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आप में अंदरूनी ‘कलह’

पार्टी में बढ़ती अंदरूनी कलह के बीच ‘आप’ प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने आज कहा कि संगठन में जो कुछ हो रहा है, उससे वह ‘‘व्यथित और आहत हैं ।’’ उन्होंने इसे ‘‘गंदी लड़ाई’’ करार दिया और कहा कि यह लोगों द्वारा जताए गए भरोसे के प्रति ‘‘विश्वासघात’’ है । दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आप के […]

Author March 3, 2015 6:26 PM
केजरीवाल ने तोड़ी चुप्पी, बोले पार्टी में चल रही गतिविधियों से दुखी हूं (फोटो: भाषा)

पार्टी में बढ़ती अंदरूनी कलह के बीच ‘आप’ प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने आज कहा कि संगठन में जो कुछ हो रहा है, उससे वह ‘‘व्यथित और आहत हैं ।’’ उन्होंने इसे ‘‘गंदी लड़ाई’’ करार दिया और कहा कि यह लोगों द्वारा जताए गए भरोसे के प्रति ‘‘विश्वासघात’’ है ।

दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आप के राष्ट्रीय संयोजक ने यह कहते हुए ‘‘गंदी लड़ाई’’ में पड़ने से इनकार किया कि वह दिल्ली के शासन पर ध्यान केंद्रित करेंगे ।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस गंदी लड़ाई में नहीं पड़ना चाहता । दिल्ली के शासन पर ध्यान केंद्रित करूंगा । किसी भी परिस्थिति में लोगों का विश्वास नहीं टूटने देंगे ।’’

आप के भीतर इन आरोपों के साथ गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए हैं कि वरिष्ठ आप नेता प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव केजरीवाल को पार्टी के संयोजक पद से ‘‘हटाने’’ की कोशिश कर रहे थे।

आप ने पार्टी में ताजा विवाद सहित इस तरह के सभी मुद्दों पर फैसला करने के लिए बुधवार को अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है ।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आप में एक बड़ा तबका यादव के विचारों के समर्थन में है और उस पर खुलकर बोलने भी लगा है। हालांकि पार्टी का एक तबका यह मानता है कि केजरीवाल इस पर अभी गंभीरता से विचार कर रहे हैं। एक बार वे फि र संयोजक पद छोड़ने की पेशकश कर सकते हैं। पार्टी का वह धड़ा जो खुद को दल का हितैषी होने का दावा करता है, वह पार्टी के विवाद को खत्म करने व आपसी सहमति से बीच का रास्ता निकालने की पेशकश कर रहा है।

सोमवार को आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने एक प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी के संरक्षक शांति भूषण पर उनके उस बयान को लेकर निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा था कि केजरीवाल के स्थान पर यादव को संयोजक बनाया जाना चाहिए। सिंह ने कहा कि पार्टी के भीतर में से कुछ नेता अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाकर उन्हें राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाने का प्रयास कर रहे हैं और पार्टी को बदनाम कर रहे हैं। प्रशांत भूषण और यादव का नाम लिए बगैर उन बयानों व पत्रों का हवाला दिया जिनके सामने आने के बाद से पार्टी के भीतर मतभेदों से जुड़ा विवाद खड़ा हुआ है।

आपसी संवाद वाले पत्रों के मीडिया में आने पर नाखुशी जाहिर करते हुए संजय सिंह ने कहा कि मुद्दों को मीडिया के जरिए सार्वजनिक करने के बजाय इन पर पार्टी के मंच पर चर्चा हो सकती थी। उन्होंने कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आगामी बुधवार को होगी और इसमें मतभेदों से जुड़े ताजा विवाद सहित सभी मुद्दों पर फैसला किया जाएगा।

संजय सिंह ने बार-बार पूछे गए इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्या यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी की सर्वोच्च इकाई राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) से हटाया जाएगा। कार्रवाई किए जाने से जुड़े सवालों पर सिंह ने कहा कि मैंने सिर्फ बैठक की तिथि के बारे में एलान किया है। उन्होेंने कहा कि पिछले सप्ताह जब राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी तब केजरीवाल ने इस्तीफे की पेशकश की तो सदस्यों ने इसका विरोध किया और इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को आप का राष्ट्रीय संयोजक बने रहना चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक, दरअसल पार्टी में मतभेद केजरीवाल व योगेंद्र के बीच कम मनीष सिसोदिया व यादव के बीच ज्यादा है। इसको कुछ लोग सीधे केजरीवाल व यादव के बीच का मतभेद बताने की कोशिश में लगे हैं।

वास्तव में विवाद उन दोनों में उतना नही हैं जितना मनीष के साथ है। इसीलिए केजरीवाल ने पिछली बैठक मे संयोजक पद से इस्तीफे की पेशकश भी की थी। मनीष सिसोदिया पहले भी यादव के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। इसका खुलासा सिसोदिया के उस पत्र से भी होता है जिसमें उन्होने आंतरिक लोकतंत्र क ा हवाला देते हुए आवाज उठाई थी। वह पत्र मीडिया में लीक कराया गया था। हालांकि इस विवाद की शुरुआत लोकसभा चुनावों से ही हो गई थी, जब योगेंद्र ने केजरीवाल पर बनारस से चुनाव लड़ने के लिए दबाव बनाया था। यादव अब भी पार्टी के विस्तार के अपने रुख पर कायम हैं।

सिंह ने कहा कि पिछले सप्ताह की बैठक में फैसला किया गया कि केजरीवाल राष्ट्रीय संयोजक बने रहेंगे और इस पद से उन्हें हटाने का कोई सवाल नहीं है। अब अगर यह मामला होगा तो पार्टी कैसे काम करेगी? उन्होंने कहा कि क्या पार्टी के स्वयंसेवी इसे पसंद करते हैं। जो लोग केजरीवाल को संयोजक पद से हटाना चाहते हैं उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं पर भी विचार करना चाहिए।

पार्टी के भीतर संकट उस वक्त और गहरा गया जब प्रशांत भूषण की ओर से पिछले हफ्ते लिखा गया पत्र सार्वजनिक हुआ। इस पत्र में भूषण ने कहा था कि एक व्यक्ति केंद्रित प्रचार अभियान से पार्टी दूसरे दलों की तरह दिखेगी और उन्होंने संगठन के भीतर अधिक स्वराज की पैरवी की थी। यादव के साथ भूषण ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी को एक साझा पत्र दिया था और नैतिकता व शिकायत समिति की बातों को लागू करने की मांग की थी।

 

 

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