पंजाब अकेला राज्य है, जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है। ऐसे में उम्मीद थी कि पार्टी अपने नए राष्ट्रीय टीम में इस अहम सीमावर्ती राज्य पंजाब को अच्छी-खासी जगह देगी। लेकिन, 23 सदस्यों वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राज्य से सिर्फ़ तीन प्रतिनिधि हैं। इनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और मुख्यमंत्री के OSD (विशेष कार्याधिकारी) राजबीर सिंह घुमन को भी इसमें शामिल किया गया है।

उम्मीद के मुताबिक भगवंत मान और हरपाल चीमा को पार्टी की सबसे अहम फ़ैसला लेने वाली संस्था, 11 सदस्यों वाली ‘पॉलिटिकल अफ़ेयर्स कमिटी’ (PAC) में भी जगह मिली है। हालांकि राजबीर घुमन को मिली इस अहमियत ने पंजाब में चर्चा छेड़ दी है। वह न तो मंत्री हैं और न ही चुने हुए प्रतिनिधि लेकिन उनकी राजनीतिक अहमियत भगवंत मान के साथ उनकी नज़दीकी और मुख्यमंत्री के संगठनात्मक और राजनीतिक कामकाज में उनकी भूमिका से आती है।

केजरीवाल बने राष्ट्रीय संयोजक

बुधवार को हुई 15वीं राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अरविंद केजरीवाल को फिर से पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक चुना गया। केजरीवाल 2012 में पार्टी के बनने के समय से ही इसके राष्ट्रीय संयोजक रहे हैं। उनके सहयोगी विभव कुमार भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुए। कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों में आतिशी, आदिल अहमद खान, अनुराग ढांडा, दिलीप पांडे, दुर्गेश पाठक, गोपाल इटालिया, गोपाल राय, रानी अग्रवाल, मनीष सिसोदिया, मोहम्मद इरशाद, एनडी गुप्ता, पंकज गुप्ता, प्रीति शर्मा मेनन, पृथ्वी रेड्डी, राखी बिड़ला, संजय सिंह, सत्येंद्र जैन और शैली ओबेरॉय शामिल हैं।

पांच विशेष आमंत्रित सदस्यों में अजय दत्त, चैतर वसावा, इमरान हुसैन, मेहराज मलिक और वेंज़ी विएगास को भी शामिल किया गया है। AAP की पंजाब इकाई के प्रमुख और वरिष्ठ मंत्री अमन अरोड़ा को राष्ट्रीय कार्यकारिणी और PAC दोनों से ही बाहर रखा गया है। पार्टी के एक नेता ने अमन अरोड़ा के बाहर रहने को ज़्यादा अहमियत नहीं दी। नेता ने कहा, “उस हिसाब से तो दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को भी पैनल में शामिल किया जाना चाहिए। पार्टी में कई तरह की भूमिकाएं होती हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि किसे क्या मिलता है।” हालांकि अमन अरोड़ा ने फ़ोन कॉल का कोई जवाब नहीं दिया।

भगवंत मान के लिए ये घटनाक्रम उस पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक कदम है, जिसकी सत्ता का केंद्र पारंपरिक रूप से दिल्ली के नेतृत्व के पास रहा है। फरवरी 2025 में दिल्ली में हारने के बाद AAP अब सिर्फ पंजाब में सत्ता में है। इस वजह से भगवंत मान न सिर्फ पार्टी की इकलौती राज्य सरकार के मुखिया हैं, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व के बाहर पार्टी का सबसे अहम राजनीतिक चेहरा भी हैं।

हरपाल चीमा को मिला इनाम

हरपाल चीमा को मिली नई ज़िम्मेदारी की भी उम्मीद थी। वित्त मंत्री और सदन के उप-नेता के तौर पर वे सरकार के मुख्य राजनीतिक बचावकर्ताओं में से एक बन गए हैं। उन्हें यह ज़िम्मेदारी ऐसे मुश्किल राजनीतिक समय में मिली है जब उनके अपने इलाके में हालात ठीक नहीं हैं। हरपाल चीमा के दिरबा विधानसभा क्षेत्र के टूर बंजारा गांव के रहने वाले गुलज़ार सिंह की मौत ने विपक्ष को मंत्री के ख़िलाफ़ नया मुद्दा दे दिया है। गुलज़ार ने हरपाल चीमा की मौजूदगी वाली एक जनसभा में ड्रग्स की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई थी। बाद में उन्होंने जहर खा लिया और कुछ ग्रामीणों पर परेशान करने का आरोप लगाने के बाद उनकी मौत हो गई। इस मामले में पांच लोगों को गिरफ़्तार किया गया है।

इन हालात में हरपाल चीमा को शामिल करने से पता चलता है कि पार्टी नेतृत्व को उन पर भरोसा है। हरपाल चीमा इस फ़ैसले से बहुत खुश थे। उन्होंने कहा, “मैं पार्टी का शुक्रगुज़ार हूं कि उन्होंने मुझे अहम कमेटियों में शामिल करने लायक समझा। मैं एक वफ़ादार सिपाही की तरह पार्टी के लिए कड़ी मेहनत करूंगा।”

हालांकि राजबीर घुमन को शामिल करने से ही इस नए ढांचे को पंजाब के नजरिए से सबसे दिलचस्प मोड़ मिला है। उनके आगे बढ़ने को भगवंत मान के साथ उनकी नजदीकी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यह फ़ैसला उनके सहयोगी और उद्यमी नितिन गोहल से जुड़े विवाद के बाद आया है, जिनकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। राजबीर घुमन ने नितिन गोहल के साथ अपने संबंधों का बचाव करते हुए कहा था कि जांच राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है और वे ED की छापेमारी की वजह से दशकों पुरानी दोस्ती नहीं तोड़ेंगे। हालांकि राजबीर घुमन ने अपनी नियुक्ति पर टिप्पणी का जवाब नहीं दिया।

विपक्ष ने साधा निशाना

विपक्ष ने उनके आगे बढ़ने को भगवंत मान के करीबी लोगों के बढ़ते महत्व के सबूत के तौर पर पेश किया। शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता परमबंस सिंह रोमाना ने कहा कि राजबीर घुमन AAP का रोटी कमाने वाला बेटा है। उन्होंने 23 मेंबर वाली एग्जीक्यूटिव का मज़ाक उड़ाते हुए उसे अलीबाबा और उसके 23 चोर कहा। अमन अरोड़ा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “वह रिटायर्ड हर्ट हो चुके हैं। उन्हें अब AAP छोड़ देनी चाहिए।”

पंजाब विधानसभा में नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने इन नियुक्तियों को AAP के अंदर उभरते पावर स्ट्रगल का सबूत बनाने की कोशिश की। प्रताप बाजवा ने कहा, “ऐसा लगता है कि AAP के अंदर दो अलग-अलग पावर सेंटर बन रहे हैं, एक का लीडर भगवंत मान हैं, जबकि दूसरा ग्रुप उनके आस-पास बढ़ते अथॉरिटी के प्रभाव से साफ तौर पर असहज है।”

प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि अमन अरोड़ा को बाहर रखना नए अरेंजमेंट को समझने की चाबी है। उन्होंने कहा, “अगर पंजाब पार्टी अध्यक्ष को दो मुख्य नेशनल बॉडीज़ में से किसी में भी जगह नहीं मिलती है, जबकि चीफ मिनिस्टर के OSD को मिलती है, तो इससे सवाल उठता है कि असली संगठन का असर कहां है।”

प्रताप बाजवा ने कहा कि राजबीर घुमन से जुड़ा ED विवाद और उसके बाद अमन अरोड़ा के कथित सहयोगी के बारे में लगे आरोपों ने मामले को और उलझा दिया है। साथ ही उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आरोपों को सही प्रक्रिया से साबित किया जाना चाहिए।

AAP ने क्या कहा?

हालांकि AAP ने इस काम में राजनीतिक साज़िश को हटाने की कोशिश की। पार्टी के प्रवक्ता और आनंदपुर साहिब के सांसद मलविंदर सिंह कांग ने कहा कि ये नियुक्तियां अनुभव और काबिलियत के आधार पर की गई हैं। उन्होंने कहा, “पार्टी ने नेताओं के अनुभव और काबिलियत के आधार पर यह फैसला लिया है। इसमें नेताओं का अच्छा प्रतिनिधित्व है। वे पार्टी को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे।”

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