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6 वीक और 6 चेक, रिलायंस जियो ने लॉकडाउन में भी जुटाई भारी पूंजी, जानें- क्या है रणनीति

मुबादाला दुनिया की छठी कंपनी होगी, जिसने हाल के दिनों में जियो प्लेटफॉर्म में हिस्सेदारी खरीदी है। जियो की इक्विटी वैल्यू 4.91 लाख करोड़ और एंटरप्राइजेज वैल्यू करीब 5.16 लाख करोड़ रुपए है।

mukesh ambani, investment, reliance companyजियो में कई बड़ी निवेशक कंपनियां निवेश कर चुकी हैं।

लॉकडाउन के दौरान देश की लगभग सभी कंपनियों की आर्थिक स्थिति खराब हुई है लेकिन रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने इस मुश्किल वक्त में भी निवेश के जरिए भारी पूंजी जुटायी है। बता दें कि अबु धाबी स्थित निवेशक कंपनी मुबादाला इन्वेस्टमेंट कंपनी (Mubadala Investment Company) जियो प्लेटफॉर्म में 1.85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी। इसके लिए मुबादाला 9,093.60 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। मुबादाला दुनिया की छठी कंपनी होगी, जिसने हाल के दिनों में जियो प्लेटफॉर्म में हिस्सेदारी खरीदी है। जियो की इक्विटी वैल्यू 4.91 लाख करोड़ और एंटरप्राइजेज वैल्यू करीब 5.16 लाख करोड़ रुपए है।

मुबादाला इन्वेस्टमेंट कंपनी के निवेश पर रिलायंस के एमडी और चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने अपने एक बयान में कहा है कि “मुझे खुशी है कि मुबादाला, जो कि दुनिया की सबसे परिवर्तनकारी इन्वेस्टमेंट कंपनी है, उसने भारत की डिजिटल ग्रोथ को गति देने और भारत को दुनिया में एक डिजिटल राष्ट्र बनाने की जियो की यात्रा में सहभागी बनने का फैसला किया है।”

इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मुबादाला और जियो की डील को अभी रेगुलेटरी अप्रूवल मिलना बाकी है। एनालिस्टस का कहना है कि रिलायंस ने जियो प्लेटफॉर्म में हिस्सेदारी बेचकर करीब 85,000-90,000 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल फेसबुक, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक और केकेआर को जियो में हिस्सेदारी बेचकर रिलायंस करीब 78,562 करोड़ रुपए जुटा चुकी है। अब मुबादाला को हिस्सेदारी बेचने के बाद रिलायंस जियो में विदेशी हिस्सेदारी 18.97 फीसदी हो जाएगी और इससे रिलायंस को कुल 87,655 करोड़ रुपए की पूंजी मिलेगी।

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मार्च, 2021 तक खुद को कर्ज मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।  रिलायंस पर अभी कुल कर्ज 3.36 लाख करोड़ रुपए है। मुबादाला और जियो की डील की रिलायंस इंडस्ट्रीज के वित्तीय सलाहकार मॉर्गन स्टेनली और AZB एंड पार्टनर्स हैं। वहीं डेविस पोल्क और वार्डवेल इस डील में कानूनी सलाहकार हैं।

बता दें कि रिलायंस की कोशिश है कि जियो प्लेटफॉर्म को डिजिटल ईकाई एल्फाबेट और टेंनसेंट की तरह विकसित किया जाए। यही वजह है कि रिलायंस जियो को वैश्विक स्तर पर फैलाना चाहते हैं। मुकेश अंबानी अपना पेट्रोकेमिकल का व्यवसाय समेट रहे हैं। इसके तहत रिलायंस और सऊदी अरब की कंपनी अरामको के बीच ऑयल टू केमिकल बिजनेस की 15 बिलियन डॉलर की डील पर बातचीत हो रही है। वहीं रिलायंस ने अपने फ्यूल रिटेल बिजनेस का आधा हिस्सा BP Plc को 7000 करोड़ रुपए में बेच दिया है। इसके अलावा अपने टेलीकम्यूनिकेशन बिजनेस टावर को भी रिलायंस ने ब्रुकफील्ड को 25,000 करोड़ रुपए में बेच दिया है।

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