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दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस में ABVP ने रातों रात लगवा दी सावरकर-बोस-भगत सिंह की मूर्ति!

एनएसयूआई की दिल्ली ईकाई के अध्यक्ष अक्षय लाकरा ने एबीवीपी के कदम की आलोचना की। उन्होंने कहा, ''आप सावरकर को भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के साथ नहीं रख सकते। अगर प्रतिमाएं 24 घंटे के भीतर नहीं हटाई गईं तो हम विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।’

DUजिस आर्ट फैकल्टी के गेट पर मूर्तियां लगाई गईं हैं, उसके गार्ड का कहना है कि रात 2 बजे के करीब एक मिनी ट्रक पहुंचा। ट्रक गेट के बाहर खड़ा किया गया और वहां कई एबीवीपी कार्यकर्ता मौजूद थे। मूर्ति को एक तंबू जैसी चीज से घेरकर रखा गया था, जिसे सुबह साढ़े 9 बजे हटाकर मूर्ति लगा दी गई। (फोटो सोर्स- Abhinav Saha)

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव से ऐन पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैम्पस स्थित आर्ट फैकल्टी के गेट पर बिना मंजूरी वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की प्रतिमा लगाई है। एबीवीपी के इस कदम की कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और लेफ्ट समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) ने आलोचना की है।

मंगलवार सुबह छात्रों, अध्यापकों और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारियों ने ये मूर्तियां देखीं। बताया जा रहा है कि इसे रातों रात लगा दिया गया। जिस आर्ट फैकल्टी के गेट पर इसे लगाया गया है, उसके गार्ड का कहना है कि रात 2 बजे के करीब एक मिनी ट्रक पहुंचा। ट्रक गेट के बाहर खड़ा किया गया और वहां कई एबीवीपी कार्यकर्ता मौजूद थे। मूर्ति को एक तंबू जैसी चीज से घेरकर रखा गया था, जिसे सुबह साढ़े 9 बजे हटाकर मूर्ति लगा दी गई।

छात्र संगठनों का कहना है कि सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह के साथ सावरकर को नहीं रखा जा सकता। एबीवीपी नेतृत्व वाले विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष शक्ति सिंह ने बताया कि उन्होंने कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रतिमा स्थापित करने की मंजूरी मांगने के लिए संपर्क किया लेकिन कोई जवाब नहीं आया।

सिंह ने कहा, ”प्रतिमा स्थापित करने की इजाजत के लिए हमने पिछले साल नवंबर में प्रशासन से संपर्क किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मैंने दोबारा नौ अगस्त को मंजूरी देने का अनुरोध किया लेकिन फिर कोई जवाब नहीं आया। उनकी चुप्पी की वजह से हम यह कदम उठाने को मजबूर हुए हैं।” छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि अगर प्रशासन प्रतिमा हटाने की कोशिश करता है तो वह इसका विरोध करेंगे।

वहीं, एनएसयूआई की दिल्ली ईकाई के अध्यक्ष अक्षय लाकरा ने एबीवीपी के कदम की आलोचना की। उन्होंने कहा, ”आप सावरकर को भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के साथ नहीं रख सकते। अगर प्रतिमाएं 24 घंटे के भीतर नहीं हटाई गईं तो हम विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।’ वहीं, आईसा की दिल्ली ईकाई की अध्यक्ष कवलप्रीत कौर ने भी लाकरा के बयान का समर्थन किया।

कौर ने कहा, ”भगत सिंह और सुभाष चंद्र की आड़ में वो सावरकर के विचारों को वैधता देने का प्रयास कर रहे हैं। यह स्वीकार्य नहीं है। जिस स्थान पर उन्होंने मूर्तियां लगाई हैं, वह निजी संपत्ति नहीं है बल्कि सार्वजनिक जमीन है।” बता दें कि जिस स्थान पर प्रतिमा लगाई गई है वह उत्तर दिल्ली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव अगले महीने होने हैं। हालांकि अब तक तारीख का ऐलान नहीं किया गया है।

(भाषा इनपुट्स के साथ)

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