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कमाए गए 99 हजार जेल में दान कर 1417 द‍िन बाद बाहर आए आरुष‍ि के माता-प‍िता

हाई कोर्ट ने तलवार दंपति को आरुषि-हेमराज हत्याकांड में सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए बरी कर दिया था।

चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया था।

आरुषि-हेमराज की हत्या के आरोप में पिछले चार साल से जेल में बंद डॉ. राजेश तलवार और नूपुर तलवार सोमवार हो रिहा गए। तलवार दंपति ने 1417 दिन डासना जेल में काटे हैं, इस दौरान दोनों ने कुल 99 हजार रुपए काम करके कमाए हैं। राजेश तलवार जेल में अधिकारियों और कैदियों के दांतों का इलाज करते थे। वहीं नूपुर बच्चों और महिलाओं को पढ़ाती थीं। जिसके बदले में हर एक ने 49500 रुपए कमाए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक जेल से रिहा होने से पहले तलवार दंपति ने जेल में कमाए पैसों को कैदियों के कल्याण के लिए दान दे दिए। बता दें, हाई कोर्ट ने सबूतों का अभाव का हवाला देकर तलवार दंपति को आरुषि-हेमराज हत्याकांड में बरी कर दिया था। सोमवार को हाईकोर्ट ने उनके जेल से रिहाई के ऑर्डर जारी किए थे।

डासना जेल से रिहा होने से एक दिन पहले रविवार को तलवार दंपति ने अपने साथी कैदियों के साथ मुलाकात करने में अपना वक्त बिताया। इसके साथ ही जेल अस्पताल में दांतों का इलाज कराने के लिए मरीजों की संख्या भी काफी थी। राजेश तलवार आम दिनों में अस्पताल 9 बजे पहुंचते थे, लेकिन रविवार के दिन सुबह आठ बजे ही पहुंच गए थे और उन्होंने कैदियों का इलाज करना शुरू कर दिया। इसके अलावा नूपुर ने जेल के मंदिर में जाकर रविवार सुबह नाश्ते से पहले पूजा की।

बता दें, चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने तुरंत नूपुर तलवार और राजेश तलवार को जेल से रिहा करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने माना है कि जांच में कई खामियां हैं। ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट भी इतनी कठोर सजा नहीं देता है। तलवार दंपत्ति साल 2013 से गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं। उन्हें गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने इस हत्याकांड का दोषी करार देते हुए दोनों को उम्रकैद सुनाई थी। इसके बाद उनके वकीलों ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। तलवार दंपत्ति के वकील तनवीर अहमद ने तब सीबीआई कोर्ट के 204 पन्नों के फैसले पर उंगली उठाई थी।

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