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राम मंदिर जमीन विवादः मैं भी राम भक्त हूं, आप मुझे तो संतुष्ट नहीं कर पा रहे- बोले एंकर, देखें- अयोध्या के मेयर ने क्या दिया जवाब?

मेयर ऋषिकेश बोले, "प्रभाव के बल पर जमीन खरीदी जाती है क्या। कानून बना है, सहमति और संवाद से जमीन खरीदी जाती है। अगर प्रभाव के बल पर ही होता तो हमारी सरकार है, हम किसानों को भगा चुके होते।"

अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि ट्रस्ट के जमीन सौदे पर विवाद बढ़ता जा रहा है। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर बनवाने के लिए केंद्र सरकार के गठित ट्रस्ट से संबंधित विवादास्पद जमीन सौदे पर लगातार राजनीति जारी है। इसका विवाद गहराता जा रहा है। एक तरफ आम आदमी पार्टी के नेता संजय इसमें भारी गोलमाल का आरोप लगा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसको राजनीति से प्रेरित बताते हुए बदनाम करने की कवायद कह रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर जमीन बिक्री में गवाह बने अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय से एबीपी न्यूज चैनल पर एंकर विकास भदौरिया ने बात की।

एंकर विकास भदौरिया ने पूछा कि पिछले किसी भी एग्रीमेंट में रवि मोहन तिवारी का नाम नहीं था। इसमें अचानक उनका नाम कैसे आ गया। इस पर मेयर ऋषिकेश उपाध्याय का कहना है कि “रविमोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी के पिता जी सारे एग्रीमेंट में गवाह हैं। आप पीछे के पेपर पलट लीजिए, देख लीजिए।” कहा, “तब तो सुल्तान अंसारी के पिता के नाम एग्रीमेंट था तो क्या पिता की जगह पुत्र नहीं आ सकते हैं? पिता की जगह पुत्र और पुत्र की जगह पिता नहीं जा सकता है?

विकास ने पूछा कि उस जमीन में ऐसा क्या था कि दो करोड़ की जमीन आप हर हाल में खरीदना चाहते हैं। अयोध्या के आस-पास तो बहुत सी ऐसी जमीनें हैं। इन जमीनों को आप खरीद सकते हैं पुनर्वास के लिए या अन्य काम के लिए ले सकते हैं। उसकी को दस मिनट में क्यों ले लिए हैं?

ऋषिकेश ने कहा, “ये दस मिनट की बात ही नहीं है, यह दस वर्षों से अधिक की बात है। अयोध्या के फैसले के बाद जमीनों के रेट में कितना परिवर्तन आया है, यह आप भी जानते हैं। आप इसका पता भी करवा लीजिए।” विकास ने कहा आप ऐसी जमीन भी खऱीद सकते थे, जिसमें कोई विवाद ही न हो। ऋषिकेश ने कहा हमारा काम रुका हुआ था। वहां कौशल्या भवन और फकीरे राम को शिफ्ट करना था। यहां पर आपके जो लोग हैं, आप उनसे पूछिए। इसके बाद कोरोना आ गया। आपके चैनल के लोग यहां आकर वहां जाएं और पूछें कि उसके पीछे की जमीनों के क्या रेट हैं?

विकास ने पूछा कि क्या यह रजिस्ट्री आपके घर पर हुई थी या रजिस्ट्रार आफिस में हुई थी। इस पर ऋषिकेश ने कहा, “जो लोग यह सवाल उठा रहे हैं, उनसे कहिए, अगर उतने पैसे में वे थोड़ी सी भी जमीन दिला दें तो उनका नागरिक अभिनंदन अयोध्या में किया जाएगा। जितनी भी जमीनें हैं, अगर दो करोड़ के रेट में दिला दें, तो ट्रस्ट जमीन खरीद लेगा, साथ में उनका अभिनंदन भी करेगा।”
विकास ने फिर पूछा कि यह रजिस्ट्री आपके घर पर हुई थी या रजिस्ट्रार आफिस में हुई थी।

ऋषिकेश ने कहा, “हमारे घर पर क्यों होगी।” विकास ने कहा कि विपक्ष ने आरोप लगाया है। ऋषिकेश ने कहा, “अगर विपक्ष की बात ही माननी है तो वो तो कह रहे हैं कि 500 लोगों की लाशें गंगा में बह रही थी, जांच में पता चला कि वह 2011 की तस्वीरें है।”

एंकर विकास भदौरिया ने कहा, “मैं भी राम भक्त हूं, आप मुझे तो संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं। आप अयोघ्या के मेयर हैं, आप जिनके नाम एग्रीमेंट है उनसे कहिए कि आप एग्रीमेंट तोड़ दीजिए। हम सीधे कुसुम पाठक और हरीश पाठक जी से जमीन खरीद लेंगे।”
ऋषिकेश बोले, “क्या प्रभाव के बल पर जमीन खरीदी जाती है क्या। कानून बना है, सहमति और संवाद के बल पर जमीन खरीदी जाती है। अगर प्रभाव के बल पर ही होता तो हमारी सरकार है, हम किसानों को हम भगा चुके होते। सारी जमीन संवाद और सहमति से ही ट्रस्ट ने ली है। कोई भी जमीन 15 मिनट में नहीं ली गई है।”

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