लखीमपुर हिंसा को लेकर पत्रकार अमिश देवगन और अभिसार शर्मा के बीच हुई जोरदार बहस, दोनों ने एक दूसरे को बताया ‘एजेंडाबाज’

लखीमपुर खीरी की हिंसा में जान गंवाने वालों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि इनमें से किसी की भी मौत गोली लगने से नहीं हुई है।

Abhisar Sharma, Amish Devgan
अभिसार शर्मा-अमिश देवगन

लखीमपुर खीरी में हिंसा को लेकर जहां विपक्षी दल केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, तो वहीं मीडिया जगत में भी इस मामले को लेकर जोरदार बहस देखने को मिल रही है। न्यूज एंकर अमिश देवगन और अभिसार शर्मा ने ट्विटर पर एक दूसरे को एजेंडाबाज बताया। दरअसल अमिश देवगन ने एक फोटो शेयर कर लिखा कि, “आतंकवादी भिंडरावाले के T-shirt कौन किसान पहनता है? सच सामने आना चाहिये।”

इसको रिट्वीट करते हुए अभिसार शर्मा ने एक गाड़ी का वीडियो शेयर किया। जिसको लेकर कहा जा रहा है कि इसी गाड़ी से लखीमपुर खीरी में किसानों को कुचला गया है। अभिसार ने लिखा कि, “हिम्मत दिखाओ अमिश। ये वीडियो अपने चैनल पर दिखाओ। सिर्फ एक बार।”

वहीं अभिसार को जवाब देते हुए अमिश देवगन ने कहा कि, “इसमें हिम्मत की नहीं पत्रकारिता की धर्म की ज़रूरत है जो तुम्हारे एजेंडा में फ़िट नहीं है। हर वीडियो चल रहा है।”

एजेंडे की बात अभिसार शर्मा ने पलटवार करते हुए लिखा, “खैर तुमसे तो पत्रकारिता की भी बात नहीं की जा सकती। ये बताओ, आज से एक साल पहले तुमने चीख चीख कर कहा था कि तब्लीग के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। वो प्रमाण तुमने पुलिस को दिए? क्या तुम्हारे चैनल ने कोई follow up किया? सच ये है कब तुम एजेंडाबाज़ हो और सत्ता के। शर्म करो।”

हिंसा में मारे गए लोगों की आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट: आपको बता दें कि लखीमपुर खीरी की हिंसा 4 किसानों समेत 8 लोगों की जान गई। इस मामले में मंगलवार को आई मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पता चला है कि, सभी आठ लोगों की मौत चोट लगने, घसीटने, खून के ज्यादा बह जाने और ब्रेन हैमरेज के कारण हुई है। इनमें से किसी को भी गोली नहीं लगी है। वहीं मरने वाले किसानों की पहचान छत्र सिंह, दलजीत सिंह, लवप्रीत सिंह और गुरविंदर सिंह के रूप में हुई है।

इस हिंसा में किसानों के अलावा भाजपा कार्यकर्ता भी मारे गए हैं। जिसमें शुभम मिश्रा के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले हैं। वहीं हरिओम मिश्रा की मौत लाठी से हमला करने पर हुई। उनके शरीर पर भी चोट के कई निशान हैं। मौत का एक कारण ब्रेन हैमरेज भी बताया जा रहा है। इसके अलावा श्यामसुंदर निषाद की भी लाठी-डंडे से पीटने और घसीटने से जान गई। स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप के शरीर पर भी चोट के कई निशान पाए गए हैं। इनकी मौत भी शॉक और ब्रेन हैमरेज के कारण हुई है।

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