आम आदमी पार्टी ने बीते दिनों राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाने के लिए सचिवालय को एक पत्र लिखा। इतना ही नहीं पार्टी ने चड्ढा की जगह अशोक मित्तल को उपनेता बनाने की घोषणा की है। आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा पर प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ संसद में आवाज उठाने से कतराने का आरोप लगाया गया था। वहीं राघव चड्ढा ने आरोपों को खारिज किया और कहा कि मैंने हमेशा संसद में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया है। मैं वहां सरकार पर दबाव डालने के लिए हूं। हंगामा करने के लिए नहीं। आइये अब जानते हैं कि आप की स्थापना के बाद से कौन-कौन से नेताओं ने पार्टी से किनारा कर लिया और इन सभी की क्या वजहें रहीं थीं।
योगेंद्र यादव
योगेंद्र यादव आम आदमी पार्टी के सह-संस्थापक थे। यादव को मार्च 2015 में ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में पार्टी से अचानक निकाल दिया गया। यह उनके लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा, “मुझे आश्चर्य नहीं है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से मामला इसी दिशा में बढ़ रहा था। हालांकि मैं इस बात से इनकार भी नहीं कर सकता कि मुझे इससे दुख हुआ है। अगर कोई आपको आपके ही घर से घसीटकर बाहर निकाल दे तो आपको कैसा लगेगा।”
प्रशांत भूषण
पेशे से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण आम आदमी पार्टी में इस उम्मीद से शामिल हुए थे कि यह पार्टी भ्रष्टाचार और दुर्भावना से मुक्त है और अन्य भ्रष्ट पार्टियों से अलग है। लेकिन उनकी यह उम्मीद तब टूट गई जब 2015 में उन्हें योगेंद्र यादव और आनंद कुमार के साथ पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर गुंडागर्दी और तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि केजरीवाल विरोध की आवाजों को बेरहमी से दबा रहे हैं।
शाजिया इल्मी
आम आदमी पार्टी की सह-संस्थापक शाजिया इल्मी ने भी मई 2014 में पार्टी के मूल मूल्यों का पालन न करने के कारण सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर लोकतंत्र की कमी ने उन्हें पद छोड़ने के लिए प्रेरित किया। इस्तीफे के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पार्टी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि केजरीवाल “एक ऐसे आंतरिक गुट के मार्गदर्शन में हैं जो पार्टी के भीतर लोकतंत्र को पनपने नहीं देता।”
यह भी पढ़ें: आम आदमी पार्टी छोड़ने या निकाले जाने पर जाएगी राघव चड्ढा की संसद सदस्यता?
कुमार विश्वास
कवि से राजनेता बने कुमार विश्वास ने आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मतभेदों का हवाला देते हुए खुद को पार्टी से अलग कर लिया।
आशुतोष
पेशे से पत्रकार आशुतोष ने एक समाचार चैनल में ऊंचा पद छोड़ने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हो गए। केजरीवाल के सबसे विश्वसनीय सहयोगियों में गिने जाने वाले आशुतोष ने अगस्त 2018 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया। पत्रकार से राजनेता बने आशुतोष ने कहा कि उनका इस्तीफा एक बेहद निजी कारण से था। हालांकि, ऐसी अफवाहें थीं कि यह कदम केजरीवाल द्वारा उन्हें राज्यसभा में सीट देने से इनकार करने के कारण उठाया गया था।
कपिल मिश्रा
मई 2017 में आम आदमी पार्टी की राजनीतिक समिति (PAC) ने कपिल मिश्रा को तब बर्खास्त कर दिया जब उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल और दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने खुद को इन दोनों के बीच हुए 2 करोड़ रुपये के घोटाले का चश्मदीद गवाह भी बताया। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को इस बड़े वित्तीय घोटाले के लिए जिम्मेदार ठहराया।
मयंक गांधी
सामाजिक कार्यकर्ता मयंक गांधी भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के प्रमुख सदस्यों में से एक थे। उन्होंने आम आदमी पार्टी के सदस्य के रूप में भी कार्य किया और महाराष्ट्र क्षेत्र से पार्टी का नेतृत्व किया। लेकिन केजरीवाल से मतभेद के बाद महाराष्ट्र में उनकी आप यूनिट भंग कर दी गई। गांधी ने कहा कि नेतृत्व पार्टी को नष्ट करने पर तुला हुआ है और ईमानदार राजनीति के मार्ग से भटक रहा है। उन्होंने 2015 में व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया।
आनंद कुमार
आनंद कुमार आम आदमी पार्टी के सह-संस्थापकों में से एक थे, जिन्हें योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के साथ पार्टी से निकाल दिया गया था। बाद में कुमार योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के गैर-राजनीतिक आंदोलन ‘स्वराज अभियान’ में शामिल हो गए।
अंजलि दमानिया
भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता और महाराष्ट्र में आप इकाई का चेहरा रहीं। उनके इस्तीफे की मुख्य वजह पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के साथ मतभेद थे। उन्होंने अपना इस्तीफा तब दिया था जब इस तरह के आरोप सामने आए कि केजरीवाल ने कथित तौर पर कांग्रेस विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कराने की कोशिश की थी।
अशोक अग्रवाल
पेशे से वकील और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों में से एक अशोक अग्रवाल ने मार्च 2014 में पार्टी को अंतिम विदाई दी। पार्टी छोड़ने का कारण यह था कि पार्टी एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह काम कर रही थी और दिशाहीन होती जा रही थी। केजरीवाल को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि वे पार्टी में इसके मजबूत सिद्धांतों के कारण शामिल हुए थे, लेकिन अब “जिन उद्देश्यों के लिए इसका गठन किया गया था, वे खोते जा रहे हैं।”
एमएस धीर
पार्टी छोड़ने से पहले वे आम आदमी पार्टी के विधायक और दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके थे। उन्होंने कहा कि केजरीवाल, जिन्होंने 49 दिनों तक दिल्ली पर शासन किया, दूसरे मौके के लायक नहीं थे। आम आदमी पार्टी के नेतृत्व में अंदरूनी कलह के कई मामले सामने आए।
पंजाब के मुद्दों पर वीडियो जारी कर AAP नेताओं को दिया जवाब
राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के हाशिए पर चले गए नेता राघव चड्ढा ने अपने पार्टी सहयोगियों के इस आरोप का खंडन किया है कि उन्होंने संसद में पंजाब के मुद्दों को नहीं उठाया। उन्होंने एक वीडियो जारी किया है जिसमें वह उच्च सदन में पंजाब से संबंधित मामलों का जिक्र करते नजर आ रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
