ताज़ा खबर
 

सम-सामयिक- ‘कफाला’ प्रणाली : बदलाव से होगा भारतीयों को फायदा

दूसरे देश से सऊदी अरब आकर नौकरी करने वाले मजदूर के पास उत्पीड़न से बचने के अवसर नहीं के बराबर होते हैं। इसका कारण है कि उसके पास नौकरी छोड़कर दूसरी जगह या फिर देश से बाहर निकलने के लिए अपने नियोक्ता से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बिना नियोक्ता की आज्ञा के वह नौकरी नहीं बदल सकता है और न ही वापस जा सकता है।

Updated: November 10, 2020 11:57 AM
सऊदी अरब सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए श्रम कानून में परिवर्तन किया है इससे भारतीय मजदूरों को भी लाभ होगा। फाइल फोटो।

सऊदी अरब ने दूसरे देशों से वहां जाकर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को लेकर बड़ा एक फैसला लिया है। इस फैसले से वहां काम करने वाले लाखों भारतीय कामगारों को भी फायदा होगा। इसके तहत कामगारों की जिंदगी में नियोक्ताओं (नौकरी देने वाले व्यक्ति या कंपनी) का नियंत्रण कम हो जाएगा। नए नियम मार्च 2021 से लागू होंगे।

सऊदी अरब के मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय के मुताबिक, इन सुधारों के बाद अब निजी क्षेत्र में काम कर रहे मजदूर अपने मालिक की मर्जी के बिना नौकरी बदल सकते हैं और देश छोड़ कर जा सकते हैं। सऊदी सरकार का कहना है कि उसकी कोशिश है कि मजदूरों की क्षमता बढ़ाई जाए और काम के माहौल को और बेहतर बनाया जाए।

इन सुधारों के तहत विदेशी कर्मचारियों को एक जगह से दूसरी जगह काम करने का अवसर मिलेगा। नौकरी छोड़ने और देश में फिर से प्रवेश करने की अनुमति भी दी जाएगी। इसके अलावा कामगारों का जो अपने नियोक्ताओं के साथ सेवा अनुबंध (सर्विस कॉन्ट्रैक्ट) है, वह भी आॅनलाइन होगा। इन सुधारों की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी।

वहां के उप मंत्री अब्दुल्ला बिन नासिर अबुथनैन ने कहा कि हम देश में बेहतर श्रम बाजार और कामगारों के लिए अच्छे काम का माहौल बनाना चाहते हैं। श्रम कानूनों में इन बदलावों से ‘विजन 2030’ के उद्देश्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके तहत सऊदी अरब तेल पर अपनी निर्भरता कम कर दूसरे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहता है।

वर्ष 2022 में फीफा विश्व कप की मेजबानी करने की तैयारी कर रहे कतर ने हाल में अपने श्रम कानूनों में भी ऐसे ही बदलाव किए हैं। कानूनों में बदलाव से मजदूरों की स्थिति सुधरेगी लेकिन पूरी तरह से कफाला प्रणाली बंद करने के अभी संकेत नहीं मिले हैं। प्रवासी मजदूर अभी भी एक नियोक्ता के जरिए ही पहुंच रहे हैं। ऐसे में नियोक्ताओं का प्रवासी मजदूरों पर पूरा नियंत्रण होगा।

दरअसल, सऊदी अरब की कफाला प्रणाली के तहत श्रमिकों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। सीधे शब्दों में कहें तो दूसरे देश से आकर यहां नौकरी करने वाले मजदूर के पास उत्पीड़न से बचने का कोई रास्ता नहीं होता। वह अपनी मर्जी से नौकरी नहीं छोड़ सकते, देश से बाहर जाने के लिए भी उन्हें अपने नियोक्ता से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बिना नियोक्ता की अनुमति के वह नौकरी बदल सकते हैं और न ही वापस जा सकते हैं। इतना ही नहीं कई नियोक्ता अपने मजदूरों के पासपोर्ट तक भी जब्त कर लेते हैं और आसानी से लौटाते भी नहीं हैं।

सऊदी अरब ने घोषणा की थी कि वो कफाला प्रणाली के तहत लगाई जाने वाली कुछ पाबंदियों को हटाएगा, जिससे मजदूरों के जीवन पर नौकरी देने वाले व्यक्ति या कंपनी का नियंत्रण कम हो जाएगा। बदलाव से एक करोड़ विदेशी मजदूरों के जीवन पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, विदेशी कर्मचारियों के मामले में उनके नियोक्ता को कानूनी अधिकार मिले हुए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता हमेशा से इस प्रणाली को मजदूरों के शोषण या उत्पीड़न का जिम्मेदार मानते रहे हैं।

Next Stories
1 शोध: स्वदेशी सुपरकंप्यूटर के उत्पादन की तैयारी में भारत
2 जानें-समझें: अमेरिका में बाइडेन-हैरिस, भारत के लिए कितनी मुफीद सियासी जोड़ी
3 कोरोना वैक्सीन ट्रायल के शुरुआती नतीजे 90 फीसदी से ज्यादा असरदार, बोली दवा कंपनी Pfizer
आज का राशिफल
X