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सुप्रीम कोर्ट ने दी व्‍यवस्‍था- अपशब्‍द कहना आत्‍महत्‍या के लिए उकसाना नहीं

आरोपी अर्जुन ने मृतक राजगोपाल को 80 हजार रुपए दिए थे। राजगोपाल को कर्ज चुकाने की स्थिति में न देख अर्जुन ने उसे अपशब्द कहे। इससे खुद को अपमानित कर राजगोपाल ने आत्महत्या कर ली थी।

Author December 30, 2018 1:24 PM
अदालत ने मृतक के द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट भी खारिज कर दिया। (फोटो सोर्स : Indian Express)

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए व्यक्ति की तीन साल की सजा खत्म कर मुक्त कर दिया। व्यक्ति पर आत्महत्या के लिए उसकावे का आरोप था। इस पर उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था देते हुए कहा कि, अपशब्द कहना किसी को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं हो सकता है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने मृतक के द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट भी खारिज कर दिया।

आरोपी अर्जुन ने आत्महत्या कर चुके रोजगोपाल को 80 हजार रुपए दिए थे। इन रुपयों को चुकाने में वह काफी समय लगा रहा था। इससे तंग आकर राजगोपाल को कर्ज चुकाने की स्थिति में न देख अर्जुन ने उसे अपशब्द कहे। इससे खुद को अपमानित महसूस करने के कारण राजगोपाल ने आत्महत्या कर ली। राजगोपाल ने मरने से पहले सुसाइड नोट भी छोड़ा था। जस्टिस आर भानुमति और इंदिरा बनर्जी की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। इसी पर पीठ ने व्यवस्था देते हुए कहा कि, अपशब्द कहकर किसी को अपनामित करना उसके आत्महत्या का कारण नहीं हो सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने सुसाइड नोट भी खारिज कर दिया।

सुसाइड नोट में मृतक राजगोपाल ने लिखा था कि, वह अर्जुन से लिया कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं है। इस कारण वह यह फैसला ले रहा है। इसी के आधार पर आरोपी अर्जुन को ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया था। कोर्ट ने अर्जुन को तीन साल जेल की सजा सुनाई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि इससे यह साबित नहीं होता होता कि आरोपी ने किसी मंशा के तहत ऐसा किया हो। साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

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