्रश्नों के त्वरित उत्तर प्रदान करती है।
जस्टिस नागरत्ना ने प्रतियोगिता में केवल महिलाओं की टीम की उपस्थिति की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि भले ही यह धारणा प्रचलित हो कि विधि क्षेत्र में पहले से ही बहुत अधिक प्रतिस्पर्धा है और पहले से स्थापित लोगों को छोड़कर किसी के लिए भी सफलता पाना मुश्किल है, लेकिन मैं कहना चाहूंगी कि आप सभी का विधि पेशे में स्थान है और आप सभी पर्याप्त अवसर प्राप्त करने में सक्षम हैं।
यह भी पढ़ें- बांग्लादेश में बीएनपी को मिले 50 प्रतिशत वोट, जमात सिर्फ 31 प्रतिशत पर अटकी
