तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सांसद काकोली घोष दस्तीदार को रसायन और उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाए जाने पर आपत्ति जताई।

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार टीएमसी के उन 20 सांसदों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ दसवीं अनुसूची के तहत स्पीकर के पास अयोग्यता की याचिकाएं लंबित हैं।

नियुक्ति के लिए विचार-विमर्श से बाहर रखा जाए- अभिषेक बनर्जी

पत्र में टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा, “23 दिसंबर को लिखे अपने पत्रों में मैंने साफ तौर पर आग्रह किया था कि जब तक याचिकाओं पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक इन सदस्यों को डीआरएससी (विभाग-संबंधी स्थायी समितियों) में नियुक्ति के लिए विचार-विमर्श से बाहर रखा जाए।”

अभिषेक बनर्जी ने फिर से कहा कि अपनी पिछली बातचीत में पार्टी ने औपचारिक रूप से लोकसभा में एक स्थायी समिति की अध्यक्षता अपने पास बनाए रखने का अनुरोध किया था और मौजूदा अध्यक्ष को ही बनाए रखने के लिए अपना नामांकन भी सौंपा था। उन्होंने कहा कि हालिया नियुक्ति पार्टी की साफ आपत्तियों और उसके आधिकारिक नामांकन, दोनों को दरकिनार करती है।

प्रक्रिया में गड़बड़ी की ओर इशारा

प्रक्रिया में गड़बड़ियों की ओर इशारा करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा, “डिजिटल संसद वेबसाइट पर अभी भी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सदस्या दिखाए जा रहे हैं। हालांकि नियुक्त सदस्य नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से जुड़े होने का दावा करते हैं। यह दावा एक कथित विलय पर आधारित है, जिस पर अयोग्यता की लंबित कार्यवाही में विवाद चल रहा है।”

अभिषेक बनर्जी ने NCPI संबद्धता पर भी सवाल उठाया जिसके तहत चेयरमैनशिप दी गई थी। उन्होंने लिखा, अगर यह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को दी गई थी, तो पार्टी की स्पष्ट इच्छा के खिलाफ उसके नॉमिनी को किस आधार पर बदला गया? अगर यह NCPI को दी गई थी, तो किस आदेश के तहत उस संबद्धता को मान्यता दी गई और किस आधार पर NCPI को चेयरमैनशिप दी गई?”

विवादित है संबद्धता

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जब तक अध्यक्ष के पास कार्यवाही लंबित है, तब तक NCPI का नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के साथ बताया जा रहा जुड़ाव दसवीं अनुसूची के तहत संबद्धता के मुद्दे को हल नहीं कर सकता।

टीएमसी राष्ट्रीय महासचिव ने कहा, “किसी सदस्य को चेयरमैन बनाना, जबकि उस सदस्य की विवादित संबद्धता (affiliation) पर कोई फैसला न हुआ हो, हमारी राय में संसदीय मर्यादा के खिलाफ है। इस नियुक्ति को AITC को दी गई चेयरमेनशिप नहीं माना जा सकता।”

अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर से अपील की कि वे काकोली घोष दस्तीदार की नियुक्ति रद्द करें, कमेटी की चेयरमेनशिप टीएमसी के सही तरीके से नॉमिनेट किए गए सदस्य को वापस सौंपें और अयोग्यता से जुड़ी लंबित याचिकाओं पर जल्द फैसला लें।

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